बीरूवाला में अवैध खनन पर सरकार का बड़ा वार: तड़के हुई कार्रवाई में चार पोकलेन और एक लोडर जब्त, माफियाओं में हड़कंप
बिजनौर/नजीबाबाद।
लंबे समय से अवैध खनन की शिकायतों से गूंज रहे नजीबाबाद के बीरूवाला खनन क्षेत्र में मंगलवार तड़के शासन ने बड़ी कार्रवाई कर दी। लखनऊ से आई विशेष खनन टीम ने जिले के खान एवं राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर छापा मारा तो पूरे इलाके में भगदड़ मच गई। टीम ने मौके से चार पोकलेन मशीनें और एक लोडर जब्त कर लिए।
यह कार्रवाई सुबह करीब पांच बजे उस समय हुई जब ज्यादातर मजदूर और मशीन ऑपरेटर रातभर के खनन के बाद साइट पर मौजूद थे। अचानक आई सरकारी गाड़ियों और पुलिस बल को देखकर कई लोग मशीनें छोड़कर भाग निकले।
स्वीकृत सीमा से कई गुना अधिक उत्खनन
छापेमारी टीम का नेतृत्व सहायक भू-विज्ञानी प्रशांत प्रभात ने किया। उनके साथ खनन अधिकारी ऐश्वर्य, निरीक्षक सुनील मौर्य, तहसीलदार संतोष यादव और नायब तहसीलदार अमित कुमार मौजूद रहे।
टीम ने मौके पर खनन क्षेत्र की पैमाइश कराई, जिसमें खुलासा हुआ कि पट्टा धारक ने शासन द्वारा स्वीकृत 17 बीघा क्षेत्र की सीमा से कई गुना अधिक हिस्से में अवैध खनन कर लिया था।
ग्रामीण बोले — “रात में चलती थीं पोकलेन, खेत बर्बाद हो गए”
गांव के लोगों ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि यह अवैध खनन कई महीनों से खुलेआम चल रहा था।
ग्राम प्रधान सुरजीत सिंह ने बताया —
“रात के अंधेरे में मशीनों की गड़गड़ाहट सुनाई देती थी। खेतों की मिट्टी कटकर नालों में भर गई, कई जगह पानी जमा होने से फसलें चौपट हो गईं। शिकायतें करते-करते थक गए थे। अब जाकर प्रशासन ने सुनवाई की है।”
ग्रामीण बलजीत सिंह और गुरजीत सिंह काका ने भी बताया कि लगातार हो रहे उत्खनन से गांव की ज़मीनें गहरी और असमतल हो गई हैं।
पट्टा निरस्तीकरण और जुर्माने की तैयारी
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि पट्टा धारक ने सीमा का उल्लंघन कर राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है।
अब पट्टा निरस्तीकरण, भारी जुर्माना, और राजस्व वसूली की कार्रवाई की तैयारी चल रही है। रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने जताई चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का अवैध और गहरा खनन क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लिए खतरा है। इससे भू-जल स्तर नीचे गिरता है और बरसाती पानी गहरे गड्ढों में भरकर मिट्टी के कटाव और भूमि बंजर होने जैसी समस्याएं बढ़ाता है।
खनन माफियाओं के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की चेतावनी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है।
शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अब ऐसे माफियाओं पर कड़ी निगरानी और लगातार छापे जारी रहेंगे।
गांव के लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह की सख्ती जारी रही, तो न केवल अवैध खनन पर रोक लगेगी बल्कि भूमि, फसल और पर्यावरण — तीनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी |












