शिक्षकों का शोषण बर्दाश्त नहीं : भूपेंद्र चौहान
प्राथमिक शिक्षक संघ ने सरकार को दी चेतावनी – 16 सितंबर को होगा शक्ति प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को भेजेंगे मांगपत्र
बिजनौर से बड़ी खबर
बिजनौर। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक अब चुप रहने को तैयार नहीं। अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे शिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया है। सोमवार को काशीराम कॉलोनी के प्रांगण में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की संयुक्त बैठक में उग्र तेवर देखने को मिले।
बैठक में संगठन ने साफ शब्दों में कहा –
👉 “अब
शिक्षकों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
- लंबित प्रमोशन की बहाली – वर्षों से रुके प्रमोशन तत्काल लागू हों।
- प्रधानाध्यापक के खाली पद भरें जाएं – शिक्षा व्यवस्था ठप है।
- नए-नए आदेशों का बोझ खत्म हो – शिक्षक गुमराह हो रहे हैं।
- सेवारत शिक्षकों पर आए विवादित आदेश रद्द हों।
नेताओं के तेवर
- भूपेंद्र चौहान (जिला अध्यक्ष) :
“शिक्षकों का उत्पीड़न किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर आदेश वापस नहीं हुए तो आंदोलन और तेज होगा।” - राजेंद्र कुमार (जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष) :
“शिक्षकों की समस्याओं पर सरकार गंभीर नहीं है। प्रमोशन अटके पड़े हैं, पद रिक्त हैं, और आदेशों से हालात और बिगड़ रहे हैं।” - कामेंद्र सिंह टिकैत (जिला उपाध्यक्ष) :
“हम अपने शिक्षकों का शोषण हरगिज नहीं होने देंगे। समय आ गया है कि एकजुट होकर सरकार को झकझोरें।”
16 सितंबर को होगा बड़ा प्रदर्शन
संघ ने तय किया है कि 16 सितंबर को जिलेभर के शिक्षक जिला मुख्यालय पर इकट्ठा होंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित मांगपत्र जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। यह दिन शिक्षकों के आंदोलन की दिशा और दशा तय करेगा।
बैठक में गूंजा संघर्ष का स्वर
बैठक में जिला मंत्री प्रशांत सिंह, संयुक्त मंत्री यशवीर सिंह चौहान, कोषाध्यक्ष असीम चौहान, ब्लॉक अध्यक्ष अरविंद चौधरी, मोहम्मद जावेद, नितिन चौहान, श्रीमती तरनजीत कौर मलिक सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।
बैठक का संचालन जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने किया।
पृष्ठभूमि और असर
शिक्षकों की समस्याएँ कोई नई नहीं—
- प्रमोशन की राह वर्षों से बंद।
- स्कूलों में प्रधानाध्यापकों की भारी कमी।
- लगातार नए आदेशों से शिक्षक परेशान।
👉 यही कारण है कि अब शिक्षक सड़क से सदन तक संघर्ष की राह पर उतरने को तैयार हैं।
16 सितंबर का दिन केवल बिजनौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के शिक्षकों के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है। यह सिर्फ एक मांगपत्र नहीं, बल्कि शिक्षकों के धैर्य का अंतिम इम्तिहान है।
अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में प्रदेशव्यापी लहर का रूप भी ले सकता है।
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