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दो दशक से लंबित मांगों को लेकर भड़का आक्रोश, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने जेडी कार्यालय पर दिया धरना

दो दशक से लंबित मांगों को लेकर भड़का आक्रोश, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने जेडी कार्यालय पर दिया धरना
         मुख्यमंत्री को भेजा 11 सूत्रीय मांगपत्र

बिजनौर/मुरादाबाद।
सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का धैर्य आखिरकार टूट गया। लगभग दो दशक से शासनादेश जारी न होने और पुरानी लंबित मांगों पर कार्रवाई न होने से आक्रोशित कर्मचारियों ने शुक्रवार को संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) कार्यालय, मुरादाबाद पर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर सरकार की उपेक्षा पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।

धरना प्रदेश स्तर के आह्वान पर आयोजित किया गया था, जिसमें मुरादाबाद मंडल के अलावा बिजनौर जनपद से भी दर्जनभर से अधिक कर्मचारी शामिल हुए। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित 11 सूत्रीय मांगपत्र जेडी और अपर मंडलायुक्त कार्यालय को सौंपा।

 कर्मचारियों की प्रमुख समस्याएँ

शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने कहा कि सरकार पिछले 20 वर्षों से उनकी मांगों को टाल रही है। परिणामस्वरूप वेतन, पेंशन और पदोन्नति जैसे बुनियादी अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं –

  1. शिक्षक पद पर पदोन्नति का प्रावधान
  2. अवकाश नकदीकरण और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना
  3. वेतन विसंगतियों का समाधान
  4. विद्यालय की प्रबंध समिति में भागीदारी
  5. चतुर्थ श्रेणी से लिपिक पद पर पदोन्नति में ट्रिपल सी की बाध्यता समाप्त करना
  6. पुरानी पेंशन योजना बहाल करना
  7. नियुक्ति पद रोक हटाना
  8. आऊटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करना
  9. कर्मचारियों के सेवा सुरक्षा कानून पर ठोस कदम
  10. सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान का निस्तारण
  11. समान कार्य के लिए समान वेतन की गारंटी

आंदोलन का नेतृत्व

धरने का नेतृत्व प्रदेश उपाध्यक्ष पवन तिवारी, सुधीर पाठक और संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक मुकेश सिन्हा ने किया।
इस मौके पर मंडल अध्यक्ष सुखलेश शर्मा, पूर्व मंडल अध्यक्ष दिलेश्वर सिंह, मुरादाबाद जिलाध्यक्ष विशेष कुमार भी मौजूद रहे।

बिजनौर जिले से जिला मंत्री योगेश कुमार, कोषाध्यक्ष जिवेंद्र कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष अंशुल शर्मा, राम चरण सिंह, रामरतन देव, ब्रजेश गोस्वामी, जयवर्धन यादव, अनुराग भारद्वाज, प्रदीप बड़ौला, राजेंद्र कुमार समेत कई कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल हुए।

 कर्मचारियों का बयान

धरने के बाद प्रदेश संयोजक मुकेश सिन्हा ने कहा कि

“लगभग दो दशक से हमारी मांगों को टालने का काम हो रहा है। यदि सरकार ने जल्द ही हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा। हम अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर विधानसभा तक संघर्ष करेंगे।”

 विश्लेषण

  • लंबे समय से उपेक्षा: कर्मचारियों की शिकायतें शिक्षा व्यवस्था के प्रशासनिक ढांचे से जुड़ी हैं। 20 वर्षों से लंबित मांगें सरकार और विभागीय उदासीनता की ओर इशारा करती हैं।
  • राजनीतिक दबाव: मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव को सीधे संबोधित ज्ञापन देकर कर्मचारियों ने संकेत दिया है कि वे अब निर्णायक संघर्ष के मूड में हैं।
  • शिक्षा व्यवस्था पर असर: शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की समस्याएँ हल न होने से विद्यालयों के प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं, जिसका सीधा असर छात्रों और अध्यापकों पर भी पड़ता है।
  • संगठन की ताकत: मुरादाबाद मंडल के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधित्व से साफ है कि यह मुद्दा राज्यव्यापी आंदोलन की ओर बढ़ सकता है।

धरने से यह स्पष्ट है कि शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का सब्र अब जवाब दे रहा है। यदि सरकार ने उनकी 11 सूत्रीय मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन और व्यापक रूप लेकर शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

 

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