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गंभीर बीमार बंदियों की समयपूर्व रिहाई पर बड़ा फैसला, सीएम योगी ने दिए स्पष्ट निर्देश

गंभीर बीमार बंदियों की समयपूर्व रिहाई पर बड़ा फैसला, सीएम योगी ने दिए स्पष्ट निर्देश
फाइल फोटो सीएम योगी आदित्यनाथ
“नीति पारदर्शी हो, संवेदनशील हो और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप हो” – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्य बिंदु एक नज़र में

  • गंभीर बीमार, वृद्ध और असहाय बंदियों की समयपूर्व रिहाई पर जोर

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी नीति बनेगी

  • हत्या, आतंकवाद, देशद्रोह और जघन्य अपराधों में रिहाई नहीं होगी

  • हर साल जनवरी, मई और सितम्बर में स्वतः समीक्षा की व्यवस्था

  • महिला और बुजुर्ग बंदियों को प्राथमिकता

  • NALSA प्रणाली अपनाने पर विचार

 मुख्यमंत्री का रुख: “संवेदनशील और मानवीय नीति”

लखनऊ में कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीमार और वृद्ध कैदियों की समयपूर्व रिहाई पर बड़ा फैसला लिया। उन्होंने कहा कि नियम सरल और स्पष्ट होने चाहिए, ताकि पात्र बंदियों को राहत स्वतः मिले और उन्हें अलग से आवेदन न करना पड़े।

 किन बंदियों को मिलेगी प्राथमिकता?

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रदेश की जेलों में सर्वे कर यह पता लगाया जाए कि –

  • कौन-कौन प्राणघातक रोग से पीड़ित हैं।
  • कौन वृद्धावस्था या अशक्तता के कारण अपराध करने में असमर्थ हैं।
  • किनकी मृत्यु निकट भविष्य में होने की आशंका है।

👉 इनमें महिलाओं और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी।

किन्हें रिहाई का लाभ नहीं मिलेगा?

सीएम योगी ने साफ कहा कि समाज की सुरक्षा सर्वोपरि है।
इसलिए, हत्या, आतंकवाद, देशद्रोह, महिला और बच्चों के विरुद्ध जघन्य अपराधों में दोषी ठहराए गए बंदियों को रिहाई का लाभ नहीं मिलेगा।

हर साल तीन बार स्वतः समीक्षा

  • जनवरी
  • मई
  • सितम्बर

👉 इन महीनों में पात्र बंदियों की स्वतः समीक्षा होगी।
👉 यदि रिहाई न मिले तो कारण स्पष्ट लिखित रूप में दर्ज होंगे और बंदी को यह अधिकार होगा कि वह निर्णय को चुनौती दे सके।

NALSA प्रणाली से होगा सुधार

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की सुझाई प्रणाली को अपनाकर बंदियों को न्यायिक अधिकारों का लाभ दिया जा सकता है।

 सुधार और पुनर्वास पर भी जोर

सीएम योगी ने सुझाव दिया कि जेलों में बंदियों को –

  • कृषि कार्य
  • गोसेवा
  • अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए ताकि उनकी सजा अवधि सार्थक बन सके।

निष्कर्ष

योगी सरकार का यह कदम न सिर्फ संवेदनशील नीति की ओर इशारा करता है बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि समाज की सुरक्षा और मानवीय दृष्टिकोण के बीच संतुलन बनाकर ही कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

👉 क्या आपको लगता है कि गंभीर बीमार और वृद्ध कैदियों की रिहाई से जेल सुधारों में नई दिशा मिलेगी?

 

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