बिजनौर राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ा रिकॉर्ड: 75,530 वादों का निस्तारण, 11.77 करोड़ समझौता राशि, 11.91 लाख जुर्माना वसूला
जानिए किस कोर्ट में कितने केस निपटा दिए गए
बिजनौर | Target TV Live | अवनीश त्यागी
बिजनौर की अदालतों में शनिवार का दिन इतिहास बन गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में एक ही दिन में 75,530 मुकदमे निपटा दिए गए। 11 लाख 91 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया और पक्षों के बीच 11 करोड़ 77 लाख रुपये का समझौता कराया गया।
सुबह जनपद न्यायालय परिसर में जनपद न्यायाधीश संजय कुमार सप्तम ने दीप जलाकर लोक अदालत की शुरुआत की। उनके साथ परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश सुधीर कुमार, MACT के ज्ञान प्रकाश सिंह, स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष किरन बाला, ADJ प्रशांत मित्तल, नोडल अधिकारी लोकेश नागर, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और बड़ी संख्या में वकील मौजूद रहे।
जनपद न्यायाधीश ने सभी जजों और वकीलों से कहा — “मौके का फायदा उठाइए, ज्यादा से ज्यादा केस निपटाइए।” इसके बाद उन्होंने बैंकों के स्टॉलों का भी जायजा लिया।
किस कोर्ट में कितने केस निपटे — पूरा हिसाब
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव स्वाति चंद्रा ने बताया कि इस बार आंकड़ा रिकॉर्ड तोड़ रहा।
बड़े समझौते वाले कोर्ट:
MACT (ज्ञान प्रकाश सिंह): 35 केस में 3 करोड़ 15 लाख का समझौता
NI एक्ट 138 (सुंदर लाल): 34 केस में 1 करोड़ 08 लाख का समझौता
स्थायी लोक अदालत (किरन बाला): 3 केस में 2.52 लाख का समझौता
परिवार न्यायालय (सुधीर कुमार): 78 में से 36 केस निपटे
सबसे ज्यादा केस निपटाने वाले कोर्ट:
CJM प्रीति चौधरी: 3,420 केस, 4.46 लाख जुर्माना
ACJM नरेंद्र कुमार: 2,668 केस, 68,700 जुर्माना
सिविल जज नजीबाबाद (अरुण सिंह राठौर): 1,251 केस
शांतनु त्यागी: 1,305 केस
अजय कुमार: 1,115 केस
नैंसी धुन्ना: 1,097 केस
आशीष थिरानिया: 805 केस, मयंक कुमार: 782 केस
ADJ कोर्ट:
लोकेश नागर (EC एक्ट): सबसे ज्यादा 589 केस अकेले निपटाए
प्रशांत मित्तल: 16, शहजाद अली: 14, सीमा वर्मा: 13, कल्पना पांडे: 10 केस
कोर्ट पहुंचने से पहले ही 57 हजार झगड़े खत्म!
सबसे बड़ी बात — प्री-लिटिगेशन में 57,203 मामले अदालत पहुंचने से पहले ही सुलझा लिए गए। इनमें 7 करोड़ 42 लाख रुपये का समझौता हुआ। यानी हजारों लोगों को कचहरी के चक्कर ही नहीं लगाने पड़े।
क्यों खास है ये लोक अदालत?
सीधी भाषा में कहें तो लोक अदालत का मतलब है — झगड़ा खत्म, पैसा वसूल, केस बंद। न अपील का झंझट, न सालों की तारीख। बिजनौर में इस बार छोटे चालान से लेकर करोड़ों के दुर्घटना मुआवजे तक, सब एक ही दिन में निपट गए। यही वजह है कि आम आदमी के लिए लोक अदालत सबसे तेज इंसाफ का दरवाजा बनती जा रही है।













