पराली न जलाएं, मुनाफा बढ़ाएं!
शामली में किसानों को मिला पर्यावरण संरक्षण और फसल अवशेष प्रबंधन का मंत्र
शामली, संवाददाता।
पर्यावरण और कृषि—दोनों की सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को देव गार्डन मैरिज होम, शामली में एक विशेष कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम “Promotion of Agricultural Mechanization for In-situ Crop Residue Management” और “Sub Mission on Agriculture Extension (SMAE)” योजना के अंतर्गत आयोजित हुआ।
मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य चौधरी वीरेन्द्र सिंह व विशिष्ट अतिथि ब्लॉक प्रमुख डॉ. विनोद मलिक ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसी दौरान फसल अवशेष प्रबंधन के प्रचार-प्रसार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां
- किसानों को पराली प्रबंधन की आधुनिक तकनीकें सिखाई गईं।
- इन-सिटु मशीनों जैसे सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, रीपर-कम-बाइंडर, रोटावेटर आदि का प्रदर्शन।
- पराली जलाने पर जुर्माने की सख्त जानकारी साझा की गई।
- प्रगतिशील किसानों को सम्मानित कर दिया गया प्रेरक संदेश – “पराली को जलाओ नहीं, सड़ाओ और खाद बनाओ।”
विश्लेषण: कृषि और पर्यावरण का दोहरा लाभ
कृषि वैज्ञानिक डॉ. साकिब प्रवेज ने बताया कि फसल अवशेष खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जबकि जलाने से पर्यावरण और किसान दोनों को नुकसान होता है।
प्रोफेसर डॉ. रोहित राणा ने कहा,
“फसल अवशेष मिट्टी में सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन हैं। जब इन्हें जलाया नहीं जाता, तो यह खेत की उत्पादकता बढ़ाते हैं।”
ब्लॉक प्रमुख डॉ. विनोद मलिक ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए ईंट भट्टों से निकलते प्रदूषण पर चिंता जताई और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के विचार साझा किए।

फसल अवशेष जलाने पर सख्त दंड
उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार ने बताया कि पराली जलाने वालों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
जुर्माने की दरें इस प्रकार निर्धारित हैं —
- 🔸 2 एकड़ तक क्षेत्र: ₹5000 प्रति घटना
- 🔸 2 से 5 एकड़ क्षेत्र: ₹10,000 प्रति घटना
- 🔸 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र: ₹30,000 प्रति घटना
👉 दोहराव की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की जाएगी।
🌱 मुख्य विकास अधिकारी का संदेश
सीडीओ विनय तिवारी ने कहा —
“फसल अवशेष को जलाने से मिट्टी में मौजूद कार्बन नष्ट हो जाता है।
यही कारण है कि किसान को अगली फसल में अधिक लागत लगती है।
यदि किसान अवशेष को सड़ाकर खेत में मिलाएं तो उत्पादन बढ़ता है और लागत घटती है।”
कृषि यंत्रीकरण व मिश्रित खेती पर जोर
जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि अब किसान ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से कृषि यंत्रीकरण योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।
उन्होंने गन्ना के साथ सरसों की सहफसली खेती के फायदे बताते हुए मिश्रित खेती को किसानों के आर्थिक उत्थान का मजबूत माध्यम बताया।
प्रगतिशील किसानों को सम्मान
कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों —
जल सिंह, संजय ठाकुर, वेदपाल, सोमपाल, जितेंद्र कुमार — को
प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अंतिम संदेश
मुख्य अतिथि चौधरी वीरेन्द्र सिंह ने कहा —
“पराली जलाना बंद करें।
यह न केवल भूमि की उर्वरता घटाता है बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है।
सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर किसान समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ें।”
मंच संचालन डॉ. संजय कुमार ने किया।
कार्यक्रम में आरकेपीजी कॉलेज के छात्र-छात्राओं, किसानों और कृषि विभाग के अधिकारियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
मुख्य आकर्षण
- कृषि यंत्रों की लाइव डेमो
- पराली से खाद बनाने की विधि पर प्रेजेंटेशन
- सम्मान समारोह
- प्रचार-प्रसार वाहन को हरी झंडी
निष्कर्ष
यह कार्यक्रम किसानों के लिए केवल एक जागरूकता मंच नहीं, बल्कि “पराली से पर्यावरण बचाओ, मिट्टी को उपजाऊ बनाओ” का आंदोलन था।
शामली के किसानों ने अब यह ठान लिया है कि फसल अवशेष जलाना नहीं, सड़ाना है – तभी धरती बचेगी और खेती बढ़ेगी।












