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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का आंदोलन तेज, चौथे दिन भी काली पट्टी बांधकर विरोध

उत्तर प्रदेश: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का आंदोलन तेज, चौथे दिन भी काली पट्टी बांधकर विरोध

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संघ के संघर्ष समिति के आवाहन पर प्रदेश भर में कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज किया और विभिन्न स्थानों पर सभाएं आयोजित की।

संविदा कर्मियों की छंटनी से बढ़ा आक्रोश
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि निजीकरण से लाखों बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में कुल 77,491 पद हैं, जिनमें से निजीकरण के बाद बड़े पैमाने पर छंटनी की संभावना है। इसमें 50,000 संविदा कर्मी, 23,818 तकनीशियन, 2,154 जूनियर इंजीनियर और 1,518 अभियंता शामिल हैं।

पदाधिकारियों ने कहा कि संविदा कर्मियों की छंटनी पहले ही शुरू हो चुकी है, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि निजीकरण के बाद दिल्ली और उड़ीसा जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को वीआरएस देकर हटाया गया। इसी तरह आगरा में टोरेंट पॉवर कंपनी और ग्रेटर नोएडा में नोएडा पॉवर कंपनी ने किसी भी सरकारी कर्मचारी को नहीं रखा।

आरएफपी डॉक्यूमेंट में ‘अर्ली वीआरएस’ का जिक्र
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया के तहत ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए जारी आरएफपी डॉक्यूमेंट में ‘अर्ली वीआरएस’ का उल्लेख किया गया है। यह इशारा करता है कि कम अनुभव वाले कर्मचारियों को हटाने की तैयारी की जा रही है।

विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा
वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बरेली, कानपुर, मेरठ समेत अन्य जिलों में विरोध प्रदर्शन हुआ। बिजली कर्मचारी संघ ने घोषणा की है कि विरोध प्रदर्शन 18 जनवरी को भी जारी रहेगा।

बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का यह विरोध सरकार और विद्युत विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा है। संघर्ष समिति ने सरकार से निजीकरण की योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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