स्नेहरोड़ चीनी मिल विस्तार परियोजना पर विराम

गन्ना उपलब्धता और आर्थिक व्यवहार्यता पर उठे सवालों के चलते यूपी सरकार ने किया प्रस्ताव निरस्त
हाइलाइट्स
-
किसान मनोज शर्मा ने मिल की क्षमता 3000 TCD से बढ़ाकर 5000 TCD करने की मांग की थी
-
मिल में वर्तमान में 40 KLPD एथनॉल उत्पादन क्षमता वाली आसवनी पहले से स्थापित है
-
प्रस्ताव में 60 KLPD नई आसवनी और 100 TPD क्षमता का बायो-CNG प्लांट शामिल था
-
21 मार्च 2023 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में PIB बैठक में पुनर्विचार का सुझाव दिया गया
-
आसपास 9 निजी मिलों की कुल क्षमता 77,000 TCD — गन्ना उपलब्धता पर संकट
-
लाभप्रदता संदिग्ध मानकर मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए परियोजना प्रस्ताव का अवसान
समाचार विस्तार से
लखनऊ, 22 सितंबर 2025।
उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड (शुगरफेड) ने स्नेहरोड़ चीनी मिल के विस्तार परियोजना पर बड़ा निर्णय लिया है। किसान सहकारी चीनी मिल स्नेहरोड़ की पेराई क्षमता को 3000 टीसीडी से बढ़ाकर 5000 टीसीडी करने के प्रस्ताव को सरकार ने गन्ने की उपलब्धता और परियोजना की लाभप्रदता पर सवालों के चलते खारिज कर दिया है।
यह मांग किसान श्री मनोज शर्मा ने जनसुनवाई पोर्टल पर की थी, जिसका संज्ञान लेते हुए विभाग ने विस्तार परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव शासन के माध्यम से PIB (Public Investment Board) को भेजा था।
क्या था विस्तार प्रस्ताव?
- चीनी मिल की पेराई क्षमता 5000 TCD करना
- 60 किलोलीटर प्रतिदिन (KLPD) की अतिरिक्त एथनॉल आसवनी की स्थापना
- 100 TPD क्षमता का बायो-CNG प्लांट लगाना
- शीरे के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करना
गन्ना उपलब्धता पर संकट
- एक 5000 TCD मिल को एक पेराई सत्र में लगभग 90 लाख क्विंटल गन्ने की आवश्यकता होती है।
- स्नेहरोड़ के आसपास पहले से ही 9 निजी चीनी मिलें सक्रिय हैं, जिनकी कुल पेराई क्षमता 77,000 TCD है।
- ऐसे परिदृश्य में पर्याप्त गन्ना उपलब्ध होने में संशय जताया गया है।
आर्थिक लाभप्रदता पर असर
गन्ने की संभावित कमी से परियोजना की व्यवहार्यता और लाभप्रदता प्रभावित होने की आशंका जताई गई। इस कारण मुख्यमंत्री को प्रस्ताव की स्थिति से अवगत कराते हुए विस्तार योजना को अवसान (ड्रॉप) कर दिया गया है।
विश्लेषण
यह फैसला बताता है कि चीनी उद्योग में केवल तकनीकी विस्तार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कच्चे माल (गन्ना) की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है।
यूपी में पहले से ही बड़ी संख्या में निजी मिलें कार्यरत हैं, जिनकी प्रतिस्पर्धा सहकारी मिलों के लिए गन्ना आपूर्ति को कठिन बना देती है।
स्नेहरोड़ चीनी मिल के विस्तार प्रस्ताव का निरस्त होना किसानों के लिए निराशाजनक है, लेकिन सरकार का तर्क है कि गन्ना आपूर्ति की वास्तविक स्थिति और परियोजना की लाभप्रदता को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था।
👉 सवाल यह है कि आने वाले वर्षों में यूपी सरकार गन्ना उत्पादन बढ़ाने और सहकारी चीनी मिलों को प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाएगी।











