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फर्राटा दौड़ में कलीम व अवनी ने मारी बाजी, बोले पूर्व विधायक सुखबीर सिंह — “खेलों से बनता है शरीर भी मजबूत और भविष्य भी उज्ज्वल”

फर्राटा दौड़ में कलीम व अवनी ने मारी बाजी, बोले पूर्व विधायक सुखबीर सिंह — “खेलों से बनता है शरीर भी मजबूत और भविष्य भी उज्ज्वल”

न्याय पंचायत धर्मनगरी की मिनी खेलकूद प्रतियोगिता में बच्चों का जोश, स्टेडियम में गूंजे जयघोष

बिजनौर। नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में शनिवार का दिन खेल प्रेम और उत्साह से सराबोर रहा।
न्याय पंचायत धर्मनगरी की वार्षिक मिनी क्रीड़ा प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी प्रतिभा, फुर्ती और जोश से ऐसा समां बांधा कि पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
बालक वर्ग की 100 मीटर फर्राटा दौड़ में कलीम ने सबको पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल जीता, जबकि बालिका वर्ग में अवनी ने अपने शानदार प्रदर्शन से सबका दिल जीत लिया।

“शिक्षा के साथ खेल भी जीवन का दूसरा स्कूल हैं” — सुखबीर सिंह

पुरस्कार वितरण के अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व विधायक चौधरी सुखबीर सिंह ने कहा —

“जो बच्चे खेलों में आगे बढ़ते हैं, वही जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और दृढ़ता के साथ सफलता पाते हैं। शिक्षा जरूरी है, लेकिन स्वस्थ शरीर के बिना शिक्षा अधूरी है। खेल न केवल शरीर को तंदुरुस्त रखते हैं बल्कि देश का नाम भी रोशन करते हैं।”

उन्होंने विजयी खिलाड़ियों को मेडल पहनाकर सम्मानित किया और कहा कि आज के समय में खेल केवल शौक नहीं बल्कि रोजगार और सम्मान का सशक्त माध्यम बन चुके हैं।

उद्घाटन में दिखी शिक्षा और खेल की सुंदर संगति

कार्यक्रम का शुभारंभ जिला अधिकारी राजकुमार और खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. प्रभात कुमार ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
जिला अधिकारी ने कहा —

“खेलों से बच्चों में आत्मविश्वास और टीम भावना बढ़ती है। शिक्षा के साथ खेलों को प्राथमिकता देने से ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है।”

खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. प्रभात कुमार ने यह भी कहा कि हर विद्यालय में खेलों को नियमित अभ्यास का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास संतुलित हो सके।

खेल मैदान में दिखी जोश, हौसले और मित्रता की मिसाल

तेज धूप और ठंडी हवा के बीच स्टेडियम में बच्चों की फुर्ती देखते ही बनती थी।
कहीं “कलीम, कलीम!” की आवाजें गूंज रहीं थीं तो कहीं “अवनी अव्वल!” का नारा बच्चों और शिक्षकों को रोमांचित कर रहा था।
माता-पिता और अध्यापक भी साइडलाइन से बच्चों को उत्साहित करते नजर आए।

विजेता खिलाड़ियों की सूची

100 मीटर फर्राटा दौड़

  • प्राथमिक बालक वर्ग: 🥇 कलीम प्रथम, 🥈 फैशन द्वितीय
  • प्राथमिक बालिका वर्ग: 🥇 अवनी प्रथम, 🥈 इकरा द्वितीय
  • उच्च प्राथमिक बालक वर्ग: 🥇 अकबर प्रथम, 🥈 मनीष द्वितीय
  • उच्च प्राथमिक बालिका वर्ग: 🥇 सोने प्रथम, 🥈 विश सोनी द्वितीय

कबड्डी

  • बालिका वर्ग: काजूवाला टीम (प्रथम), धर्मनगरी टीम (द्वितीय)

खो-खो

  • बालिका वर्ग: कईवाला टीम (प्रथम)
  • बालक वर्ग: काजूवाला टीम (प्रथम), धर्मनगरी (द्वितीय)

बैडमिंटन

  • बालिका वर्ग: सोनिका (प्रथम), सोनी (द्वितीय)
  • बालक वर्ग: अरमान (प्रथम), देव (द्वितीय)

लंबी कूद

  • बालक वर्ग: श्याम (प्रथम), व्यक्ति (द्वितीय)
  • बालिका वर्ग: शबनूर (प्रथम), आलिया (द्वितीय)

हैंडबॉल

  • धर्मनगरी टीम (प्रथम), काजीवाला टीम (द्वितीय)

टीमवर्क से चमकी आयोजन की सफलता

इस प्रतियोगिता को सफल बनाने में जिला व्यायाम शिक्षक अरविंद अहलावत, ब्लॉक व्यायाम शिक्षक अमित चौधरी, संकुल प्रभारी मोहम्मद रईस अहमद खान, व्यायाम शिक्षिका तरनजीत कौर मलिक, और प्राथमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
इसके साथ मोहम्मद तारिक अलीम, कुनिका खत्री, जिला मंत्री प्रशांत सिंह, धर्म सिंह, सत्यवीर सिंह, मीनू सिंह, अनीता रानी, रचना कश्यप, धर्मवती, गीरेंद्र सिंह, पंकज ढाली, प्रशांत शर्मा, अशोक कुमार (स्काउट मास्टर) समेत अनेक शिक्षकों ने पूरी निष्ठा से सहयोग दिया।

समापन में छाई उत्सव जैसी रौनक

समापन अवसर पर रालोद नेता फैसल वासी और पूर्व विधायक सुखबीर सिंह ने मेडल व ट्रॉफी वितरित कर खिलाड़ियों को सम्मानित किया।
मंच से बच्चों को संदेश दिया गया कि —

“जो बच्चा खेलता है, वही जीवन में हार-जीत का महत्व समझता है। मैदान में गिरकर उठना सिखाने वाला खेल, जिंदगी में कभी हार नहीं मानने की प्रेरणा देता है।”

पूरा स्टेडियम उत्साह, तालियों और जयघोष से गूंज उठा।
छोटे-छोटे खिलाड़ी मेडल हाथ में लिए गर्व से भरे नजर आए।

विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण — ग्रामीण शिक्षा में खेलों की नई बयार

  • न्याय पंचायत स्तर पर इस तरह की प्रतियोगिताएं ग्राम्य बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने का सशक्त मंच हैं।
  • खेल के माध्यम से बच्चे टीमवर्क, अनुशासन, लक्ष्य-निष्ठा जैसे जीवन कौशल सीखते हैं।
  • यह आयोजन ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में “खेल-संस्कृति के पुनर्जागरण” का संकेत दे रहा है।
  • ऐसी प्रतियोगिताओं से बच्चों में न सिर्फ आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि भविष्य में राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व की राह भी खुलती है।

निष्कर्ष

“खेल जीवन की वह पाठशाला है, जो शरीर को ताकत, मन को शांति और आत्मा को आनंद देती है।”
न्याय पंचायत धर्मनगरी की मिनी खेलकूद प्रतियोगिता ने यह साबित कर दिया कि अगर बच्चों को मौका और मंच मिले — तो ग्रामीण क्षेत्र से भी ओलंपिक जैसी प्रतिभाएं निकल सकती हैं।

रिपोर्ट — राजेन्द्र सिंह, बिजनौर से
फोटो: नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम, धर्मनगरी
तारीख: 25 अक्टूबर 2025

 

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