किसानों का महाप्रदर्शन: ट्रैक्टरों की लहर, कलेक्ट्रेट में तालाबंदी, वार्ता नाकाम आंदोलन अनिश्चितकालीन धरना शुरू

बिजनौर | 13 अगस्त 2025। किसानों का आक्रोश मंगलवार को बिजनौर की सड़कों पर साफ दिखाई दिया। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान के नेतृत्व में हजारों किसान ट्रैक्टरों के काफिले के साथ चक्कर चौराहे से निकलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। पूरे शहर में ट्रैक्टरों की लंबी कतारें, नारों की गूंज और भीड़ का दबाव प्रशासन के लिए चुनौती बन गया।
कैसे शुरू हुआ आंदोलन
- पहले से तय कार्यक्रम के तहत किसान चक्कर चौराहा पर सुबह से जुटने लगे।
- थोड़ी ही देर में ट्रैक्टरों की लहर चक्कर चौराहे से रवाना हुई, जो बिजनौर थाना, जज्जी नुमाइश ग्राउंड होते हुए सीधे कलेक्ट्रेट पहुंची।
- भीड़ का आकार देखकर प्रशासन ने बीच रास्ते रोकने का प्रयास तक नहीं किया।
कलेक्ट्रेट पर किसानों की कार्रवाई
- कलेक्ट्रेट पहुंचते ही किसानों ने चकबंदी विभाग के दरवाज़ों पर ताले जड़ दिए।
- पूरे दिन कलेक्ट्रेट में सरकारी कामकाज ठप रहा।
- परिसर में ट्रैक्टर खड़े कर किसान वहीं डटे रहे और खुले में खाना पकाने लगे – यह संकेत कि आंदोलन रातभर और संभवतः कई दिनों तक चलेगा।
वार्ता का नाकाम प्रयास
- मौके पर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे, जिनमें –
डीएफओ, रेंजर वन विभाग, एडीएम वान्य सिंह, एसडीएम सदर, एसडीएम धामपुर, जिला गन्ना अधिकारी, सहायक पुलिस अधीक्षक, सीओ सदर, PWD और बिजली विभाग के अभियंता, चकबंदी अधिकारी शामिल थे। - दो दौर की लंबी बातचीत के बाद भी किसानों की मांगों पर सहमति नहीं बन सकी।
- वार्ता नाकाम होते ही किसानों ने मंच से अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी।
15 अगस्त को झंडा फहराने की घोषणा
जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान ने मंच से ऐलान किया –
“15 अगस्त का तिरंगा भारतीय किसान यूनियन बिजनौर के कार्यकर्ता यहीं कलेक्ट्रेट में फहराएंगे।”
इस घोषणा से आंदोलन के राजनीतिक और सांकेतिक दोनों पहलू और मजबूत हो गए।
नेतृत्व और टीम
- अध्यक्षता: सुनील प्रधान
- संचालन: विजय पहलवान
- प्रमुख उपस्थिति: मनप्रीत सिंह सोनू, रामोतार सिंह, बाबूराम तोमर, कुलदीप सिंह, धर्मवीर थनकर, जय सिंह, जितेंद्र सिंह, प्रमोद कुमार, अजय बालियान, अमरपाल सिंह, सौरभ काकरान, याकूब, मोनू प्रधान, रजनीश अहलावत, बलजीत सिंह, हर्षवर्धन लुधियाना, वीरेंद्र सिंह, तिलकराम समेत दर्जनों गांवों के किसान नेता और कार्यकर्ता।
आंदोलन की गूंज – विश्लेषण
- रणनीति: ट्रैक्टर रैली से शहर के बीचों-बीच कलेक्ट्रेट तक पहुंचना किसानों की ताकत का प्रदर्शन था।
- प्रशासन की स्थिति: टकराव से बचने के लिए प्रशासन ने रोकथाम की बजाय वार्ता का रास्ता चुना।
- वार्ता विफलता का मतलब: धरना अब लम्बा खिंच सकता है और 15 अगस्त के कार्यक्रम से इसकी राजनीतिक धार तेज हो सकती है।
- स्थानीय से व्यापक असर: BKU का यह कदम उत्तर प्रदेश में किसानों के मुद्दों को एक बार फिर सुर्खियों में ला सकता है।
हेडलाइन सुझाव:
“बिजनौर में किसानों का ट्रैक्टर मार्च: कलेक्ट्रेट तालाबंदी, वार्ता विफल – 15 अगस्त को तिरंगा यहीं फहराएंगे”
सोशल मीडिया कैप्शन:
“सैकड़ों ट्रैक्टर, तालाबंदी, नारेबाजी और अनिश्चितकालीन धरना – बिजनौर में किसानों का आक्रोश चरम पर!”











