Target Tv Live

UPSC Aspirant की गंगा में छलांग: IIT से बीटेक, सपनों के दबाव में टूटी होनहार ललिता सिंह की कहानी!

UPSC Aspirant की गंगा में छलांग: IIT से बीटेक, सपनों के दबाव में टूटी होनहार ललिता सिंह की कहानी!
मृतका का फाइल फोटो

📍 स्थान: गंगा बैराज, मुजफ्फरनगर-बिजनौर बॉर्डर
दिनांक: सोमवार सुबह, 3 नवम्बर 2025

सुबह की शांति, फिर गंगा किनारे गूंजा एक मासूम का रोना…

सुबह का वक्त था — गंगा का जल शांत था, हवा में ठंडक घुली थी।
इसी सन्नाटे को तोड़ते हुए एक चीख गूंजी — “माँ… मत जाओ!
लोगों ने देखा, एक महिला गेट नंबर 24 के पास से गंगा में छलांग लगा चुकी थी,
और किनारे खड़ी एक नन्ही बच्ची बेबस होकर पानी की लहरों को देख रही थी।

यह दृश्य जिसने हर देखने वाले को अंदर तक झकझोर दिया —
वह महिला कोई आम नहीं, बल्कि IIT कानपुर से बीटेक पास, UPSC की तैयारी कर रही ललिता सिंह थी।

IIT की मेधावी, UPSC की संघर्षशील — फिर क्यों टूटी हिम्मत?

ललिता सिंह, चांदपुर तहसील में तैनात अमीन वेद प्रकाश सिंह की बेटी,
एक उज्ज्वल भविष्य की पहचान थीं।
कानपुर IIT से बीटेक करने के बाद उन्होंने UPSC की कठिन राह चुनी थी।
दिन-रात मेहनत, किताबों का अंबार, मॉक टेस्ट, और उम्मीदों का भार —
सब कुछ था उनके जीवन में, सिवाय सुकून के।

परिवार के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से ललिता बेहद तनावग्रस्त और चुपचाप रहने लगी थीं।
कहा जा रहा है कि असफलता, पारिवारिक दबाव या मानसिक अवसाद — इनमें से कुछ ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया।

बेटी के सामने छलांग — माँ की अंतिम चुप्पी

सुबह करीब 6:30 बजे, ललिता अपनी छोटी बच्ची के साथ स्कूटी से गंगा बैराज पहुँचीं।
गेट नंबर-24 पर रुककर उन्होंने कुछ देर तक नदी को निहारा।
फिर धीरे से बच्ची को किनारे खड़ा कर,
बिना कुछ कहे — बस गंगा में कूद गईं।

बच्ची की चीख ने राहगीरों को रोक लिया।
कुछ ही पलों में पुल पर भीड़ जमा हो गई।
लोगों ने रस्सी फेंकने की कोशिश की, लेकिन लहरें ललिता को अपने साथ बहा ले गईं।

मौके पर हड़कंप — पुलिस, SDRF और गोताखोर तैनात

घटना की सूचना मिलते ही मुजफ्फरनगर और बिजनौर पुलिस मौके पर पहुँची।
SDRF की गोताखोर टीम गंगा में उतरकर लगातार सर्च अभियान चला रही है।
लेकिन अब तक ललिता का कोई सुराग नहीं मिला है।
परिजन सदमे में हैं — पिता वेद प्रकाश सिंह बार-बार एक ही सवाल दोहरा रहे हैं,
इतनी समझदार बेटी… आखिर क्यों?

स्थानीय लोगों का दर्द: “यह पहला मामला नहीं, बैराज बना मौत का पुल”

गांववालों ने मीडिया से बातचीत में कहा —

“यह गंगा बैराज अब हादसों का बैराज बन गया है।
रेलिंग इतनी नीची है कि कोई भी पल भर में कूद सकता है।
पहले भी कई लोग यहां से कूदकर अपनी जान दे चुके हैं।”

कुछ महीने पहले एक फौजी की पत्नी अपनी बच्ची संग इसी गेट से कूदी थी,
फिर कुछ दिन बाद फौजी पति ने भी उसी स्थान से छलांग लगा दी।
लेकिन अब तक उनके शवों का भी कोई पता नहीं।

स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि:

  • 🔹 गंगा बैराज पर ऊँची रेलिंग लगाई जाए
  • 🔹 हर गेट पर CCTV कैमरे लगाए जाएं
  • 🔹 सुरक्षा गार्ड और चेतावनी बोर्ड अनिवार्य किए जाएं

💭 एक गहरी सामाजिक सच्चाई — मानसिक दबाव की अनसुनी पुकार

ललिता का यह कदम सिर्फ एक “घटना” नहीं, बल्कि सिस्टम की चुप्पी पर सवाल है।
देशभर में हजारों युवा UPSC की तैयारी कर रहे हैं —
जहाँ हर साल केवल 0.1% ही चयनित होते हैं।
बाकी सब — संघर्ष, तनाव और आत्म-संशय से लड़ते हैं।

कई बार सफलता की दौड़ में संवेदना पीछे छूट जाती है।
परिवार, समाज और व्यवस्था — तीनों की चुप्पी ऐसी त्रासदियों को जन्म देती है।

तथ्य जो चिंतन को मजबूर करते हैं:

  • 🔸 पिछले 5 वर्षों में उत्तर भारत में UPSC व अन्य परीक्षाओं के दबाव से आत्महत्या के 40+ केस।
  • 🔸 इनमें से अधिकांश युवा इंजीनियरिंग या साइंस पृष्ठभूमि से रहे हैं।
  • 🔸 ललिता का मामला बताता है कि IIT जैसी उच्च शिक्षा भी मानसिक संघर्ष की गारंटी नहीं रोक पाती।

अब वक्त है सोचने का…

क्या प्रशासन ऐसे बैराजों को “संवेदनशील जोन” घोषित करेगा?
क्या कोचिंग और परीक्षा प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग अनिवार्य की जाएगी?
कब हम यह समझेंगे कि हर असफलता, अंत नहीं होती?

ललिता सिंह: एक नाम, जो अब सवाल बन गया है

IIT की वह मेधावी छात्रा, जो कभी देश की सेवा का सपना देखती थी,
आज गंगा की लहरों में खो गई — पीछे छोड़ गई एक मासूम बेटी और अनगिनत सवाल।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें