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“डीएम के आदेश फेल, विभाग मौन: बिजनौर में मिट्टी खनन का बड़ा खेल”

अवैध खनन का संगठित खेल: करनपुर गावड़ी में नियमों की उड़ी धज्जियां

सूत्रों के अनुसार 8000 घन मीटर की आड़ में 16000 घन मीटर से अधिक का खनन, विभागीय मिलीभगत पर सवाल
सीसीटीवी में कैद ट्रैक्टर, पुलिस चौकी के सामने से गुजरता माफिया तंत्र

रवन्ने पर,अनेक चक्कर से अधिकारी गुमराह या सेटिंग का खेल

विभाग द्वारा एक ट्रैक्टर ट्रॉली के लिए मात्र तीन घन मीटर मिट्टी की होती है परमिशन

बिजनौर/चांदपुर, संवाददाता।
बिजनौर जनपद का चांदपुर तहसील क्षेत्र अवैध मिट्टी खनन का गढ़ बन चुका है। गांव करनपुर गाड़ी इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है, जहां 8000 घन मीटर की परमिशन की आड़ में 16000 घन मीटर से अधिक मिट्टी का खनन किया जा चुका है। खनन विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अफसर सबकुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बने हुए हैं।

मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर भी बने दर्शक

जब खनन निरीक्षक मौके पर पहुंचे तो उन्होंने खनन होते हुए अपनी आंखों से देखा, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ चेतावनी देकर खननकर्ताओं को छोड़ दिया

  • उनका कहना था कि यह मामला परिवहन विभाग (आरटीओ) का है।
  • आरटीओ भी माफिया दबाव या माहवारी के खेल में उलझे दिख रहे हैं और ट्रैक्टर पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।

पुलिस चौकी पैजनियां के सामने से गुजर रहे ट्रैक्टर

  • रोजाना 15 से 20 कृषि कार्य हेतु पंजीकृत और गैर पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉली सुबह से शाम तक पुलिस चौकी पैजनियां के सामने से गुजरते हैं।
  • ये वाहन सीसीटीवी कैमरे में कैद भी हो चुके हैं।
  • पुलिस चौकी सूत्रों का कहना है—

    “हम अपने उच्च अधिकारियों के सामने बेबस हैं, आदेश के बिना कुछ नहीं कर सकते।”

परमिशन साइट से इतर भी हो रहा खनन

करनपुर गाड़ी ही नहीं, बल्कि परमिशन साइट से सटे अन्य गांवों और खेतों से भी मिट्टी निकाली जा रही है। इससे साफ है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति या ठेकेदार का खेल नहीं, बल्कि पूरा का पूरा संगठित नेटवर्क है।

दो ही कारण: “माहवारी” या “माफिया दबाव”

स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों की चुप्पी के पीछे दो वजहें साफ दिखाई देती हैं:

  1. माहवारी का खेल – हर ट्रैक्टर से तय रकम अधिकारियों तक पहुंचती है।
  2. माफिया का दबाव – खनन कारोबार से जुड़े संगठित गिरोह का इतना दबदबा है कि कोई भी अधिकारी कार्रवाई करने का साहस नहीं जुटा पा रहा।

डीएम के आदेश कागजों तक सीमित

जिलाधिकारी जसजीत कौर ने हाल ही में अपने अधीनस्थों को सख्त आदेश दिए थे—

  • गैर पंजीकृत और कृषि ट्रैक्टरों को खनन-परिवहन कार्यों से दूर रखा जाए।
  • मशीनों का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
    लेकिन जमीनी स्तर पर उनके आदेश कागजों तक सीमित हैं। अधीनस्थ अधिकारी पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
  • एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में औसतन 6 से 8 घन मीटर मिट्टी ढोई जाती है।
  • यदि रोजाना 15–20 ट्रैक्टर चलते हैं तो यह आंकड़ा 60–100 ट्रिप प्रतिदिन का हो जाता है।

पर्यावरणीय असर

  • अवैध खनन से उपजाऊ मिट्टी की परत नष्ट हो रही है।
  • इससे खेती की उत्पादन क्षमता घट रही है
  • अनियंत्रित खनन से भूमि क्षरण और भू-जल स्तर पर सीधा असर पड़ रहा है।
  • गांवों की कच्ची सड़कें टूट रही हैं, धूल प्रदूषण बढ़ रहा है और ग्रामीणों को सांस संबंधी बीमारियां होने लगी हैं।

करनपुर गावड़ी का मामला साफ करता है कि बिजनौर में अवैध खनन अब एक संगठित अपराध उद्योग बन चुका है। विभागीय मिलीभगत, माफिया का दबदबा और पुलिस-प्रशासन की मजबूरी ने इस अवैध कारोबार को फलने-फूलने दिया है। सवाल यह है कि जब सीसीटीवी में कैद ट्रैक्टर भी कार्रवाई से बच जाएं और डीएम के आदेश भी बेअसर हो जाएं, तो फिर जनता उम्मीद किससे करे?

 

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