मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से ‘इन्वेस्ट यूपी’ का बड़ा पुनर्गठन
अब मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और दिल्ली में सैटेलाइट ऑफिस — निवेशकों से सीधा संवाद, तेज़ फैसले और पारदर्शिता पर ज़ोर
🔸 मुख्य बातें एक नज़र में
- इन्वेस्ट यूपी का पुनर्गठन मंजूर — विशेषज्ञता आधारित और निवेशक-केंद्रित संस्था बनेगी।
- सैटेलाइट ऑफिस — मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और दिल्ली में खुलेंगे।
- स्पेशलाइज्ड सेल्स का गठन — टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, केमिकल और सर्विस सेक्टर में।
- ‘सेफ इंडस्ट्री’ कॉन्सेप्ट — सीसीटीवी और बेहतर सुरक्षा से निवेशकों में भरोसा बढ़ेगा।
- ‘निवेश मित्र पोर्टल 3.0’ लॉन्च — 50% तक कागजी कार्यवाही में कमी, एआई चैटबॉट और डिजिटल मॉनिटरिंग।
- 2024-25 में 4,000 नई फैक्ट्रियाँ स्थापित, अब कुल संख्या पहुँची 27,000।
- फॉर्च्यून 1000 की 814 कंपनियों को अकाउंट मैनेजर आवंटित।
- 219 विदेशी कंपनियाँ निवेश प्रक्रिया के सक्रिय चरण में।
‘इन्वेस्ट यूपी’ बनेगा ‘एकल निवेश सुविधा एजेंसी’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इन्वेस्ट यूपी शासी निकाय की पहली बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया।
अब इन्वेस्ट यूपी न सिर्फ निवेश आकर्षित करेगा बल्कि परियोजनाओं की मॉनिटरिंग और त्वरित क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा —
“हमारा लक्ष्य है इन्वेस्ट यूपी को निवेशक-केंद्रित, दक्ष और परिणामोन्मुख बनाना। हर प्रकोष्ठ का कार्यक्षेत्र स्पष्ट और जवाबदेही आधारित होगा।”
नए ऑफिसों से जुड़ेगा ग्लोबल नेटवर्क
उत्तर प्रदेश सरकार अब देश-विदेश के निवेशकों के और करीब होगी।
- मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और दिल्ली में सैटेलाइट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन ऑफिस स्थापित किए जा रहे हैं।
- इन ऑफिसों के ज़रिए जापान, कोरिया, जर्मनी और खाड़ी देशों के निवेशकों से सीधा संवाद बढ़ेगा।
- प्रत्येक फोकस कंट्री डेस्क से ठोस निवेश परिणाम प्राप्त करने पर जोर रहेगा।
‘चाइना+1’ रणनीति में यूपी की बड़ी छलांग
‘चाइना+1’ रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पसंदीदा ठिकाना बन रहा है।
वर्तमान में 219 कंपनियाँ सक्रिय निवेश प्रक्रिया में हैं, जिनमें जापान, कोरिया और ताइवान की अग्रणी कंपनियाँ शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया —
“सभी विभाग समन्वय के साथ काम करें, ताकि हर निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतर सके।”
भूमि बैंक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी फोकस
- औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के पास 25,000 एकड़ से अधिक ग्रीनफील्ड भूमि और 6,300 एकड़ रेडी-टू-मूव भूमि उपलब्ध।
- 33,000 से अधिक औद्योगिक भूखंडों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।
- सीएम ने कहा — किसानों को उचित मुआवजा मिले और सर्किल रेट की असमानताएँ समाप्त की जाएँ।
- अप्रयुक्त औद्योगिक भूखंड समयसीमा के बाद निरस्त कर नए निवेशकों को दिए जाएंगे।
‘निवेश मित्र पोर्टल 3.0’ — निवेशकों के लिए डिजिटल क्रांति
नया पोर्टल निवेश प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना देगा।
इसमें होंगी ये प्रमुख सुविधाएँ:
- सिंगल साइन-ऑन सिस्टम
- डायनेमिक एप्लीकेशन प्रोसेस
- एआई चैटबॉट
- थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन
- डिजिटल मॉनिटरिंग
📈 इससे आवेदन से लेकर स्वीकृति तक का समय 30% कम होगा और दस्तावेजी औपचारिकताएँ 50% तक घटेंगी।
‘सेफ सिटी’ की तरह अब बनेगा ‘सेफ इंडस्ट्री’ मॉडल
मुख्यमंत्री ने नई अवधारणा रखी — ‘सेफ इंडस्ट्री’, जिसके तहत:
- औद्योगिक क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ेगी,
- सुरक्षा और निगरानी के आधुनिक इंतज़ाम होंगे,
- निवेशकों और उद्यमियों में भरोसा और निश्चिंतता का माहौल बनेगा।
संख्याओं में यूपी की औद्योगिक प्रगति
| वर्ष | नई स्थापित फैक्ट्रियाँ | कुल संख्या |
|---|---|---|
| 2022-23 | ~500 प्रतिवर्ष | ~19,000 |
| 2024-25 | 4,000 | 27,000 |
📍50 नए एमओयू साइन हुए, जबकि 280 से अधिक कंपनियों से संवाद जारी है।
नीति, पारदर्शिता और परिणाम पर फोकस
मुख्यमंत्री ने विभागों को निर्देशित किया:
- हर माह लक्ष्य तय करें।
- लेटर्स ऑफ कम्फर्ट जारी करने की प्रक्रिया समयबद्ध करें।
- निवेश प्रोत्साहन और इंसेंटिव बिना देरी के वितरित हों।
- इंडस्ट्रियल बिल्डिंग बायलॉज को निवेशक हितैषी बनाया जाए।
बैठक में उपस्थित रहे शीर्ष मंत्रीगण
बैठक में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’,
नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा,
एमएसएमई मंत्री राकेश सचान,
राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी और शासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
🔹 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल सिर्फ संरचनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि औद्योगिक क्रांति 2.0 की दिशा में निर्णायक कदम है।
‘इन्वेस्ट यूपी’ का नया रूप निवेशकों को एक पारदर्शी, सुरक्षित और दक्ष प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा —
जहाँ “Ease of Doing Business” सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई बनता जा रहा है।
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