बिजनौर गंगा बैराज पुल पर राहत अधूरी: छोटे वाहन चले, बस-ट्रक अटके
हाईलाइट्स
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22 दिन बाद खुला पुल, केवल कार, ऑटो व दोपहिया वाहनों के लिए
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रोडवेज बसें और ट्रक अब भी डायवर्ट, लंबा रास्ता तय कर रहे यात्री
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यात्रियों की जेब पर बोझ, किराया और समय दोनों बढ़े
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रोडवेज विभाग को नुकसान, आमदनी में गिरावट
बिजनौर से दिल्ली-मेरठ जाने वालों की मुश्किलें
बिजनौर के मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे पर स्थित गंगा बैराज पुल उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब से जोड़ने वाली अहम कड़ी है। पुल की खराबी के चलते इसे 7 अगस्त से बंद किया गया था। मरम्मत कार्य के बाद शुक्रवार को 22 दिन बाद छोटे और हल्के वाहनों को आवाजाही की अनुमति दी गई है।
लेकिन, रोडवेज बसों और ट्रकों को अब भी रोक दिया गया है। यानी रोज़ाना हजारों यात्रियों को अभी भी लंबा और महंगा सफर झेलना पड़ रहा है।
बसों का लंबा चक्कर, जेब पर बोझ
- दिल्ली जाने वाली बसें अब चांदपुर–धनौरा मंडी–गजरौला–हापुड़ होकर चल रही हैं।
- मेरठ जाने वाली बसें गजरौला–गढ़ मार्ग से संचालित की जा रही हैं।
- दूरी बढ़ने से यात्रियों को अधिक किराया देना पड़ रहा है।
- लंबा रास्ता तय करने से समय भी दोगुना लग रहा है।
यात्रियों और विभाग दोनों पर असर
एआरएम अशोक कुमार के अनुसार,
- रोडवेज की आमदनी पर सीधा असर पड़ा है।
- यात्रियों को समय व पैसे दोनों की हानि उठानी पड़ रही है।
- जब तक भारी वाहन चालू नहीं होते, तब तक ये स्थिति बनी रहेगी।
राहत क्यों?
- पुल खोलने के बावजूद भारी वाहनों पर रोक से स्थानीय व्यापार व परिवहन प्रभावित।
- बिजनौर से दिल्ली-मेरठ का सफर करने वाले मजदूर, छात्र और व्यापारी वर्ग सबसे ज्यादा परेशान।
- बार-बार होने वाली मरम्मत और बंदी से पुल की तकनीकी मजबूती पर सवाल।
- रोडवेज व ट्रक ऑपरेटरों को नुकसान होने से आर्थिक गतिविधियां धीमी।
निचोड़
गंगा बैराज पुल का आंशिक रूप से खुलना यात्रियों के लिए आधी राहत और आधी परेशानी लेकर आया है। जब तक रोडवेज बसें और ट्रक इस पुल से नहीं गुजरेंगे, तब तक बिजनौर से दिल्ली-मेरठ जाने वालों की मुश्किलें बनी रहेंगी।











