अफजलगढ़ ब्लॉक में मनरेगा भुगतान घोटाले का आरोप
शासनादेश की धज्जियां,करोड़ों रुपये का नियम विरुद्ध भुगतान, जांच की मांग तेज
मुख्य हाइलाइट्स (Infographic Style)
✅ अफजलगढ़ ब्लॉक में 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की देनदारियों का भुगतान
✅ शासन का आदेश: सिर्फ 2022-23 और पूर्व बकाया चुकाने की अनुमति
✅ 26 अगस्त 2025: ग्राम विकास आयुक्त ने लिखित चेतावनी दी थी
✅ आदेश की अनदेखी कर किया गया करोड़ों का भुगतान
✅ सोशल मीडिया पर शिकायत, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांगटाइमलाइन,घटनाक्रम कैसे unfolded हुआ ?
- 26 अगस्त 2025 👉 ग्राम विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश का आदेश जारी।
- जिलाधिकारियों को लिखा गया पत्र, आदेश – “सिर्फ 2022-23 और पूर्व देनदारियां चुकाएं।”
- 01 सितंबर 2025 👉 सभी जिलों को नई धनराशि प्राप्त।
- सितंबर 2025 (शुरुआत में) 👉 अफजलगढ़ ब्लॉक में शासनादेश की अवहेलना कर नए वित्तीय वर्षों का भुगतान।
- 02 सितंबर 2025 के बाद 👉 सोशल मीडिया पर मामला उछला, टैग किए गए @UPGovt, @CMOfficeUP, @PMOIndia, @SBM_UP, @dmbijnor।
विस्तार से मामला
मनरेगा जैसी योजना गरीबों और ग्रामीण मजदूरों को रोजगार व आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बनी है।
लेकिन अफजलगढ़ ब्लॉक, बिजनौर में इसकी पारदर्शिता पर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है।
👉 शासन ने साफ कहा था कि नई धनराशि का उपयोग केवल 2022-23 और उससे पहले की लंबित सामग्री देनदारियों में होना चाहिए।
👉 इसके बावजूद 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की करोड़ों रुपये की देनदारियां निपटा दी गईं।
बड़ा सवाल
- क्या ब्लॉक स्तर पर यह सुनियोजित भ्रष्टाचार था?
- किन ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को इस भुगतान का फायदा पहुंचा?
- आदेश का उल्लंघन करने वालों पर प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?
स्थानीय प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं –
🔹 “गरीब मजदूरों का हक मारा गया है।”
🔹 “शासन की अवहेलना करने वाले अफसरों पर कार्रवाई हो।”
🔹 “मनरेगा जैसी योजना में गड़बड़ी पूरे सिस्टम की साख पर सवाल है।”
विश्लेषणात्मक नज़र
- नियम विरुद्ध भुगतान सीधे तौर पर वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है।
- यह मामला बताता है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी कमजोर है।
- मनरेगा जैसी योजना में यदि इस तरह की अनियमितताएं होती रहीं तो इसका असर –
👉 मजदूरों को समय पर भुगतान न मिलने,
👉 असली लाभार्थियों का हक छीने जाने,
👉 और योजना की विश्वसनीयता खत्म होने पर पड़ेगा।
अफजलगढ़ ब्लॉक का मामला केवल एक ब्लॉक तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की भुगतान व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
अब सबसे अहम बात –
👉 क्या शासन इस पर उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को सजा देगा?
👉 या मामला धीरे-धीरे फाइलों में दबा दिया जाएगा?












