ई-खसरा पड़ताल पर विवाद: कृषि प्राविधिक सहायकों ने जताया विरोध
मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन, कहा – “यह राजस्व विभाग का कार्य है, कृषि विभाग का नहीं”

शामली, संवाददाता | अधीनस्थ कृषि सेवा संघ, उत्तर प्रदेश की जनपद शाखा शामली ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पर एक अहम कदम उठाया। प्रांतीय आह्वान पर संगठन के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी शामली को सौंपा और साफ कहा कि ई-खसरा पड़ताल कार्य कृषि विभाग पर थोपना अन्याय है।
संघ की मुख्य दलीलें
🔹 ई-खसरा पड़ताल राजस्व और आपदा विभाग का मूल कार्य है।
🔹 कृषि प्राविधिक सहायकों का मुख्य कार्य है –
- मृदा परीक्षण
- किसान प्रशिक्षण
- जैविक/प्राकृतिक खेती
- सतत कृषि प्रणाली
- क्षेत्रीय प्रदर्शन
- पीएम किसान सम्मान निधि संचालन
- किसान मेले और पाठशाला आयोजन
🔹 इस जिम्मेदारी के बीच ई-खसरा पड़ताल का बोझ मानसिक उत्पीड़न और हतोत्साहन है।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहित काम्बोज का बयान
“कृषि प्राविधिक सहायक पहले से ही दर्जनों योजनाओं का समयबद्ध संचालन कर रहे हैं। शासन द्वारा जबरन ई-खसरा पड़ताल का काम थोपना न केवल अनुचित है बल्कि कृषि विभाग के कर्मचारियों के मनोबल को भी गिराता है।”
ई-खसरा पड़ताल का विवाद कहाँ से उठा?
- 2023 में भारत सरकार ने ऑफलाइन खसरा पड़ताल को तकनीकी रूप से अपग्रेड कर एग्री-स्टैक एप से जोड़ दिया।
- पहले यह काम लेखपाल करते थे, लेकिन खरीफ 2025 से लेखपालों को इससे मुक्त कर दिया गया।
- शासन ने आदेश जारी कर दिया कि यह काम प्राइवेट सर्वेयर या अन्य विभागों के संविदा कर्मियों से कराया जाए।
- अब कृषि प्राविधिक सहायकों को भी इसमें झोंकने का आदेश जारी कर दिया गया।
संघ का आरोप
- यह आदेश कृषि प्राविधिक सहायकों की शैक्षिक योग्यता और ग्रेड-पे का अपमान है।
- कृषि विभाग के कर्मचारियों पर जबरन दबाव डालना एक नीतिगत भूल और अन्यायोचित निर्णय है।
- यदि ई-खसरा पड़ताल करानी ही है तो इसे राजस्व विभाग के लेखपालों से कराया जाए।
किस-किस ने जताया विरोध?
इस मौके पर संगठन मंत्री संजीव कुमार, रविन्द्र कुमार, अजय तोमर, कृष्णावतार, विशु कुमार, सोनु कुमार, प्रवीन चहल, नीरज कुमार, भावना, प्रदीप, पोरष कुमार, विजयवीर चौहान, अल्ताफ अली, ब्रिजेश कुमार, श्यामलाल, जितेंद्र कुमार, अनिल परमार सहित दर्जनों सदस्य मौजूद रहे।
विश्लेषणात्मक नजरिया
ई-खसरा पड़ताल विवाद यह संकेत देता है कि सरकार की डिजिटल क्रॉप सर्वे योजना की जमीनी स्तर पर स्वीकार्यता पर सवाल उठ रहे हैं।
- राजस्व विभाग से जिम्मेदारी हटाकर कृषि विभाग या प्राइवेट सर्वेयर पर डालना एक तत्कालिक समाधान तो हो सकता है, लेकिन इससे विभागीय असंतोष गहराता जा रहा है।
- यदि यह असंतोष बढ़ा तो भविष्य में कृषि योजनाओं के संचालन पर सीधा असर पड़ सकता है।
बुलेट ट्रेन हाइलाइटर
✅ ई-खसरा पड़ताल: लेखपाल से हटकर प्राइवेट सर्वेयर और कृषि सहायकों पर बोझ
✅ कृषि प्राविधिक सहायक बोले – “हम किसानों की योजनाओं के लिए हैं, खसरा सर्वे के लिए नहीं”
✅ ज्ञापन सौंपकर सीएम से हस्तक्षेप की मांग
✅ संघ ने किया साफ – “यह जिम्मेदारी राजस्व विभाग की ही रहनी चाहिए”












