धान की खेती में क्रांति: शामली के ताजपुर सिम्भालका में DSR विधि से लहलहाई बंपर फसल, संयुक्त कृषि निदेशक भी हुए मुरीद!
डिजिटल एक्सक्लूसिव | अवनीश त्यागी TargetTvLive
शामली। घटता भूजल स्तर और आसमान छूती मजदूरी—आज के समय में धान की खेती कर रहे किसानों के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले से कृषि जगत को नई राह दिखाने वाली एक बेहद उम्मीद जगाने वाली तस्वीर सामने आई है। विकासखण्ड शामली के ग्राम ताजपुर सिम्भालका में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा योजना) के तहत संचालित ‘फार्म स्कूल’ में DSR (Direct Seeding of Rice – धान की सीधी बुवाई) विधि से उगाई गई धान की फसल ने न केवल सिंचाई का खर्च आधा कर दिया है, बल्कि पैदावार के नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है।
बुधवार, 23 सितम्बर 2026 को सहारनपुर मण्डल के संयुक्त कृषि निदेशक श्री यशराज सिंह ने प्रशासनिक अमले के साथ खेतों का धरातलीय निरीक्षण किया। लहलहाती फसल और पौधों की जबरदस्त ग्रोथ देखकर अधिकारियों ने भी माना कि यह तकनीक किसानों की आर्थिक स्थिति बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।
पानी की भीषण बचत और लागत में सीधी चपत: जानें DSR का गणित
निरीक्षण के दौरान प्रगतिशील कृषक श्री विरेन्द्र सिंह (पुत्र श्री रामनिवास सिंह) के भाई श्री रविन्द्र कुमार ने संयुक्त कृषि निदेशक को DSR तकनीक के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जहाँ पारंपरिक कद्दू (Puddling) करके रोपाई करने में पानी और लेबर का बेतहाशा खर्च होता था, वहीं सीधी बुवाई तकनीक ने पूरा समीकरण ही बदल दिया है।
- 5 से 6 पानी की सीधी बचत: पारंपरिक रोपाई की तुलना में DSR विधि से खेत में 5-6 बार कम सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है, जिससे डीजल और बिजली का भारी खर्च बचता है।
- उत्पादन लागत में भारी गिरावट: न पौधे उखाड़ने का झंझट, न रोपाई की मजदूरी। बुवाई की लागत में सीधी कमी आई है, जबकि फसल के उत्पादन और दाने की गुणवत्ता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा।
- समय पर मार्गदर्शन: कृषक परिवार ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी समय-समय पर प्रशिक्षण देकर हर कदम पर तकनीकी मार्गदर्शन कर रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट: 16 से 20 कल्लों की भरमार, 10-15 दिन में शुरू होगी कटाई
संयुक्त कृषि निदेशक एवं विषय वस्तु विशेषज्ञों की टीम ने जब खेतों में उतरकर फसल की बारीकी से जांच की, तो परिणाम बेहद उत्साहजनक मिले:
- शून्य खरपतवार: सही प्रबंधन और देखरेख के कारण फसल में खरपतवार (Weeds) का नामोनिशान नहीं है।
- शानदार फुटाव (Tillering): प्रत्येक पौधे में 16 से 20 कल्ले पाए गए, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि बाली में दानों का भराव बेहद मजबूत होगा।
- उच्च पैदावार वाली किस्म: फार्म स्कूल के BTM विशाल कुमार ने अवगत कराया कि विभाग की ओर से किसान को उन्नत धान बीज PB 1692 एवं अन्य इनपुट उपलब्ध कराए गए थे।
- कटाई की तैयारी: फसल पूरी तरह से पककर तैयार होने की कगार पर है और आगामी 10 से 15 दिनों के भीतर कटाई का काम शुरू कर दिया जाएगा।
निरीक्षण स्थल पर मौजूद रहा विभागीय अमला
ग्राम ताजपुर सिम्भालका में आयोजित इस निरीक्षण के दौरान कृषि विभाग और आत्मा योजना के उच्चाधिकारियों एवं कर्मचारियों की मौजूदगी रही:
- श्री यशराज सिंह (संयुक्त कृषि निदेशक, सहारनपुर मण्डल)
- प्रमोद कुमार (उप कृषि निदेशक)
- प्रदीप कुमार यादव (जिला कृषि अधिकारी)
- विपिन सैनी (विषय वस्तु विशेषज्ञ, कार्या० संयुक्त कृषि निदेशक)
- कपिल कुमार (सहायक विकास अधिकारी, कृषि)
- विशाल कुमार (BTM, आत्मा योजना)
- यशपाल सिंह (ATM)
- हरेन्द्र कुमार (ATM)
- श्री रविन्द्र कुमार (प्रगतिशील कृषक के भाई एवं फार्म स्कूल सहभागी)
TargetTvLive का संपादकीय नजरिया
शामली के ताजपुर सिम्भालका में ‘फार्म स्कूल’ का यह सफल प्रयोग साबित करता है कि अगर सरकारी योजनाओं का सही लाभ और सही तकनीक किसानों तक पहुंचे, तो कम लागत में भी बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है। भूजल संरक्षण (Water Conservation) के इस मॉडल को अगर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, तो यह न केवल पर्यावरण बल्कि किसानों की जेब के लिए भी एक क्रांतिकारी कदम होगा।
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