प्रतापगढ़ में आज गूंजेगा ‘जय श्रीराम’ का जयघोष
165 साल पुरानी भरत मिलाप परंपरा का भव्य आयोजन — ड्रोन से निगरानी, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा तैनात
📍रिपोर्ट: अद्वैत दशरथ तिवारी | प्रतापगढ़
आस्था, परंपरा और उत्साह का संगम
आज प्रतापगढ़ एक बार फिर भक्ति और भावनाओं के महासमागम का साक्षी बनने जा रहा है।
ऐतिहासिक भरत मिलाप उत्सव, जो पिछले 165 वर्षों से धार्मिक परंपरा का गौरवशाली प्रतीक रहा है, इस बार और भी भव्य रूप में मनाया जा रहा है।
रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जिले की सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन चुका है।
इतिहास की झलक:
1859 में शुरू हुई इस परंपरा को प्रतिवर्ष दीपावली के बाद आयोजित किया जाता है, जब भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का मिलन दृश्य मंचित किया जाता है।
यह दृश्य मर्यादा, त्याग और भाईचारे की अमर मिसाल को जीवंत करता है — और यही कारण है कि यह आयोजन प्रतापगढ़ की पहचान बन चुका है।
चार दर्जन झांकियों में झलकेगा रामायण का जीवन दर्शन
इस वर्ष के आयोजन में चार दर्जन से अधिक झांकियाँ निकाली जा रही हैं।
सड़कों पर सजी ये झांकियाँ प्रकाश, संगीत और भक्ति रस से सराबोर होंगी —
जहाँ कलाकार भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर भरत मिलन तक की कथा को जीवंत करेंगे।
- आकर्षक LED लाइट झांकियाँ,
- पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज,
- और मंचन के दौरान ‘जय श्रीराम’ के नारे — पूरा वातावरण राममय होगा।
भीड़ के बीच श्रद्धालु फूलों की वर्षा करते हुए भावविभोर नज़रों से मंचन का आनंद लेंगे।
ड्रोन की नजर से सुरक्षित रहेगा उत्सव स्थल
इस वर्ष प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कड़े और आधुनिक इंतज़ाम किए हैं।
पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर के निर्देशन में शहर को सुरक्षात्मक घेरे में ले लिया गया है।
🔹 मुख्य बिंदु:
- शहर भर में ड्रोन कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग।
- पुलिस बल, पीएसी और क्यूआरटी टीमें पूरे क्षेत्र में तैनात।
- मेले क्षेत्र में अस्थायी चौकियाँ और कंट्रोल रूम स्थापित।
- ट्रैफिक पुलिस द्वारा रूट डायवर्जन लागू।
- आपातकालीन स्वास्थ्य दल और फायर यूनिट्स भी अलर्ट मोड पर।
ड्रोन कैमरे भीड़ के हर मूवमेंट को रियल टाइम डेटा के जरिए मॉनिटर कर रहे हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव है।
यातायात व्यवस्था में सख्ती, श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए
पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक रूट मैप पहले से जारी किया है।
- प्रमुख मार्गों पर बैरिकेटिंग और वन-वे सिस्टम लागू किया गया है।
- दोपहिया वाहनों के लिए अलग पार्किंग जोन बनाए गए हैं।
- स्थानीय नागरिकों से अनुरोध है कि वे
👉 अनावश्यक भीड़भाड़ न करें,
👉 सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करें,
👉 बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
“धार्मिक एकता का प्रतीक बन चुका है भरत मिलाप” — संयोजक दिनेश सिंह दिन्नु
भरत मिलाप आयोजन समिति के संयोजक दिनेश सिंह दिन्नु ने बताया,
“यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सौहार्द और भाईचारे का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
हर वर्ग, हर धर्म के लोग इस मेले में एक साथ आते हैं — यही प्रतापगढ़ की असली ताकत है।”
विश्लेषण : परंपरा में आधुनिकता का संतुलन
इस वर्ष का भरत मिलाप उत्सव प्रतापगढ़ की उस नई तस्वीर को दर्शाता है जहाँ —
आस्था और प्रशासनिक दक्षता दोनों समान रूप से आगे बढ़ रहे हैं।
🔸 ड्रोन मॉनिटरिंग और डिजिटल सुरक्षा से आयोजन को आधुनिक तकनीक का सहारा मिला है।
🔸 प्रशासन ने यह साबित किया है कि आस्था को सुरक्षित रखना भी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
🔸 यह आयोजन भविष्य में सुरक्षित धार्मिक कार्यक्रमों का मॉडल बन सकता है।
🌈 निष्कर्ष : श्रद्धा, सुरक्षा और संस्कृति का अनोखा संगम
प्रतापगढ़ का भरत मिलाप केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं —
यह वह परंपरा है जो भाईचारे, अनुशासन और भारतीय संस्कृति की आत्मा को जीवित रखे हुए है।
165 वर्षों से निरंतर चल रही यह परंपरा बताती है कि —
“जहाँ आस्था अडिग हो, वहाँ परंपरा अमर रहती है।”
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