CMO दफ्तर में एंटीकरप्शन का छापा: स्टेनो रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार
प्रतापगढ़ | रिपोर्ट: अद्वैत दशरथ तिवारी
प्रतापगढ़ का सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) कार्यालय सोमवार को अचानक सुर्खियों में आ गया, जब प्रयागराज से आई एंटीकरप्शन टीम ने वहां छापा मारते हुए सीएमओ के स्टेनो और उसके सहयोगी चपरासी को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई ने न सिर्फ दफ्तर में अफरा-तफरी मचा दी बल्कि विभाग के कामकाज की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूरा घटनाक्रम
- शिकायत मिली थी: स्टेनो राहुल और उसके सहयोगी आलोक चपरासी पर आरोप था कि वे फाइलों के निस्तारण और जरूरी काम करवाने के नाम पर घूस की मांग कर रहे थे।
- जाल बिछाया गया: शिकायत की पुष्टि के बाद प्रयागराज एंटीकरप्शन टीम ने सीएमओ दफ्तर में ही ट्रैप प्लान किया।
- गिरफ्तारी: जैसे ही दोनों ने रिश्वत की रकम ली, टीम ने उन्हें रंगेहाथ धर दबोचा।
- माहौल गरमा गया: अचानक हुई इस कार्रवाई से दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों और आने-जाने वालों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
- कार्रवाई के बाद: पूछताछ पूरी होने के बाद टीम दोनों आरोपियों को प्रयागराज लेकर रवाना हो गई।
सीएमओ दफ्तर में हड़कंप
एंटीकरप्शन टीम की इस कार्रवाई ने कर्मचारियों में खलबली मचा दी है।
- कई कर्मचारी सकते में आ गए कि कहीं उन पर भी शिकंजा न कस जाए।
- अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
- यह मामला सिर्फ स्टेनो और चपरासी तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है, यह अब जांच का विषय है।
विश्लेषण: भ्रष्टाचार की परतें
स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं। नियुक्तियों से लेकर दवाइयों की खरीद, मेडिकल सप्लाई और प्रशासनिक कामकाज तक—हर स्तर पर घूसखोरी और धांधली की शिकायतें आती रही हैं।
- सिस्टम की बीमारी: यह गिरफ्तारी दिखाती है कि निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक रिश्वतखोरी ने जड़ें जमा रखी हैं।
- एंटीकरप्शन की सख्ती: पिछले कुछ महीनों से एंटीकरप्शन विंग की कार्रवाई तेज हुई है। इससे साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रही है।
- जनता पर असर: ऐसे मामलों का सबसे ज्यादा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है, जिन्हें स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और सुविधा के बजाय रिश्वत की बाधा झेलनी पड़ती है।
👉 मुख्य बिंदु एक नज़र में
- सीएमओ दफ्तर में एंटीकरप्शन की बड़ी कार्रवाई।
- स्टेनो राहुल और चपरासी आलोक घूस लेते गिरफ्तार।
- प्रयागराज टीम ने जाल बिछाकर किया ट्रैप।
- कार्यालय में कर्मचारियों और अफसरों में दहशत।
- स्वास्थ्य विभाग की साख पर फिर सवाल।
बड़ा सवाल: क्या इतना काफी है?
भ्रष्टाचार की जड़ें सिर्फ निचले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहतीं। सवाल यह है कि —
- क्या स्टेनो और चपरासी अकेले इस खेल में शामिल थे?
- या इसके पीछे बड़े अफसरों और अधिकारियों की मिलीभगत भी है?
- क्या जांच का दायरा ऊपर तक बढ़ेगा या मामला सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित रह जाएगा?
प्रतापगढ़ सीएमओ दफ्तर में हुई यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश जरूर देती है, लेकिन यह भी साफ करती है कि सिस्टम की सफाई अभी अधूरी है। जनता अब यह देखना चाहती है कि क्या सरकार और एंटीकरप्शन विभाग इस तरह के मामलों में ‘ऊपर तक’ हाथ डालने की हिम्मत दिखा पाते हैं या नहीं।
👉 आगे पढ़ें: स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का नेटवर्क कितना गहरा है?










