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वन संपदा की महालूट: नजीबाबाद वन प्रभाग में अधिकारियों पर गिरी गाज

वन संपदा की महालूट: नजीबाबाद वन प्रभाग में अधिकारियों पर गिरी गाज

फाइल फोटो सोशल मीडिया से साभार

बिजनौर/बढ़ापुर।  नजीबाबाद वन प्रभाग की साहूवाला रेंज में करोड़ों रुपये की वन संपदा की लूट ने न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उच्चाधिकारियों तक इसकी गूंज पहुंचने के बाद कई बड़ी कार्रवाइयां हुई हैं। इस मामले में वन तस्करों द्वारा लगभग 450 कीमती पेड़ों को काटकर ले जाने की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। लूटी गई वन संपदा की कीमत दो करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

घटना और तस्करों का नेटवर्क

साहूवाला रेंज में साल, खैर, और सागौन जैसे कीमती पेड़ों की अवैध कटाई और लूट का मामला सामने आया है। तस्करों ने योजनाबद्ध तरीके से इन पेड़ों को काटा और ट्रकों व डीसीएम के माध्यम से रेंज से बाहर ले गए। इस घटना के बाद रेंज की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है।

जांच और शुरुआती कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ स्थित प्रमुख वन संरक्षक ने मुरादाबाद और बरेली के वन संरक्षकों को जांच का जिम्मा सौंपा। जांच के दौरान साहूवाला रेंज के रेंजर आरपी ध्यानी को निलंबित कर दिया गया। इसके बावजूद विभाग पर सवाल उठे कि तस्करों के खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।

डीएफओ वंदना फोगाट पर कार्रवाई

इस प्रकरण में नजीबाबाद की डीएफओ वंदना फोगाट की भूमिका पर भी सवाल उठे। समाचार माध्यमों ने उनकी कथित लापरवाही को उजागर किया, जिसके बाद उच्च अधिकारियों ने उनके खिलाफ जांच शुरू की। आखिरकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, लखनऊ ने वंदना फोगाट को नजीबाबाद डिवीजन से हटा दिया।

रुहेलखंड जोन में मची खलबली

इस कार्रवाई से रुहेलखंड जोन में उच्च अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, कई अधिकारियों ने इस घटना पर पर्दा डालने का प्रयास किया था। अब उनके खिलाफ भी कार्रवाई होने की संभावना है।

वन विभाग की साख पर सवाल

यह घटना वन विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़े करती है। वन तस्करी की इतनी बड़ी घटना के बावजूद विभाग का शुरुआती ढीलापन और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की धीमी गति विभाग की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाती है।

भविष्य की दिशा

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने अब तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की सख्त आवश्यकता है। यह देखना होगा कि आगे की जांच में दोषी अधिकारियों और तस्करों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

साहूवाला रेंज की यह घटना केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली और संरचना में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है। यह प्रकरण वन संरक्षण और पारदर्शी प्रशासन के महत्व को फिर से उजागर करता है।

 

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