‘बुंदेलखंड’ को नया उत्तर प्रदेश बनाने की पहल, मुख्यमंत्री योगी का विकास मंत्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी और चित्रकूट धाम मंडल के जनप्रतिनिधियों संग की विकास समीक्षा, कहा – “अब केवल योजना नहीं, ज़मीनी क्रियान्वयन ही पहचान है”
लखनऊ | दिनांक: 27 जुलाई 2025
मुख्य बातें (HIGHLIGHTS):
- मुख्यमंत्री आवास पर उच्चस्तरीय बैठक, झांसी व चित्रकूट धाम मण्डल के जनप्रतिनिधियों से संवाद
- जनअपेक्षाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधा समझने का प्रयास
- 8,776 करोड़ रुपये की लागत से 1,088 विकास कार्य प्रस्तावित
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झांसी मंडल – ₹4,901 करोड़ | चित्रकूट धाम मंडल – ₹3,875 करोड़
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ब्लॉक कनेक्टिविटी, धार्मिक स्थल लिंक, फ्लाईओवर, अंडरपास, सिंचाई, लॉजिस्टिक्स हब जैसी योजनाएं शामिल
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चित्रकूट को “भगवान श्रीराम की तपोस्थली” और झांसी को “वीरता की धरोहर” बताते हुए विशेष सम्मान
मुख्यमंत्री के अहम निर्देश और संदेश:
- “बुंदेलखंड विकास सर्वोच्च प्राथमिकता” – उपेक्षा से उज्ज्वल भविष्य की ओर
- जनप्रतिनिधियों की सलाह से तय होंगी परियोजनाओं की प्राथमिकताएं
- लोक निर्माण व धर्मार्थ कार्य विभाग को समन्वय कर समयबद्ध और पारदर्शी कार्यों का निर्देश
- नगर विकास विभाग को आदेश – प्रस्ताव से पहले जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन अनिवार्य
- “योजनाएं कागज पर नहीं, ज़मीन पर दिखें – यही हमारी असली पहचान”
मण्डलवार कार्य और लागत का विश्लेषण:
| मण्डल | जनपद | प्रस्तावित कार्य | अनुमानित लागत |
|---|---|---|---|
| झांसी मण्डल | झांसी, जालौन, ललितपुर | 691 | ₹4,901 करोड़ |
| चित्रकूट धाम मण्डल | बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, महोबा | 397 | ₹3,875 करोड़ |
| कुल | 7 जनपद | 1,088 | ₹8,776 करोड़ |
🔺 झांसी (₹1,916 Cr) और बांदा (₹1,825 Cr) शीर्ष पर
प्रमुख प्रस्तावित विकास कार्यों में शामिल:
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इंटर-कनेक्टिविटी और ब्लॉक सड़कें
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धार्मिक स्थलों तक सुगम पहुँच
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लॉजिस्टिक्स हब और बाईपास निर्माण
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ROB / अंडरपास, फ्लाईओवर
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रोड सेफ्टी उपाय
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सिंचाई अवसंरचना
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पंटून ब्रिज
विश्लेषण:
मुख्यमंत्री योगी की यह पहल केवल योजनाओं की फाइल खोलने तक सीमित नहीं, बल्कि विकास को ज़मीनी हकीकत बनाने का रोडमैप है। बुंदेलखंड जैसे पिछड़े और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र को आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के साथ अब आर्थिक इंजन बनाने की तैयारी है। जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी सौंपकर शासन प्रशासन में सहभागी बनाने की नीति स्पष्ट है।
निष्कर्ष:
बुंदेलखंड का पुनर्जागरण अब केवल भाषण नहीं, बल्कि बजट और योजनाओं में दिख रहा है। यदि यह मॉडल ईमानदारी से ज़मीन पर उतरा, तो ‘नया उत्तर प्रदेश’ वास्तव में बुंदेलखंड से बनना शुरू हो सकता है।
✍️ रिपोर्ट: Target TV Live डिजिटल डेस्क










