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भारत में नागरिक ड्रोन क्रांति: आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी बढ़ते से कदम

भारत में नागरिक ड्रोन क्रांति: आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी बढ़ते से कदम

 नई नीतियाँ और आसान नियम: ड्रोन इंडस्ट्री के लिए बदलता परिदृश्य

भारत में ड्रोन सेक्टर एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। 2021 की Drone Rules और Digital Sky प्लेटफॉर्म ने पंजीकरण और उड़ान अनुमतियों की प्रक्रिया आसान कर दी। इससे स्टार्टअप्स और उद्योग जगत को नई ऊर्जा मिली है।

  • पहले जहाँ लाइसेंसिंग एक जटिल और धीमी प्रक्रिया थी, वहीं अब अधिकतर मंज़ूरियाँ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से संभव हैं।
  • सरकार ने ड्रोन और ड्रोन-पार्ट्स के लिए PLI (Production Linked Incentive) स्कीम शुरू की है, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला।
 निवेश और बाज़ार का विस्तार: स्टार्टअप्स की उड़ान

निवेशकों की नज़र अब भारत के ड्रोन बाजार पर टिकी है।

  • हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय ड्रोन इंडस्ट्री 2024–2029 के बीच दोगुनी से अधिक वृद्धि दर्ज कर सकती है।
  • ideaForge, Garuda Aerospace, Skylark, Aereo जैसी कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और घरेलू अनुबंध दोनों हासिल कर रही हैं।
  • कुछ भारतीय कंपनियाँ निर्यात की ओर बढ़ रही हैं, हालांकि उच्च तकनीकी सेंसर और चिप्स पर अभी विदेशी निर्भरता बनी हुई है।
 नागरिक उपयोग-केस: खेत से लेकर आपदा प्रबंधन तक

ड्रोन का प्रयोग अब सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं है।

  • कृषि क्षेत्र में फसल सर्वेक्षण, कीटनाशक स्प्रे और उपज का अनुमान लगाने में ड्रोन लोकप्रिय हो रहे हैं।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग सर्वे में हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन लगातार प्रयोग किए जा रहे हैं।
  • आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में ड्रोन की मदद से रेस्क्यू और डिलीवरी अधिक तेज़ और सुरक्षित हो रही है।
  • हाल ही में BVLOS (Beyond Visual Line of Sight) ट्रायल और क्लाउड-सीडिंग जैसी हाई-एंड तकनीकी उड़ानों की अनुमति दी गई है।
 चुनौतियाँ: आत्मनिर्भरता का रास्ता आसान नहीं

तेज़ी से बढ़ती इस इंडस्ट्री के सामने कई अड़चनें भी हैं।

  • कम्पोनेन्ट निर्भरता: ऑटो-पायलट, सेंसर और चिप्स जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों के लिए विदेशी बाज़ारों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
  • सर्टिफिकेशन और मानकीकरण: DGCA की टाइप सर्टिफिकेशन प्रक्रिया लंबी और महंगी है, जिससे छोटे स्टार्टअप्स को कठिनाई होती है।
  • फंडिंग और R&D: लंबे समय के अनुसंधान और विकास के लिए सस्ती वित्तीय मदद की कमी बनी हुई है।
  • प्राइवेसी और सुरक्षा मुद्दे: नागरिक क्षेत्रों में ड्रोन उड़ानों को लेकर निजता और एयरस्पेस सुरक्षा पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
आगे का रास्ता: 12–36 महीने का परिदृश्य
  • यदि सरकार द्वारा प्रस्तावित नया ₹1,800–2,000 करोड़ का इंसेंटिव पैकेज लागू होता है तो आने वाले वर्षों में भारतीय ड्रोन बाजार वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।
  • कृषि, लॉजिस्टिक्स और पब्लिक सेफ़्टी सेक्टर सबसे बड़े ग्रोथ ड्राइवर बन सकते हैं।
  • लोकलाइज़ेशन और कम्पोनेन्ट मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता हासिल करना सबसे बड़ा गेम-चेंजर होगा।
निष्कर्ष: ड्रोन भारत के ‘आसमान’ में नया भविष्य लिख रहे हैं

भारत में नागरिक ड्रोन तकनीक आज एक मोड़ पर खड़ी है।
सरकार की नीतिगत मदद, तेज़ी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और बढ़ती निवेश रुचि यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में ड्रोन न सिर्फ़ खेती-बाड़ी और उद्योग का चेहरा बदलेंगे, बल्कि भारत को वैश्विक ड्रोन बाज़ार में अग्रणी स्थान दिला सकते हैं।

 

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