इंदिरापुरम में बच्चों की कलाकृतियों से सजेगा गणेश उत्सव, मिट्टी के गणपति बने आकर्षण
संस्कृति, सृजनशीलता और पर्यावरण-संरक्षण का संदेश लेकर शुरू हुआ उत्सव से पहले का कार्यक्रम
इंदिरापुरम | 26 अगस्त 2025
गणेश उत्सव की तैयारी इस बार सिर्फ श्रद्धा और भक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों की रचनात्मकता और पर्यावरण के प्रति सजगता भी केंद्र में रही। सनराइज ग्रीन, इंदिरापुरम में कल शाम आयोजित विशेष कार्यशाला ने बच्चों को न केवल परंपरा से जोड़ा बल्कि उन्हें मिट्टी से गणपति बनाने का अवसर भी दिया।
कार्यशाला की मुख्य झलकियां
- 100 से अधिक बच्चों की भागीदारी – उत्साह और उमंग से भरे बच्चों ने खुद के हाथों से मिट्टी के गणेश बनाए।
- पर्यावरण संदेश – आयोजन समिति ने प्लास्टर ऑफ पेरिस की बजाय मिट्टी की प्रतिमा अपनाने के महत्व को समझाया।
- श्रद्धा और सृजन का संगम – बच्चों की बनाई प्रतिमाओं में उनकी कल्पनाशक्ति और भक्ति दोनों झलकीं।
- संस्कृति से जुड़ाव – परंपरागत विधियों के साथ-साथ आधुनिक संदर्भ में पर्यावरण-संरक्षण की सीख दी गई।
इस बार का गणेश उत्सव क्यों होगा खास?
- हाथ से बनी प्रतिमाओं को बढ़ावा – समिति का फोकस इस साल पर्यावरण-मित्र गणपति पर।
- भव्य कार्यक्रमों की श्रृंखला –
- गणेश स्थापना
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- भजन संध्या
- फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता
- 8 पहर का भोग
- सामुदायिक सहभागिता – समिति ने क्षेत्रवासियों से बड़ी संख्या में जुड़ने का आह्वान किया।
संदेश
गणेश उत्सव समिति का मानना है कि –
“मिट्टी की प्रतिमा से न केवल परंपरा जीवित रहती है, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। यही असली श्रद्धा और सेवा है।”
इस उत्सव की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि भविष्य की पीढ़ी को परंपरा और प्रकृति दोनों से जोड़ा जा रहा है। बच्चों के हाथों से गढ़ी गई मिट्टी की प्रतिमाएं न सिर्फ गणेश उत्सव की शोभा बढ़ाएंगी, बल्कि समाज को एक गहरा संदेश भी देंगी।













