सीएम योगी का मानवता से भरा फैसला
जनता दर्शन में बूढ़ी मां के दर्द से द्रवित हुए मुख्यमंत्री, कैंसर पीड़ित बेटे को भेजा सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल
लखनऊ, 29 सितंबर।
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों की समस्याओं से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ का भाव जगाया। सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित जनता दर्शन में जब कानपुर की एक बुजुर्ग महिला अपने कैंसर पीड़ित बेटे की व्यथा सुनाने पहुंची तो मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता हर किसी के लिए मिसाल बन गई। सीएम ने तत्काल निर्देश देकर मरीज को सरकारी एंबुलेंस से कल्याण सिंह सुपर स्पेशियालिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाया और बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया।
घटना का मानवीय पहलू
- रायपुरवा, कानपुर की करीब 64 वर्षीय महिला मुख्यमंत्री से रूबरू हुईं।
- पीड़ित मां ने कहा – “महाराज, हमारे जवान बेटे को कैंसर है, इलाज कराने की सामर्थ्य नहीं है। आयुष्मान कार्ड भी नहीं है। आप उसे जिंदगी दे दीजिए।”
- सीएम योगी ने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिया कि मरीज को सीधे कैंसर सुपर स्पेशियालिटी इंस्टीट्यूट पहुंचाया जाए।
- ‘जनता दर्शन’ स्थल से ही सरकारी एंबुलेंस द्वारा मरीज को लखनऊ के अस्पताल भेजा गया।
- अस्पताल में तुरंत जांच शुरू हुई और उपचार की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।
जनता दर्शन में सीएम का मानवीय चेहरा
- मुख्यमंत्री ने सोमवार सुबह जनता दर्शन में 50 से अधिक फरियादियों की समस्याएं सुनीं।
- हर पीड़ित से सीधे संवाद कर अफसरों को मौके पर समाधान का आदेश दिया।
- बच्चों के साथ विशेष अपनापन दिखाया – चॉकलेट व टॉफियां बांटकर दुलारा।
मुख्यमंत्री का संदेश
- “नर सेवा ही नारायण सेवा है। हमारी सरकार हर पीड़ित के साथ खड़ी है। जो भी अपनी समस्या लेकर आता है, उसे हर संभव मदद दी जाएगी।”
- उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य हर परिवार के चेहरे पर खुशी लाना और पीड़ितों को संबल प्रदान करना है।
- इलाज के लिए किसी भी स्तर पर सहयोग की आवश्यकता हो, सरकार पीछे नहीं हटेगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
- शारदीय नवरात्रि जैसे आध्यात्मिक पर्व पर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ने प्रदेशवासियों में विश्वास जगाया।
- गरीब महिला के आंसुओं को मुस्कान में बदलने का यह क्षण सरकार की “मानवीय प्रशासनिक शैली” का उदाहरण है।
- ‘जनता दर्शन’ को केवल औपचारिकता न मानकर मुख्यमंत्री द्वारा हर व्यक्ति से व्यक्तिगत संवाद करने की परंपरा ने इस व्यवस्था को जन-सरकार के बीच सेतु बना दिया है।
✅ निष्कर्ष:
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जनता दर्शन एक बार फिर साबित करता है कि जब शासन-प्रशासन में मानवीय संवेदनाएं जुड़ जाती हैं, तब सरकार केवल कागजों पर नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बस जाती है।











