शिक्षा सुधार की दिशा में नई पहल: प्राथमिक विद्यालय छितपालगढ़ में निरीक्षण से खुला विकास का रास्ता
📍प्रतापगढ़ | रिपोर्ट : अद्वैत दशरथ तिवारी
बेसिक शिक्षा परिषद की अकादमिक पहल से शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम
प्राथमिक शिक्षा को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद, प्रतापगढ़ ने एक नया प्रयोग शुरू किया है। अध्यापकों के समक्ष आ रही चुनौतियों के समाधान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अकादमिक रिसोर्स ग्रुप (ARG) का गठन किया गया है।
इसी क्रम में मान्धाता ब्लॉक के सामाजिक विषय के ए.आर.पी. अभिषेक सिंह ने प्राथमिक विद्यालय छितपालगढ़ का सहयोगात्मक निरीक्षण किया और विद्यालय में हो रहे शैक्षिक नवाचारों की सराहना की।
निरीक्षण में मिली प्रेरणादायक झलकियाँ
निरीक्षण के दौरान ए.आर.पी. अभिषेक सिंह ने विद्यालय के वातावरण और शिक्षकों की रचनात्मकता को सराहा। उन्होंने कहा कि—
“यह विद्यालय न केवल पढ़ाई बल्कि नवाचार और सृजनशीलता का भी केंद्र बन चुका है।”
🔹 प्रमुख बिंदु :
- करके सीखने (Learning by Doing) की पद्धति को विद्यालय ने प्रभावी रूप से अपनाया है।
- सहायक अधिगम सामग्री (TLM) का नवाचारी उपयोग शिक्षण को रोचक बना रहा है।
- स्मार्ट क्लास तकनीक के प्रयोग से बच्चों की विषयों में पकड़ मजबूत हो रही है।
- शिक्षक-शिक्षिकाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित कर रही है।
प्रधानाध्यापक की संकल्प कहानी – “अपने ही विद्यालय को प्रदेश में सर्वोच्च बनाऊँगा”
विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेश प्रताप सिंह ने बताया कि वे इसी विद्यालय के छात्र रह चुके हैं और उनका लक्ष्य है कि —
“जिस विद्यालय से मैंने शिक्षा पाई, उसे प्रदेश के शीर्षस्थ विद्यालयों में शामिल करूँ।”
उन्होंने शिक्षकों के सहयोग, तकनीक के प्रयोग और सामुदायिक सहभागिता को इस दिशा में मुख्य आधार स्तंभ बताया।
निरीक्षण का उद्देश्य — सुधार नहीं, सहयोग का भाव
अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि यह निरीक्षण किसी त्रुटि खोजने के लिए नहीं, बल्कि सहयोगात्मक निरीक्षण था, जिससे शिक्षकों की चुनौतियों को समझकर उन्हें समाधान आधारित सुझाव दिए जा सकें।
विश्लेषणात्मक दृष्टि : क्यों अहम है यह पहल
- 🔸 शिक्षा गुणवत्ता सुधार के लिए जमीनी स्तर पर निरीक्षण से वास्तविक स्थिति का पता चलता है।
- 🔸 ARG मॉडल से शिक्षक-से-शिक्षक सीखने की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
- 🔸 तकनीक और नवाचार को जोड़कर प्राथमिक शिक्षा को भविष्य के अनुकूल बनाया जा सकता है।
- 🔸 इस तरह की पहलें “हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा” के लक्ष्य को साकार करने में सहायक हैं।
निष्कर्ष : छितपालगढ़ मॉडल बन सकता है आदर्श
प्राथमिक विद्यालय छितपालगढ़ में हुए निरीक्षण ने यह साबित कर दिया कि यदि शिक्षक, तकनीक और नवाचार साथ आएं, तो सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्टता की मिसाल बन सकते हैं।
यह पहल न केवल एक विद्यालय का निरीक्षण थी, बल्कि भविष्य की शिक्षा सुधार यात्रा की झलक भी थी।
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