चित्रकूट में आदिवासियों के घरों पर वन विभाग का बुलडोजर, न्याय की मांग तेज

CHITRAKOOT/ MANIKPUR. चित्रकूट जिले के ग्राम पंचायत चुरेहकशेरुवा के मजरा भैरमबाबा में वन विभाग द्वारा गरीब आदिवासियों के आशियानों को उजाड़ने की घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया है। बीते 6 जनवरी 2025 को वन विभाग के कर्मचारियों ने अचानक पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे कोल आदिवासियों के घरों को ढहा दिया। इन मकानों का निर्माण छत तक पूरा हो चुका था और यह उन गरीब आदिवासी परिवारों के लिए थे, जो दशकों से कच्चे मकानों में रह रहे थे।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
स्थानीय लोगों और लाभार्थियों ने इस घटना के खिलाफ तहसीलदार मानिकपुर व थाना अध्यक्ष को लिखित शिकायत दी है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह घटनाक्रम सरकार के “हर गरीब को आवास” देने के दावों पर सवाल खड़ा करता है। इस संदर्भ में उपजिलाधिकारी मानिकपुर बताया कि इस समय वह छुट्टी पर हूं, आप वन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
आदिवासी सेना का विरोध

आदिवासी सेना के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एडवोकेट शिवपूजन कोल ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासी समुदाय को न्याय नहीं मिला, तो वे भारी जनसमर्थन के साथ तहसील का घेराव और धरना प्रदर्शन करेंगे।
वन विभाग की कार्रवाई पर विवाद
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग ने 40 साल पहले किए गए परिसीमन का हवाला देकर यह कार्रवाई की। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि उनके मकान अपनी जमीन पर बने थे और वन क्षेत्र उनसे काफी दूर है। इसके बावजूद, वन विभाग ने उनके मकानों को अवैध बताकर तोड़ दिया।
आदिवासियों को धमकी और दहशत
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने घर तोड़ने का विरोध किया, तो वन विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें गालियाँ दीं और जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया। ग्रामीणों को धमकी दी गई कि अगर उन्होंने विरोध किया, तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इससे इलाके में डर का माहौल है।
महिलाओं का दर्द

एक स्थानीय महिला, भोंडी ने भावुक होकर कहा, “हमारे पास तो कोई जमीन नहीं है। अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो हम अपने बच्चों के साथ गांव छोड़ देंगे।”
सरकार की मंशा पर सवाल
यह घटना सरकार की नीतियों और प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन गरीब आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।
क्या मिलेगा आदिवासियों को न्याय?
ब सवाल उठता है कि आदिवासी समुदाय को उनके उजड़े घरों के लिए कब न्याय मिलेगा। सरकार और प्रशासन क्या इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर यह मामला भी अनदेखा कर दिया जाएगा?










