निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती, जिलाधिकारी ने दिए कड़े निर्देश

बिजनौर : निजी स्कूलों में मनमानी फीस वृद्धि, ड्रेस और पाठ्यपुस्तक बदलने जैसी समस्याओं पर लगाम लगाने के लिए जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कड़े कदम उठाए हैं। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के सभी निजी स्कूल शैक्षिक सत्र 2025-26 से संबंधित सभी नीतियों को शासन के दिशानिर्देशों के अनुरूप लागू करें। बैठक में सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध स्कूलों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य शामिल हुए।
फीस और पाठ्यपुस्तकों को लेकर सख्ती
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि किसी भी विद्यालय में पांच वर्ष से पहले छात्रों की ड्रेस बदली नहीं जाएगी। साथ ही, स्कूल प्रशासन यह भी सुनिश्चित करेगा कि किसी भी छात्र को विशेष दुकानों से किताबें खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। उन्होंने साफ किया कि पाठ्यपुस्तकों और यूनिफॉर्म का वितरण स्कूल परिसर में नहीं किया जाएगा। अगर किसी स्कूल द्वारा इस नियम का उल्लंघन किया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
शुल्क संबंधी पारदर्शिता
फीस को लेकर भी प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सभी स्कूलों को अपनी फीस संरचना को सार्वजनिक रूप से घोषित करना होगा। यह विवरण स्कूल की वेबसाइट, पीएनटी व्हाट्सएप ग्रुप और नोटिस बोर्ड पर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, ताकि अभिभावकों को पूरी जानकारी प्राप्त हो सके और फीस से संबंधित कोई भ्रामक स्थिति न बने।
अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रों के लिए आरक्षण
सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि हर स्कूल में 10 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए आरक्षित रखी जाएं। इसके साथ ही, दिव्यांग छात्रों और आरटीई के तहत पात्र छात्रों के प्रवेश में भी प्राथमिकता दी जाए।
छात्रों और अभिभावकों के हितों की सुरक्षा
स्कूल प्रशासन को निर्देश दिया गया कि अगर कोई छात्र प्रवेश स्थगित करना चाहता है तो उसे पूरा शुल्क वापस किया जाए। किसी भी तरह से छात्रों और अभिभावकों का शोषण सहन नहीं किया जाएगा। स्कूल प्रबंधन समितियों को भी अद्यतन करने और उनकी संरचना शासन के निर्देशों के अनुरूप रखने का निर्देश दिया गया है।
सड़क सुरक्षा पर जोर
बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए जिलाधिकारी ने स्कूलों को निर्देश दिया कि बाइक से आने वाले छात्रों को अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करें। इसके अलावा, छात्रों का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए भी स्कूलों को प्रोत्साहित करने की बात कही गई।
प्रशासन की सख्ती, स्कूलों पर नकेल
यह बैठक इस ओर इशारा करती है कि जिला प्रशासन अब निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए पूरी तरह सख्त हो गया है। शिक्षा के निजीकरण और उससे उपज रही अनियमितताओं को नियंत्रित करने के लिए यह एक बड़ा कदम है। अब देखना होगा कि स्कूल प्रशासन इन निर्देशों का कितनी गंभीरता से पालन करता है और अभिभावकों को कितनी राहत मिलती है।











