Operation Vikas Bhavan part 3
मनरेगा कैटल शेड घोटाला: जलीलपुर में ₹8.51 लाख की हेराफेरी, मंडल आयुक्त सख्त — वर्तमान डीसी मनरेगा आर.बी. यादव जांच के घेरे में

किसानों के हक पर डाका — आदेशों की अवहेलना, फर्जी भुगतान और जिम्मेदारों पर मंडल आयुक्त का बड़ा एक्शन
बिजनौर/मुरादाबाद।
मनरेगा योजना में हुए एक बड़े घोटाले ने बिजनौर जिले के विकास खंड जलीलपुर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुरादाबाद मंडल आयुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह ने जांच में सामने आई ₹8.51 लाख की अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य विकास अधिकारी बिजनौर को कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इस प्रकरण के समय जलीलपुर ब्लॉक के तत्कालीन कार्यक्रम अधिकारी रहे आर.बी. यादव, जो अब डीसी मनरेगा (बिजनौर) के पद पर कार्यरत हैं, जांच के दायरे में आ गए हैं।
मामला क्या है?
मनरेगा के तहत पात्र ग्रामीणों को कैटल शेड निर्माण के लिए भुगतान किया जाना था।
आयुक्त के पूर्व आदेश (दिनांक 21 अगस्त 2024) के अनुसार केवल 22 पात्र लाभार्थियों को ही भुगतान की अनुमति थी।
लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि—
- 55 कैटल शेडों का भुगतान कर दिया गया।
- कुल ₹9,08,200 का भुगतान हुआ, जबकि ₹56,800 ही वैध पाया गया।
- बाकी ₹8,51,400 का भुगतान पूर्णतः अवैध और नियमविरुद्ध पाया गया।
- तत्कालीन कार्यक्रम अधिकारी आर.बी. यादव, लेखाकार और उपायुक्त (श्रम रोजगार) पर आदेशों की अवहेलना व वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप हैं।
आयुक्त का तीखा रुख
मुरादाबाद मंडल आयुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह ने अपने आदेश में लिखा है कि
“आपका स्पष्टीकरण पूर्णतया असंतोषजनक पाया गया है। यह प्रकरण गंभीर वित्तीय अनियमितता का द्योतक है। वरिष्ठ अधिकारी के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना की गई है, जिसे किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
आयुक्त ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया है कि —
- प्रथम दृष्टया दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें।
- ₹8,51,400 की पूर्ण वसूली संबंधितों से सुनिश्चित करें।
- निलंबन सहित कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ करें।
- 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
आदेशों की खुलेआम अवहेलना
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी के किसी सामान्य निर्देश का उपयोग कर वरिष्ठ अधिकारी के विशिष्ट आदेशों को निष्प्रभावी बनाना प्रशासनिक अनुशासन का उल्लंघन है।
आरोप है कि तत्कालीन कार्यक्रम अधिकारी आर.बी. यादव ने उपायुक्त (श्रम रोजगार) के पत्र का हवाला देकर अपने ही वरिष्ठ आदेश को दरकिनार किया।
किसानों में आक्रोश, कहा — “हमारे नाम पर बिल बने, कैटल शेड नहीं”
गांव के ग्रामीणों का कहना है कि जिनके नाम पर कैटल शेड स्वीकृत दिखाए गए, उन्हें न तो कोई निर्माण हुआ, न भुगतान की जानकारी दी गई।
एक ग्रामीण ने बताया —
“हमारे खेत पर कैटल शेड बना दिखा दिया गया, लेकिन ज़मीन पर कुछ भी नहीं है। अधिकारी खुद भुगतान ले गए।”
इस खुलासे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है और उच्चस्तरीय जांच व दोषियों की गिरफ्तारी की मांग उठ रही है।
मंडल स्तर पर सख्त निगरानी
आयुक्त ने केवल बिजनौर ही नहीं, बल्कि मुरादाबाद मंडल के अन्य जिलों — अमरोहा, रामपुर और सम्भल के सीडीओ को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने जनपदों में इस प्रकार की अनियमितताओं की जांच करें।
17 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
इस मामले में सीडीओ पूर्ण बोरा ने बताया कि रिकवरी करने के लिए कोई कारण नहीं क्योंकि केवल मजदूरों की मजदूरी का ही भुगतान किया गया है। किसी कॉन्ट्रेक्टर का कोई भुगतान नहीं किया गया है। जबकि स्थिति इसके विपरीत है।
इस प्रकरण में हमारे विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सामग्री सप्लायर को पांच लाख से अधिक धनराशि का भुगतान किया गया है। जो गबन की श्रेणी का मामला है। इस मामले में डी सी मनरेगा आर बी यादव विरुद्ध विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
सवाल जो उठ रहे हैं
- क्या वर्तमान डीसी मनरेगा आर.बी. यादव पर विभागीय कार्रवाई होगी?
- क्या ₹8.51 लाख की अनियमित राशि वास्तव में वसूल की जाएगी?
- क्या यह मनरेगा के धन की लूट का केवल एक हिस्सा है?
निष्कर्ष
यह मामला केवल भ्रष्टाचार की कहानी नहीं, बल्कि किसानों के हक पर हुआ एक योजनाबद्ध हमला है।
जहां मनरेगा जैसी योजना गरीबों के सशक्तिकरण का प्रतीक है, वहीं कुछ अधिकारियों ने इसे अपनी जेब भरने का जरिया बना लिया।
मंडल आयुक्त की सख्ती ने इस घोटाले को उजागर कर दिया है, लेकिन अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या आर.बी. यादव और अन्य जिम्मेदारों पर वास्तविक कार्रवाई होती है या यह फाइल भी बाकी मामलों की तरह दबा दी जाएगी।











