नदियों के लिए जीवन, जीवन के लिए नदियां” कार्यक्रम

ट्रेंचर विधि: जल संरक्षण और फसल उत्पादन की क्रांतिकारी तकनीक
मुरादाबाद, छजलैट। जल संरक्षण और सतत कृषि विकास की दिशा में एक नई उम्मीद बनकर उभरी है ट्रेंचर विधि, जो न केवल पानी की बचत करती है, बल्कि फसलों की उत्पादकता भी बढ़ाती है। हाल ही में ग्राम सदरपुर मतलबपुर में आयोजित “नदियों के लिए जीवन, जीवन के लिए नदियां” कार्यक्रम के दौरान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सौजन्य से किसानों को ट्रेंचर यंत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर अपर जिला कृषि अधिकारी अमित कुमार ने किसानों को ट्रेंचर विधि के लाभों के बारे में जानकारी दी और इसे अपनाने का आग्रह किया।
क्या है ट्रेंचर विधि?
ट्रेंचर विधि एक उन्नत कृषि तकनीक है, जिसमें ट्रेंचर मशीन की मदद से खेत में गहरी, संकरी नालियां (खांचे) बनाई जाती हैं। इन नालियों में फसल की बुवाई की जाती है, जिससे पानी सीधे जड़ों तक पहुंचता है और आसपास की मिट्टी में नमी अधिक समय तक बनी रहती है। यह विधि विशेष रूप से गन्ने, मक्का और अन्य पंक्तियों में उगाई जाने वाली फसलों के लिए फायदेमंद साबित होती है।
ट्रेंचर विधि के प्रमुख लाभ:
- जल संरक्षण: नालियों में पानी एकत्रित होने के कारण वाष्पीकरण कम होता है, जिससे 30-40% तक पानी की बचत होती है।
- कम लागत, अधिक उत्पादन: इस तकनीक से सिंचाई, उर्वरक और कीटनाशकों की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और फसल की पैदावार बढ़ती है।
- मृदा स्वास्थ्य में सुधार: जल प्रबंधन के बेहतर होने से मिट्टी की संरचना और पोषक तत्व संतुलित रहते हैं, जिससे फसल की जड़ें मजबूत होती हैं।
- जलभराव से बचाव: नालियों के माध्यम से अतिरिक्त पानी बहकर बाहर निकल जाता है, जिससे फसल जलभराव से बची रहती है।
किसानों की प्रतिक्रियाएं:
कार्यक्रम के दौरान ट्रेंचर यंत्र प्राप्त करने वाले किसानों में योगेंद्र चौधरी, नरेंद्र चौधरी और केदार सिंह शामिल रहे। किसानों ने इसे खेती के लिए एक वरदान बताया। योगेंद्र चौधरी ने कहा, “ट्रेंचर विधि से हमारी सिंचाई की जरूरत आधी रह गई है, और गन्ने की फसल में पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।”
सतत विकास की ओर एक कदम:
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के प्रोजेक्ट ऑफिसर पंकज दिवाकर ने बताया कि ट्रेंचर विधि जैसे नवाचार न केवल किसानों के जीवन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि जल संरक्षण के माध्यम से नदी पारिस्थितिकी तंत्र को भी सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने तटीय गांवों के किसानों को जैविक खेती अपनाने और जल संसाधनों के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया।
ट्रेंचर विधि जैसी उन्नत तकनीकें कृषि क्षेत्र में क्रांति ला सकती हैं, खासकर ऐसे समय में जब जल संकट और बढ़ती उत्पादन लागत किसानों के लिए चुनौती बनी हुई है। यह विधि केवल पानी की बचत ही नहीं, बल्कि सतत कृषि के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करती है। अगर इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, तो यह देश की खाद्य सुरक्षा और जल संरक्षण के लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।











