डिजिटल ट्रैकिंग की ओर बड़ा कदम: अब माध्यमिक स्कूलों में छात्र-शिक्षक की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज

बिजनौर| Target TV Live डेस्क
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने एक और बड़ा प्रशासनिक सुधार लागू किया है। अब राज्य के सभी राजकीय, वित्तपोषित एवं गैर-वित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों एवं शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज की जा रही है। इसका उद्देश्य न केवल पारदर्शिता बढ़ाना है, बल्कि स्कूलों में शैक्षणिक अनुशासन को भी मजबूत करना है।
इस व्यवस्था की जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक जयकरण यादव ने साझा की और बताया कि यह व्यवस्था पूरे जनपद में सुचारु रूप से प्रारंभ हो चुकी है। इसके साथ ही बोर्ड ने स्कूलों को प्रेरित करने के लिए एक नई प्रोत्साहन नीति की भी घोषणा की है।
मुख्य बातें (Highlights):
- 🔹 सभी माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य
– यह व्यवस्था राजकीय, अर्द्ध-सरकारी और निजी (मान्यता प्राप्त) विद्यालयों पर समान रूप से लागू की गई है।- 🔹 पोर्टल के माध्यम से रीयल-टाइम ट्रैकिंग
– शिक्षकों और छात्रों दोनों की उपस्थिति अब प्रतिदिन पोर्टल पर अपलोड की जा रही है।- 🔹 2026 बोर्ड परीक्षा केंद्र चयन में 10% अतिरिक्त वेटेज
– जो विद्यालय नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे, उन्हें बोर्ड परीक्षा केंद्र बनने में 10% अतिरिक्त अंक (वेटेज) मिलेगा।- 🔹 डिजिटल मॉनिटरिंग से शिक्षण गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद
– इससे अनुपस्थित शिक्षक या छात्रों की निगरानी आसान होगी और अकादमिक अनुशासन बढ़ेगा।
इस फैसले का संभावित प्रभाव (विश्लेषण)
शैक्षणिक अनुशासन में बढ़ोतरी:
अब शिक्षक और छात्र दोनों नियमित रूप से स्कूल आने को मजबूर होंगे, जिससे उपस्थिति और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार होगा।
परीक्षा केंद्र निर्धारण में पारदर्शिता:
अब केवल वही स्कूल परीक्षा केंद्र बनेंगे जो ईमानदारी से उपस्थिति दर्ज करेंगे — यह कदाचार पर नियंत्रण की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
निजी विद्यालयों में जवाबदेही सुनिश्चित:
अब गैर-वित्त पोषित (Private unaided) स्कूलों की उपस्थिति भी डिजिटल माध्यम से ट्रैक होगी, जिससे ‘फर्जी उपस्थिति’ जैसी शिकायतों पर रोक लगेगी।
फैक्ट चेक एवं अन्य राज्यों की तुलना:
🔸 कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में पहले से Student Attendance Tracking System (SATS) लागू है, जिसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
🔸 NITI Aayog की एक रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल उपस्थिति से स्कूलों में छात्र उपस्थिति में 15-18% की वृद्धि देखी गई।
संभावित चुनौतियां:
- 🔸 ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या।
- 🔸 तकनीकी प्रशिक्षण की कमी के चलते शिक्षक वर्ग में प्रारंभिक असहजता।
- 🔸 किसी भी गड़बड़ी पर छात्रों के खिलाफ अनुचित कार्रवाई की आशंका।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद का यह कदम डिजिटल युग में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल बोर्ड परीक्षाओं की निष्पक्षता को सुनिश्चित करेगा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा गुणवत्ता में भी एक उल्लेखनीय सुधार लाएगा।
आपके स्कूल में ऑनलाइन उपस्थिति लागू है? अनुभव नीचे कमेंट में बताएं!
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