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ISRO ने NavIC प्रणाली को मजबूत करने के लिए NVS-02 उपग्रह किया लॉन्च

ISRO ने NavIC प्रणाली को मजबूत करने के लिए NVS-02 उपग्रह किया लॉन्च

श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 29 जनवरी को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक NVS-02 नेविगेशन उपग्रह का प्रक्षेपण किया। यह प्रक्षेपण GSLV-F15 रॉकेट के माध्यम से हुआ, जो भारत के NavIC (Navigation with Indian Constellation) प्रणाली को और अधिक उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस उपग्रह की मदद से भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली को सटीकता और विश्वसनीयता में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की उम्मीद है।

NavIC प्रणाली को मजबूती मिलेगी

https://x.com/isro/status/1884415110900588667?t=hkHGcy-8oewKB1h4Bx5YFw&s=08

NVS-02 उपग्रह NavIC नेविगेशन प्रणाली का हिस्सा है, जिसे GPS के भारतीय संस्करण के रूप में देखा जाता है। हालांकि, NavIC अपने आप में एक स्वतंत्र और अत्यधिक सटीक क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली है, जिसे खासतौर पर भारत और इसके आसपास के 1,500 किलोमीटर के क्षेत्र में पोजिशनिंग और टाइमिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

NavIC को मुख्य रूप से सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए विकसित किया गया है। इसमें रक्षा अनुप्रयोगों के साथ-साथ परिवहन, आपदा प्रबंधन, कृषि, मत्स्य पालन, भूगर्भीय सर्वेक्षण और मोबाइल संचार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपयोग की क्षमता है।

उपग्रह की विशेषताएँ और तकनीकी क्षमताएँ

NVS-02 में L1, L5 और S-बैंड पेलोड मौजूद हैं, जो इसकी कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं। साथ ही, इस उपग्रह में स्वदेशी रूप से विकसित परमाणु घड़ी का उपयोग किया गया है, जो सटीक समय निर्धारण में सहायक होगी।

इस उपग्रह की कुछ प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • वजन: लगभग 2,250 किलोग्राम
  • ऊर्जा क्षमता: लगभग 3 किलोवाट
  • कक्षा: जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO)

NVS-02 अपने पूर्ववर्ती उपग्रहों की तुलना में अधिक उन्नत है और इसकी सेवा जीवन लंबी होने की संभावना है।

भारत के लिए क्या होगा लाभ?

भारत के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नेविगेशन प्रणाली रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में, दुनिया भर में अमेरिकी GPS, रूसी GLONASS, यूरोपीय Galileo और चीनी BeiDou जैसी नेविगेशन प्रणालियाँ काम कर रही हैं। हालांकि, भारत के लिए NavIC का विकास आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

NavIC प्रणाली के मजबूत होने से भारतीय सेना को सटीक नेविगेशन डेटा मिलेगा, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य अभियानों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इसके अलावा, आम नागरिकों के लिए भी यह प्रणाली काफी उपयोगी होगी, क्योंकि NavIC आधारित चिप्स और डिवाइसेज़ को स्मार्टफोन और वाहनों में एकीकृत किया जा रहा है।

ISRO की बड़ी उपलब्धि

यह मिशन ISRO के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर भी है, क्योंकि यह श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित 100वां मिशन था। ISRO के वैज्ञानिकों ने इस मिशन को सफल बनाकर भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और आत्मनिर्भरता को और मजबूत किया है।

NVS-02 का सफल प्रक्षेपण भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम को नई मजबूती प्रदान करेगा। यह उपग्रह देश की संचार, रक्षा और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाएगा, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनने में मदद मिलेगी। ISRO की यह सफलता एक बार फिर भारत को अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों की सूची में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 

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