विश्लेषणात्मक समाचार रिपोर्ट
बिजनौर से बरेली तक: पांच लाख में बिका नवजात, पुलिस ने सकुशल बरामद किया बच्चा
एसआर हेल्थकेयर सेंटर से गायब हुआ था मासूम, डॉक्टर और नर्स पर संगीन आरोप
घटना का पूरा विवरण
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। नूरपुर कस्बे के एसआर हेल्थकेयर सेंटर में तीन महीने पहले जन्मे एक नवजात शिशु को कथित रूप से पांच लाख रुपये में बेचा गया। पुलिस ने अथक प्रयासों के बाद बरेली से बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया और उसे बाल कल्याण समिति की निगरानी में माता-पिता को सौंप दिया।
गांव छोइया नंगली निवासी दिव्यांग करन सिंह की पत्नी रुकमेश ने 13 मई को इस अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था। आरोप है कि बच्चे के जन्म के बाद अस्पताल प्रशासन ने परिवार को गुमराह किया और नवजात को छिपा दिया।
अस्पताल और स्टाफ पर गंभीर आरोप
करन सिंह का आरोप है कि अस्पताल की चिकित्सक रीना चौधरी, डॉ. जावेद, डॉ. माहर और नर्स वंदना ने मिलकर नवजात को गायब कर दिया।
- नर्स वंदना ने बच्चे को पहले ₹1.05 लाख में खरीदा।
- इसके बाद उसी शिशु को बरेली निवासी एक दंपती को ₹5 लाख रुपये में बेच दिया।
यह सौदा सुनकर पूरा क्षेत्र सकते में है और स्थानीय स्तर पर अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं।
परिवार की पीड़ा और संघर्ष
बच्चे के अचानक लापता होने के बाद करन सिंह और उनका परिवार सदमे में चला गया। उन्होंने कई बार अस्पताल से लेकर पुलिस तक गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मजबूरी में करन सिंह ने पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की। पूर्व सांसद ने मामले को गंभीरता से लिया और जिलाधिकारी तथा पुलिस अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिलवाए।
पुलिस की कार्रवाई
थाना नूरपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
- शनिवार को पुलिस टीम ने बरेली से बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया।
- बरामदगी के बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसके माता-पिता को सौंप दिया गया।
- सीओ देश दीपक ने पुष्टि की कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज़ की जा रही है और पूरे नेटवर्क की जांच हो रही है।
बड़ा सवाल: क्या यह संगठित रैकेट है?
इस घटना ने इलाके में खलबली मचा दी है। सवाल यह है कि—
- क्या यह मामला सिर्फ एक बच्चे की बिक्री तक सीमित है?
- या इसके पीछे नवजातों की तस्करी और अवैध गोद लेने का बड़ा रैकेट छिपा है?
- आखिरकार अस्पताल प्रशासन की निगरानी और जिम्मेदारी कहां है?
सामाजिक और कानूनी पहलू
- नवजातों की तस्करी, अवैध गोद लेने और अस्पतालों की अनियमितताओं को लेकर पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
- गरीब और अशिक्षित परिवार अक्सर ऐसे नेटवर्क का आसान शिकार बन जाते हैं।
- इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्राइवेट अस्पतालों की सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।
बिजनौर का यह मामला सिर्फ एक परिवार के बच्चे की बरामदगी की कहानी नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही और लालच की पोल खोलता हुआ बड़ा सवाल है।
यदि समय रहते परिवार आवाज़ न उठाता और पुलिस सक्रिय न होती, तो यह मासूम हमेशा के लिए गायब हो जाता।
अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन केवल बच्चे की बरामदगी तक सीमित रहता है या फिर दोषियों को कड़ी सज़ा देकर इस तरह के नेटवर्क को जड़ से खत्म करता है।










