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विद्युत कर्मचारियों ने प्रदेशभर में निजीकरण के खिलाफ काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया

विद्युत कर्मचारियों ने प्रदेशभर में निजीकरण के खिलाफ काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारियों ने आज प्रदेशभर में काली पट्टी बांधकर विरोध सभाएं की। यह प्रदर्शन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर हो रहे विवादों के बीच हुआ। आज प्रकाशित टेंडर में निजीकरण के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने की बात ने कर्मचारियों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है।

काली पट्टी अभियान पूरे सप्ताह जारी रहेगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि यह विरोध अभियान पूरे सप्ताह जारी रहेगा। संघर्ष समिति ने टेंडर की प्रक्रिया को निजीकरण की साजिश बताते हुए सरकार और प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

संविदा कर्मियों की छंटनी की निंदा
संघर्ष समिति ने संविदा कर्मियों की छंटनी को लेकर प्रबंधन की निंदा की और कहा कि यह भय का माहौल बनाकर निजीकरण को तेज करने की साजिश है। समिति ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को डराकर निजीकरण के मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

टेंडर नोटिस में साफ लिखा है ‘निजीकरण’
संघर्ष समिति के नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने पहले पीपीपी मॉडल की बात कही थी, लेकिन टेंडर नोटिस में स्पष्ट रूप से निजीकरण लिखा है। समिति ने इसे ऊर्जा क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने और कर्मचारियों में असंतोष बढ़ाने की साजिश करार दिया।

महाकुंभ के दौरान टेंडर नोटिस पर सवाल
संघर्ष समिति ने कहा कि महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन के बीच इस प्रकार का टेंडर जारी करना प्रबंधन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाकुंभ में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे कर्मचारियों का ध्यान भटकाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

कंपनियों की परिसंपत्तियों के मूल्यांकन पर सवाल
संघर्ष समिति ने पूछा कि अरबों रुपये की परिसंपत्तियों और जमीनों का बिना उचित मूल्यांकन किए निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई है। समिति ने यह भी कहा कि बिजली उपभोक्ताओं और किसानों को इस निर्णय से कोई लाभ नहीं होगा।

राजधानी में बड़ी सभाएं
राजधानी लखनऊ में लेसा, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय, पारेषण भवन, एसएलडीसी और शक्ति भवन पर विरोध प्रदर्शन हुए। शक्ति भवन मुख्यालय पर बड़ी सभा का आयोजन हुआ, जिसमें कर्मचारियों ने निजीकरण का पुरजोर विरोध किया।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का बयान
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने आम उपभोक्ताओं और किसानों से भी इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि निजीकरण के प्रयास किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिए जाएंगे।

 

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