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“11 सितंबर को शिकागो दहल उठा था..” : बिजनौर में गूंजा विवेकानंद का शंखनाद, छात्रों ने लिया स्वदेशी का महासंकल्प
बिजनौर। अवनीश त्यागी | Target TV Live
तारीख 11 सितंबर… दुनिया इस तारीख को एक और घटना के लिए जानती है, लेकिन भारत के लिए यह तारीख गौरव का स्वर्णिम अध्याय है। आज से ठीक 133 साल पहले सुदूर अमेरिका के शिकागो शहर में एक 30 वर्षीय युवा संन्यासी ने “Sisters and Brothers of America” कहकर पूरे विश्व धर्म सम्मेलन को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया था। वह थे स्वामी विवेकानंद।
उसी ऐतिहासिक गूंज को मॉडर्न जरा पब्लिक स्कूल में फिर से जीवंत कर दिया विवेकानंद दिव्य भारती उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष योगेंद्र पाल सिंह योगी ने। स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन में छात्रों के हुजूम को संबोधित करते हुए योगी दहाड़ उठे –
“विवेकानंद जी के विचार कोई इतिहास की किताब नहीं, आज की सबसे बड़ी जरूरत हैं। उन्होंने उस दिन भारत की सनातन आध्यात्मिक शक्ति को विश्व के शीर्ष पटल पर लाकर खड़ा कर दिया था, आज उसी शक्ति को आर्थिक महाशक्ति में बदलने की जिम्मेदारी तुम युवाओं के कंधों पर है।”
योगी का ‘पंच-प्रहार’: विवेकानंद से 2026 का कनेक्शन
योगी ने भाषण नहीं, युवाओं की नसों में बिजली दौड़ा दी। उन्होंने स्वामी जी के जीवन को 5 धारदार बिंदुओं में समेटा:
1. नारी शिक्षा – राष्ट्र की नींव: जिस समाज में नारी शिक्षित नहीं, वह कभी विश्वगुरु नहीं बन सकता। विवेकानंद का यह मंत्र आज भी उतना ही प्रहारक है।
2. स्वदेशी – आर्थिक ब्रह्मास्त्र: गुलामी के दौर में स्वदेशी की अलख जगाने वाले विवेकानंद ही आज के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के असली प्रणेता हैं।
3. वंचित का उत्थान – सच्चा धर्म: मंदिर-मस्जिद से ऊपर उठकर गरीब, वंचित, शोषित की सेवा ही सबसे बड़ा कर्मयोग है।
4. चार योगों का महाविज्ञान: कर्मयोग से हाथ, भक्तियोग से हृदय, ज्ञानयोग से मस्तिष्क और राजयोग से आत्मा को साधो – सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी।
5. युवा शक्ति – करोड़ों की प्रेरणा: आज भी करोड़ों युवा उनके “उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत” से अपनी जिंदगी बदल रहे हैं।
मंच से शपथ तक: कैसे बदला माहौल?
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानाचार्या श्रीमती विश्वास ने आयोजन की पृष्ठभूमि रखी। लेकिन असली आग लगाई स्वदेशी जागरण मंच के नेताओं ने।
सुधीर अग्रवाल ने आंकड़ों के साथ समझाया – “एक छोटा उद्यमी जब फैक्ट्री लगाता है, तो वह सिर्फ अपना घर नहीं चलाता, वह दर्जनों घरों के चूल्हे जलाता है। उद्यमिता ही भारत के विकास का इंजन है।”
उनके बाद राजेश अरोड़ा ने छात्रों से सीधा संवाद किया और ललकारा – “जेब में विदेशी फोन, हाथ में विदेशी ब्रांड… कब तक? आज से प्रण लो, स्वदेशी वस्तु ही अपनाओगे।”
और फिर वह पल आया जब पूरा हॉल गूंज उठा। कार्यक्रम के अंत में सैकड़ों विद्यार्थियों ने एक स्वर में स्वदेशी अपनाने की शपथ ली।
Target TV Live विश्लेषण: भाषण नहीं, ब्लूप्रिंट था यह
यह कोई सामान्य स्कूल फंक्शन नहीं था। यह एक सोची-समझी रणनीति थी – आध्यात्मिक राष्ट्रवाद को आर्थिक राष्ट्रवाद से जोड़ने की। एक तरफ शिकागो दिवस की भावनात्मक अपील, दूसरी तरफ उद्यमिता का व्यावहारिक ज्ञान। संदेश एकदम साफ है: बिजनौर का युवा अब नौकरी के लिए भटकेगा नहीं, वह स्वदेशी के मंत्र के साथ रोजगार का सृजनकर्ता बनेगा। विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता इसी में है कि वे हर युग में युवाओं को नई राह दिखाते हैं।













1 thought on ““आज के ही दिन शिकागो दहल उठा था..” : बिजनौर में गूंजा विवेकानंद का शंखनाद, छात्रों ने लिया स्वदेशी का महासंकल्प”
बहुत ही सारगर्भित व जीवन्त लेखनी