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पोषण, पारंपरिक ज्ञान और सतत कृषि को बढ़ावा देने में शिक्षा जगत की अहम भूमिका

श्री अन्न पुनरोद्धार पर शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण

पोषण, पारंपरिक ज्ञान और सतत कृषि को बढ़ावा देने में शिक्षा जगत की अहम भूमिका

प्रमुख बिंदु :

  • खंड रिसोर्स सेंटर, ताहिरपुर भभीसा (कांधला) में आयोजित प्रशिक्षण

  • शिक्षकों को मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कुटकी) के पोषण मूल्य और महत्व की जानकारी दी गई

  • अजय तोमर ने प्राकृतिक तरीकों से फसल सुरक्षा जैसे ट्राईकोड्रमा, बिवेरिया, लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप का प्रशिक्षण दिया

  • जयदेव उपाध्याय ने नि:शुल्क सरसो मिनी किट बुकिंग और कृषि बीज भंडार से मिलने वाले निवेशों की जानकारी दी

  • खंड शिक्षा अधिकारी सविता डाबराल ने शिक्षकों को श्री अन्न को विद्यालयी पाठ्यक्रम, मिड-डे मील और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ने का संकल्प दिलाया

विश्लेषण :

यह प्रशिक्षण केवल खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत कृषि का समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। मोटे अनाज (श्री अन्न) न केवल पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत हैं बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में कम पानी और कम लागत में टिकाऊ खेती का बेहतर विकल्प भी हैं।

शिक्षकों को इस आंदोलन से जोड़ना इसलिए आवश्यक है क्योंकि वे छात्रों और समुदाय में जागरूकता फैलाने की सबसे प्रभावी कड़ी हैं। यदि विद्यालय स्तर पर मिड-डे मील में मोटे अनाज का उपयोग और पाठ्यक्रम में पोषण संबंधी शिक्षा को शामिल किया जाए, तो आने वाली पीढ़ी में स्वास्थ्य और कृषि दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव संभव होगा।

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