सूबेदार मेजर रावत की कारगिल विजय दिवस पर ‘हरियाली से वीरों को श्रद्धांजलि’

87 वर्षीय फौजी सूबेदार मेजर रावत बने पर्यावरण प्रेम की मिसाल
डिफेंस कॉलोनी, कोटद्वार | 26 जुलाई 2025 ।कारगिल विजय दिवस के अवसर पर जब पूरा देश शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा था, तब एक रिटायर्ड सैनिक ने श्रद्धांजलि की एक अनोखी मिसाल पेश की — वृक्षारोपण के रूप में। 87 वर्षीय सूबेदार मेजर (सेनि.) मदन सिंह रावत ने ग्रीन आर्मी देवभूमि उत्तराखंड के सहयोग से कोटद्वार की डिफेंस कॉलोनी में पौधारोपण कर शहीदों की स्मृति को हरियाली में बदल दिया।
मुख्य बिंदु (Highlights):
- सैनिक का संकल्प: 87 साल की उम्र में भी भारतीय सेना के पूर्व सूबेदार मेजर मदन सिंह रावत में देशभक्ति का जज्बा बरकरार — “जवान कभी बूढ़ा नहीं होता” को सच कर दिखाया।
- हर पौधा एक श्रद्धांजलि: कारगिल विजय दिवस पर वृक्षारोपण कर शहीदों को दी अनूठी श्रद्धांजलि।
- सेना से समाज तक: 1956 में 5वीं गढ़वाल राइफल से सेना में भर्ती हुए रावत ने 1962 के चीन युद्ध और 1971 के भारत-पाक युद्ध में निभाई अहम भूमिका।
- सेना से सेवा तक: 1987 में रिटायर होने के बाद 35 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण में जुटे हैं रावत — अब तक सैकड़ों पेड़ स्वयं लगाए।
- प्रेरणा के प्रतीक: उनके जीवन से युवा पीढ़ी को मिलता है राष्ट्र सेवा और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संदेश।
सेना से सीधी सेवा: देश से प्रेम अब प्रकृति के लिए
सूबेदार मेजर रावत का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सैनिक सिर्फ बंदूक से नहीं, पेड़ लगाकर भी देश की सेवा कर सकते हैं। पहाड़ों में जन्मे रावत ने देश की सीमाओं की रक्षा के बाद अब धरती की हरियाली को अपना मिशन बना लिया है।
उनका संदेश साफ है — ‘शहीदों की स्मृति सिर्फ स्मारकों में नहीं, वृक्षों में भी जीवित रहनी चाहिए।’
कार्यक्रम में शामिल रहे:
- सत्यवती रावत
- विनय रावत
- प्रियंका रावत
- ग्रीन आर्मी देवभूमि उत्तराखंड से शिवम नेगी
- कोषाध्यक्ष उत्कर्ष नेगी
सम्पादकीय टिप्पणी
“जहाँ कुछ लोग रिटायरमेंट को आराम का समय मानते हैं, वहीं सूबेदार मेजर रावत ने इसे समाज के लिए नया मिशन बना दिया है। उनके हाथों में अब बंदूक नहीं, पौधे हैं — और यही हमारी सबसे बड़ी विजय है। कारगिल शहीदों को ऐसी श्रद्धांजलि वाकई हर भारतीय को प्रेरणा देती है।”
चाहें युद्ध का मैदान हो या पर्यावरण की लड़ाई — सूबेदार मेजर रावत जैसे सैनिक हर मोर्चे पर देश को जीत दिलाते हैं। 🌿🇮🇳











