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कृषि प्राविधिकों ने ई-खसरा पड़ताल से किया किनारा

कृषि प्राविधिकों ने ई-खसरा पड़ताल से किया किनारा

बिजनौर में अधीनस्थ कृषि सेवा संघ का बड़ा ऐलान, बोले – “राजस्व विभाग का काम हम नहीं करेंगे”

बिजनौर, 18 अगस्त।
जनपद बिजनौर में कृषि विभाग के प्राविधिकों ने खरीफ सीजन की ई-खसरा पड़ताल से साफ इनकार कर दिया है। अधीनस्थ कृषि सेवा संघ के प्रान्तीय आवाहन पर शुरू किए गए इस आंदोलन से प्रदेश सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

🔹 विवाद की जड़ – “राजस्व विभाग का काम क्यों थोप रहे हैं?”

ई-खसरा पड़ताल को लेकर कृषि प्राविधिकों का साफ कहना है कि यह कार्य पूरी तरह राजस्व विभाग का है

  • दशकों से खसरा और उससे जुड़े रिकॉर्ड राजस्व कार्मिक तैयार करते आ रहे हैं।
  • लेकिन शासन ने अचानक इस जिम्मेदारी को राजस्व विभाग से हटाकर कृषि विभाग पर थोप दिया।
  • कृषि कर्मियों का आरोप है कि यह निर्णय नियमों और परंपराओं के विरुद्ध है।

🔹 संघ की चेतावनी – “अब और नहीं करेंगे गैर-तकनीकी काम”

अधीनस्थ कृषि सेवा संघ बिजनौर के अध्यक्ष लखवीर सिंह और मंत्री राम प्रसाद ने बताया कि –

  • “हम कृषि विशेषज्ञ हैं, हमारी जिम्मेदारी फसलों की तकनीकी देखभाल और किसानों को मार्गदर्शन देना है।
  • ई-खसरा पड़ताल जैसे काम पूरी तरह राजस्व विभाग के हैं। इन्हें जबरन कृषि विभाग पर डालने से हम नाराज़ हैं।”

संघ ने साफ चेतावनी दी कि भविष्य में भी कृषि प्राविधिक राजस्व विभाग से जुड़े किसी भी कार्य का निर्वहन नहीं करेंगे

🔹 आंदोलन की पृष्ठभूमि

  • 16 अगस्त से ई-खसरा पड़ताल की शुरुआत होनी थी।
  • लेकिन अधीनस्थ कृषि सेवा संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष ने पहले ही कृषि निदेशक को पत्र भेजकर इस कार्य के बहिष्कार का ऐलान कर दिया था।
  • उसी क्रम में बिजनौर जनपद में भी सभी प्राविधिकों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया।
  • उप कृषि निदेशक बिजनौर को इस निर्णय की औपचारिक सूचना दे दी गई है।

🔹 प्रशासन पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बहिष्कार से फसल सर्वेक्षण और आंकड़ों की पारदर्शिता पर असर पड़ेगा

  • खरीफ सीजन में फसलों की स्थिति जानने के लिए ई-खसरा पड़ताल बेहद अहम होती है।
  • यदि कृषि प्राविधिक काम नहीं करेंगे तो यह प्रक्रिया प्रभावित होगी।
  • इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं, बीमा दावों और राहत पैकेज की तैयारी पर भी पड़ सकता है।

🔹 किसानों की चिंता

किसान वर्ग इस टकराव को लेकर असमंजस में है।

  • किसानों को आशंका है कि विवाद की वजह से उनके फसल संबंधी रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं होंगे।
  • इससे बीमा क्लेम और सरकारी लाभ योजनाओं का वितरण प्रभावित हो सकता है।

🔹 आगे क्या?

संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि शासन ने अपनी नीति पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा

  • संभव है कि यह मुद्दा जल्द ही प्रदेश स्तर पर बड़े विवाद का रूप ले ले।
  • सरकार को तय करना होगा कि ई-खसरा पड़ताल जैसे काम कौन करेगा – राजस्व विभाग या कृषि विभाग?

बिजनौर से शुरू हुआ यह बहिष्कार आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में फैल सकता है। यदि ऐसा हुआ तो खरीफ सीजन के फसल डेटा पर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा और शासन को राजस्व व कृषि विभागों के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट करनी ही पड़ेगी।

 

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