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भरत मिलाप उत्सव संपन्न: आस्था, अनुशासन और भाईचारे से झूम उठा प्रतापगढ़

भरत मिलाप उत्सव संपन्न: आस्था, अनुशासन और भाईचारे से झूम उठा प्रतापगढ़

डीएम शिव सहाय अवस्थी और एसपी दीपक भूकर ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की आरती उतारी — जनसैलाब ने उत्सव को बनाया ऐतिहासिक, प्रशासनिक व्यवस्था की रही सराहना

प्रतापगढ़।
आस्था, परंपरा और भाईचारे का अद्भुत संगम देखने को मिला जब प्रतापगढ़ में सैकड़ों वर्षों पुराना भरत मिलाप उत्सव पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
जनपद का यह ऐतिहासिक पर्व हर वर्ष की भाँति इस बार भी शांति, अनुशासन और आपसी सद्भाव के वातावरण में मनाया गया।
सुबह से ही कस्बे की गलियों और मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।
रामलीला मंच पर भगवान श्रीराम और भरत के पुनर्मिलन के दृश्य ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

आरती के साथ हुआ आयोजन का समापन

कार्यक्रम के सफल समापन पर जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी और पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर स्वयं मंच पर पहुंचे।
दोनों अधिकारियों ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती कर जनपदवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
मंच पर आरती के समय “जय श्रीराम” और “भरत-राम मिलन अमर रहे” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
रामलीला समिति ने इस अवसर पर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

अधिकारियों ने जनता और समिति का जताया आभार

जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने अपने उद्बोधन में कहा —

“भरत मिलाप का पर्व भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह भाईचारे, एकता और सद्भाव का अमर प्रतीक है।
प्रतापगढ़ की जनता ने अनुशासन, संयम और आपसी सहयोग से इस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता दिलाई है।
प्रशासन जनता के सहयोग के लिए कृतज्ञ है।”

वहीं पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने सुरक्षा व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए कहा —

“प्रतापगढ़ पुलिस ने हर मोर्चे पर पूरी सजगता और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया।
भीड़ नियंत्रण, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी रही।
हम आगे भी हर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में इसी सतर्कता के साथ कार्य करेंगे।”

सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

इस वर्ष भरत मिलाप मेले में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में रही, लेकिन पूरी भीड़ अनुशासित और शांतिपूर्ण रही।
सीसीटीवी कैमरे, पुलिस बैरिकेडिंग, ड्रोन मॉनिटरिंग और स्वयंसेवकों की तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य रही।
मेला क्षेत्र में महिला पुलिस बल भी सक्रिय रहा।
कोई अप्रिय घटना न होने से जनपद प्रशासन की तैयारियों की हर ओर प्रशंसा की जा रही है।

परंपरा, भक्ति और भावनाओं का संगम

भरत मिलाप का दृश्य जब मंच पर प्रस्तुत हुआ, तो रामभक्तों की आंखें नम हो उठीं।
भरत और श्रीराम का मिलन, प्रेम और त्याग की भावना से परिपूर्ण यह प्रसंग हर वर्ष लोगों के हृदय में भक्ति और नैतिकता का नवसंचार करता है।
स्थानीय कलाकारों ने रामलीला समिति के निर्देशन में भक्ति संगीत, रामचरितमानस के दोहे और नृत्य नाटिका के माध्यम से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

भीड़ में व्यवस्था और उत्साह का संतुलन

भक्तजन भले ही हजारों की संख्या में थे, लेकिन पूरा मेला परिसर सुव्यवस्थित दिखा।
स्वयंसेवक, नगर पालिका कर्मचारी और पुलिस बल लगातार सक्रिय रहे।
अन्नक्षेत्र और प्रसाद वितरण स्थलों पर भी व्यवस्थाएं सराहनीय रहीं।
हर आयु वर्ग के श्रद्धालु — महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग — सभी में एक ही भावना थी: रामभक्ति और भाईचारा।

संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक उत्सव

यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों — परिवार, प्रेम, त्याग और धर्मपालन — की जीवंत व्याख्या है।
पीढ़ियों से यह परंपरा प्रतापगढ़ की पहचान बन चुकी है।
आज भी यह पर्व समाज को यह सिखाता है कि —

“सत्ता, वैभव और अहंकार से बड़ा है प्रेम, त्याग और कर्तव्य।”

💫 मुख्य आकर्षण एवं हाइलाइट्स

  • 📍 स्थान: मुख्य रामलीला मैदान, प्रतापगढ़
  • 🗓️ अवसर: पारंपरिक भरत मिलाप उत्सव
  • 🙏 मुख्य अतिथि: जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी, पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर
  • 🎭 आयोजनकर्ता: रामलीला समिति, प्रतापगढ़
  • 🌼 विशेष आकर्षण: श्रीराम-भरत मिलन की झांकी, भक्ति संगीत और आरती
  • 👮 सुरक्षा व्यवस्था: सीसीटीवी निगरानी, पुलिस गश्त, महिला बल की तैनाती
  • 🌸 मुख्य संदेश: एकता, प्रेम, सद्भाव और अनुशासन का प्रतीक पर्व

संक्षिप्त विश्लेषण

प्रतापगढ़ का भरत मिलाप केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक अनुशासन का उदाहरण बन चुका है।
इस वर्ष आयोजन में जिस प्रकार से भीड़ नियंत्रण, भक्ति और व्यवस्था का सामंजस्य दिखा —
वह प्रतापगढ़ के संस्कार, नागरिक जागरूकता और संस्कृति के गहरे मूल्यों को उजागर करता है।

✍️ रिपोर्ट: अद्वैत दशरथ तिवारी
(प्रतापगढ़ संवाददाता)

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