शेखपुरी में गूंजा दूध का प्याला, बच्चों के चेहरों पर छलकी मुस्कान
बॉर्नविटा युक्त दूध योजना से शिक्षा और पोषण को मिला नया सहारा
बिजनौर | ग्रामीण विकास की नई तस्वीर
गांव का छोटा-सा स्कूल… प्रार्थना सभा खत्म हुई तो बच्चे कतार में खड़े हुए। हाथ में स्टील का गिलास, आंखों में उत्सुकता और चेहरे पर चमक। जैसे ही शिक्षक ने गिलास में बॉर्नविटा मिला दूध डाला, बच्चों के चेहरों पर मुस्कान खिल उठी। यह नजारा सोमवार को जलीलपुर ब्लॉक के शेखपुरी चौहड़़ प्राथमिक विद्यालय का था, जहां श्री सत्य साईं अन्नपूर्णा ट्रस्ट, बेंगलुरु ने ‘प्रतिदिन दूध योजना’ की शुरुआत की।
क्यों है यह योजना खास
- बच्चों को प्रत्येक सुबह पोषण का संबल मिलेगा
- अब तक जिले में तीन विद्यालयों में चल रही योजना का दायरा बढ़ा
- शेखपुरी के जुड़ने से लाभार्थियों की संख्या 500 हुई
- शिक्षा के साथ बच्चों के स्वास्थ्य और ऊर्जा का सीधा रिश्ता
शुभारंभ का पल
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी योगेंद्र कुमार ने दूध और बॉर्नविटा के पैकेट सौंपकर योजना को विद्यालय को समर्पित किया। इसके बाद प्रबंध समिति अध्यक्ष हरस्वरूप सिंह और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सतवीर सिंह ने बच्चों को दूध पिलाकर कार्यक्रम का आगाज़ किया। मौके पर विद्यालय स्टाफ और अभिभावक भी गवाह बने।
आवाज़ें मैदान से
👉 प्रधानाध्यापक संदीप कुमार (शेखपुरी)
“मैं लंबे समय से इस योजना को यहां लाने का प्रयास कर रहा था। अब बच्चों को सुबह की ताजगी और पोषण मिलेगा। उनकी पढ़ाई में निश्चित ही सुधार होगा।”
👉 आशीष भारद्वाज (ट्रस्टी, अन्नपूर्णा ट्रस्ट)
“हम देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय जरूरतों के हिसाब से मॉर्निंग न्यूट्रिशन मुहैया कराते हैं। करीब एक करोड़ बच्चे इससे लाभान्वित हो रहे हैं।”
👉 गुलशन गुप्ता (प्रधानाध्यापक, हकीकतपुर प्रयाग)
“बच्चों को प्रार्थना सभा के बाद दूध पिलाया जाता है। वे मध्यान्ह भोजन तक ऊर्जा से भरपूर रहते हैं और कक्षा में ज्यादा सक्रिय दिखते हैं।”
गांव और बच्चों के लिए बड़ा बदलाव
शेखपुरी जैसे गांवों में जहां बच्चे अकसर नाश्ते के बिना ही स्कूल पहुंचते हैं, वहां यह पहल छोटा कदम लेकिन बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
- सुबह का पौष्टिक दूध बच्चों को शारीरिक ऊर्जा देगा
- ध्यान और एकाग्रता में वृद्धि से पढ़ाई में सुधार होगा
- ग्रामीण क्षेत्र में पोषण और शिक्षा की खाई पाटने में मदद मिलेगी
आंकड़ों में योजना
- 4 साल से संचालित: हकीकतपुर प्रयाग, नारायणवाला, पाडली
- 350 बच्चों तक लाभ: पहले से चल रही योजना
- 500 बच्चे: शेखपुरी के जुड़ने के बाद
- 1 करोड़ बच्चे: देशभर में लाभान्वित
TargetTV Live का विश्लेषण
ग्रामीण भारत में शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ किताबें और क्लासरूम नहीं है, बल्कि बच्चों का स्वास्थ्य और पोषण भी है। जब बच्चे पेट खाली रखते हैं तो उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता।
शेखपुरी का यह उदाहरण बताता है कि पोषण और शिक्षा जब साथ चलते हैं तो बच्चे सिर्फ पढ़ते ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ते भी हैं।
👉 यह कहानी सिर्फ दूध की नहीं है, यह कहानी है सपनों को ऊर्जा देने की।












