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ढकरिया में ज़मीन पर पेड़ लगाने को लेकर हंगामा, समाधान विफल, अब 13 अगस्त को कलेक्ट्रेट पर घेराव

            किसान बनाम वन विभाग विवाद:

ढकरिया में ज़मीन पर पेड़ लगाने को लेकर हंगामा, समाधान विफल, अब 13 अगस्त को कलेक्ट्रेट पर घेराव

रिपोर्ट: नजीबाबाद, बिजनौर | दिनांक: 29 जून 2025

नजीबाबाद तहसील के मौजा ढकरिया में एक बार फिर ज़मीन के मालिकाना हक को लेकर किसान और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। गाना बढ़ापुर के किसानों—श्याम सिंह, नौरंग सिंह, शिवराज सिंह और चंद्रपाल सिंह—की ज़मीन पर वन विभाग द्वारा जबरन पेड़ लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

 घटना के प्रमुख बिंदु:

  • वन विभाग की कार्रवाई: ढकरिया गांव में बिना पूर्व सहमति किसानों की निजी भूमि पर पेड़ लगाना शुरू किया गया।
  • किसानों का आक्रोश: प्रभावित किसानों ने इसे ज़मीन पर ‘कब्जे की साजिश’ बताया और तत्काल विरोध जताया।
  • भाकियू की एंट्री: सूचना मिलते ही भारतीय किसान यूनियन के स्थानीय पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। बाद में जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान स्वयं मौके पर पहुंचे।
  • वार्ता विफल: डीएफओ से वार्ता की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। किसानों की मांग थी कि जमीन से पेड़ हटाए जाएं और वन विभाग बिना अनुमति कार्रवाई न करे।
  • आंदोलन की चेतावनी: सुनील प्रधान ने घोषणा की कि 13 अगस्त को बिजनौर कलेक्ट्रेट में विशाल किसान महापंचायत होगी, जहां इस मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाया जाएगा।
  • साफ संदेश: “किसी भी किसान का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा,” – सुनील प्रधान
  • साथ रहे कई प्रमुख किसान नेता: मुनेंद्र काकरान, कुलदीप सिंह, वीरेंद्र वाट, पुनीत, विनीत चौधरी सहित अन्य किसान भी मौके पर मौजूद रहे।

 विश्लेषण:

यह विवाद न केवल किसानों के भू-स्वामित्व अधिकार पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है, बल्कि प्रशासनिक संवाद और वन विभाग की नीतियों पर भी गंभीर सवाल उठाता है। अगर किसानों की निजी ज़मीन पर बिना अनुमति वृक्षारोपण किया गया है, तो यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। वहीं दूसरी ओर, पर्यावरणीय हितों और सरकारी योजना की पारदर्शिता पर भी पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस होती है।

भले ही पर्यावरण की रक्षा के लिए वृक्षारोपण आवश्यक है, लेकिन किसानों की भूमि और अधिकारों की अनदेखी करके कोई योजना सफल नहीं हो सकती। अब नजरें 13 अगस्त पर टिकी हैं—जहां किसान शक्ति प्रदर्शन कर सकते हैं और प्रशासन को मजबूर किया जा सकता है कि वह इस विवाद का न्यायोचित समाधान निकाले।

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