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खुद जलकर रोशनी देता है गुरु! मवाना में बोले पद्मश्री – मिट्टी से घड़ा बनाता है शिक्षक

खुद जलकर रोशनी देता है गुरु! मवाना में बोले पद्मश्रीमिट्टी से घड़ा बनाता है शिक्षक

मेरठ के मवाना में शिक्षक दिवस पर बड़ा सम्मान समारोह। पद्मश्री शीशपाल ने कहा- शिक्षक तेल की बाती है। 17 शिक्षिकाओं को तुलसी का पौधा देकर किया सम्मानित। देखिए TargetTvLive की ग्राउंड रिपोर्ट।

गुरुओं का सम्मान ही भारत के गौरव का सम्मान है – मवाना में गूंजा गुरु-गीता का मंत्र
मेरठ/मवाना (TargetTvLive):
राष्ट्र का चारित्रिक और सांस्कृतिक विकास अगर किसी एक स्तंभ पर टिका है तो वह है – गुरु।

शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर मेरठ से महज 20 किमी दूर मवाना-मेरठ रोड स्थित मदर इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहां गुरु-शिष्य परंपरा की आत्मा जीवंत हो उठी। सोशल मीडिया संगठन द्वारा आयोजित इस दिव्य सम्मान समारोह में वो बात कही गई जो हर भारतीय के दिल को छू गई।
“शिक्षक तेल की बाती के समान है। खुद जलता है, तब जाकर दूसरों के जीवन में रोशनी करता है। अपने शिष्य को ऊंचाई पर देखकर उसे जो परम आनंद मिलता है, उसकी कल्पना भी कोई दूसरा नहीं कर सकता।”
यह मार्मिक उद्गार समारोह में मुख्य अतिथियों के मुख से निकले, जिसने पूरे सभागार को भावुक कर दिया।

TargetTvLive का विश्लेषण: क्यों खास था ये सम्मान समारोह?

आमतौर पर शिक्षक दिवस पर गुलदस्ते दिए जाते हैं, लेकिन मवाना में इस बार परंपरा और पर्यावरण का अद्भुत संगम देखने को मिला।

1. सम्मान का अनोखा अंदाज – तुलसी वाला सम्मान: यहां 17 शिक्षिकाओं को केवल शॉल और श्रीफल देकर औपचारिकता नहीं निभाई गई। उन्हें सोल, दुपट्टा, पगड़ी पहनाकर और तुलसी जी का पौधा देकर सम्मानित किया गया। संदेश साफ था – गुरु का सम्मान भारतीय संस्कृति और प्रकृति के सम्मान के साथ।

2. मंच से गूंजा – गुरु साक्षात परब्रह्म: कार्यक्रम की शुरुआत स्कंद पुराण के उत्तराखंड में वर्णित गुरु गीता के महामंत्र ‘गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर:। गुरु: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम:।।’ से हुई। वक्ताओं ने दो टूक कहा – मां बच्चे की पहली गुरु है, लेकिन उसे भारत का नागरिक, वैज्ञानिक और अफसर बनाने वाला असली शिल्पकार केवल और केवल शिक्षक ही है।

3. शिक्षक कुम्हार है, छात्र गीली मिट्टी – सबसे धारदार उपमा: वक्ताओं ने शिक्षक की तुलना कुम्हार से कर समारोह को यादगार बना दिया।
“कुम्हार जैसे गीली मिट्टी को बार-बार पीट कर, ठोक-पीट कर उसकी सारी कमियां निकाल कर एक सुंदर घड़े में बदल देता है और तब उसे संतुष्टि मिलती है, ठीक वैसे ही एक शिक्षक अपने छात्र को तराशता है। उसके अंदर ज्ञान और संस्कार भरकर जब उसे सफलता की ऊंचाई पर देखता है, तो उसे जो संतुष्टि मिलती है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।”

विश्लेषकों ने कहा कि यही शिक्षक है जो अज्ञानता के अंधकार को चीर कर प्रकाश पुंज का उदय करता है और देश में समरसता व भाईचारे की भावना को पल्लवित करता है।

सोशल मीडिया – कलयुग का नया गुरु?

समारोह में एक बड़ी और आधुनिक बात भी उठी जिसने सबका ध्यान खींचा। वक्ताओं ने कहा कि आज सोशल मीडिया भी एक शिक्षक बन गया है जो सेकंडों में हर ज्ञान परोस रहा है। ऐसे में असली गुरु की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह छात्र को सही और गलत ज्ञान में फर्क करना सिखाए।

कौन-कौन रहा मौजूद?

इस गरिमामय समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री श्री शीशपाल ने की। मंच का संचालन रवि कुमार बिश्नोई और सुरेंद्र कुमार शर्मा ने किया।

मंच से डॉ. एम.के. बंसल, चौधरी यशपाल सिंह, कोमल सिंह, श्रीमती प्रिया रस्तोगी, मौलाना शाहीन जमाली, चतुर्वेदी, रवि कुमार बिश्नोई, सुरेंद्र शर्मा ने अपने ओजस्वी विचार रखे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय की अध्यक्ष श्रीमती सरबजीत सिंह घुम्मन ने किया।

ये बनीं सम्मान की हकदार

मदर इंटरनेशनल की जिन 17 शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया, उनमें प्रमुख रूप से श्रीमती राजकुमारी, अतिथि शर्मा, अंशुल शर्मा, रीना कुमारी, अनामिका कुमारी, स्वाति कुमारी, राकेश्वरी कुमारी, जोहा कुमारी, निधि कुमारी, वैशाली शर्मा, कुमारी माधुरी, श्रीमती सरिता एवं कुमारी खुशी शामिल रहीं।

विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती प्रियंका सिंह और अध्यक्ष श्रीमती सरबजीत सिंह घुम्मन को भी उनके कुशल नेतृत्व के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसी दौरान डॉ. एम.के. बंसल को भी उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समां बांध दिया।

निष्कर्ष: मवाना का यह समारोह सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था, यह इस बात का उद्घोष था कि भारत को विश्वगुरु बनना है तो पहले अपने गुरुओं को सम्मान देना सीखना होगा।

हर खबर सबसे पहले – देखते रहिए TargetTvLive | रिपोर्ट – अवनीश त्यागी

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