बिजनौर में मनरेगा कार्मिकों के मानदेय और EPF पर घमासान, महीनों से भुगतान का इंतजार; 85 माह की EPF राशि पर उठे गंभीर सवाल
करोड़ों की धनराशि के बीच कर्मचारियों के भुगतान में देरी क्यों? EPFO की कार्रवाई के बाद बढ़ी चिंता, BDO और लेखाकारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में
By अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर।
बिजनौर में ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण योजना मनरेगा को जमीन पर लागू करने वाले कार्मिकों के सामने भुगतान का संकट खड़ा होने की शिकायत सामने आई है। ग्राम रोजगार सेवकों समेत मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों ने कई महीनों से मानदेय लंबित होने और लंबे समय से EPF की राशि UAN खातों में जमा नहीं होने का मुद्दा उठाया है। मामला अब केवल कर्मचारियों के मानदेय तक सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
उपलब्ध दस्तावेजों में 85 माह के EPF से संबंधित प्रकरण और ₹1,28,92,275 की ब्याज, क्षतिपूर्ति एवं दंड संबंधी राशि का उल्लेख है। ऐसे में कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है कि उनकी भविष्य निधि की राशि आखिर इतने लंबे समय तक उनके खातों में क्यों नहीं पहुंची।
महीनों से मानदेय नहीं मिलने का दावा
मनरेगा कार्मिकों का कहना है कि जिले के विभिन्न विकासखंडों में कई कर्मचारियों को 8 से 10 माह तक मानदेय नहीं मिला है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारियों के परिवारों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी होने का दावा किया गया है।
कर्मचारियों के अनुसार वे मनरेगा से जुड़े प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्यों को लगातार पूरा कर रहे हैं, लेकिन मानदेय के लिए उन्हें लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है—जब काम लगातार लिया जा रहा है तो भुगतान में इतनी लंबी देरी क्यों?
85 माह के EPF ने बढ़ाई चिंता
मामले का सबसे गंभीर पक्ष EPF से जुड़ा है। शिकायतों के अनुसार 85 माह की EPF राशि कर्मचारियों के UAN खातों में जमा नहीं होने का मुद्दा उठाया गया है।
उपलब्ध दस्तावेजों में EPF से जुड़े मामले में ₹1,28,92,275 की ब्याज, क्षतिपूर्ति एवं दंड संबंधी राशि का उल्लेख है।
EPF कर्मचारी के भविष्य की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इतनी लंबी अवधि तक राशि जमा नहीं होने का आरोप सामान्य भुगतान देरी से कहीं अधिक गंभीर विषय है।
अब यह जांच का विषय है कि राशि किस स्तर पर लंबित रही और देरी की वास्तविक वजह क्या थी।
करोड़ों की राशि के बीच भुगतान पर सवाल
TargetTvLive को उपलब्ध दस्तावेजों में विभिन्न विकासखंडों के प्रशासनिक और सामग्री मद की धनराशि का विवरण दिया गया है। दस्तावेज के अनुसार प्रशासनिक मद में कुल ₹2,13,89,862 और सामग्री मद में ₹76,82,193 की राशि दर्शाई गई है।
यही आंकड़े पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना देते हैं।
यदि संबंधित मदों में धनराशि उपलब्ध थी, तो कर्मचारियों के मानदेय और EPF भुगतान में इतनी देरी क्यों हुई?
क्या भुगतान प्रक्रिया में प्रशासनिक अड़चन थी?
क्या बजट के उपयोग को लेकर कोई समस्या रही?
या फिर किसी स्तर पर लापरवाही हुई?
इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
हल्दौर को लेकर भी गंभीर शिकायत
ग्राम रोजगार सेवक संघ की ओर से अधिकारियों को दिए गए शिकायती पत्र में हल्दौर विकासखंड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रशासनिक मद की राशि का उपयोग रोजगार सेवकों के मानदेय के बजाय वाहन किराया, पैदल भत्ता, स्टेशनरी और पेट्रोल आदि मदों में किया गया।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार इस मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी, लेकिन जांच रिपोर्ट के निस्तारण को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
हालांकि, ये शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनकी पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही मानी जा सकती है।
ID-पासवर्ड और संसाधनों की कमी का भी आरोप
मनरेगा कार्मिकों ने कामकाज से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी उठाई हैं। शिकायत में अतिरिक्त पंचायतों की आईडी और पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराने तथा आवश्यक संसाधनों की कमी का उल्लेख किया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि उनसे काम की अपेक्षा की जाती है, लेकिन कार्य निष्पादन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कर्मचारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
लंबे समय से मानदेय और EPF का मुद्दा लंबित रहने से नाराज कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे भूख हड़ताल और अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
ऐसे में यदि मामला जल्द नहीं सुलझता तो इसका असर मनरेगा के जमीनी कामकाज पर भी पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
विश्लेषण: मामला सिर्फ मानदेय का नहीं, जवाबदेही का भी
मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास कार्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। इसकी सफलता काफी हद तक उन कार्मिकों पर निर्भर करती है जो गांव स्तर पर योजना के कार्यों को संचालित करते हैं।
ऐसे में यदि वही कर्मचारी लंबे समय तक अपने मानदेय के लिए इंतजार करते हैं और EPF जैसी सामाजिक सुरक्षा राशि भी समय पर UAN खातों में जमा नहीं होने की शिकायत करते हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
हालांकि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को केवल शिकायत के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। दस्तावेजों की जांच, भुगतान रिकॉर्ड, EPF जमा होने की स्थिति और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल के बाद ही वास्तविक जिम्मेदारी तय हो सकती है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल
मनरेगा कार्मिकों का लंबित मानदेय कब मिलेगा?
85 माह की EPF राशि का वास्तविक स्टेटस क्या है?
₹1.28 करोड़ से अधिक की ब्याज/क्षतिपूर्ति एवं दंड संबंधी देनदारी आखिर क्यों बनी?
और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
इन सवालों के जवाब इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने लाएंगे।
TargetTvLive का सवाल
जिस व्यवस्था से गांवों में रोजगार पहुंचाने का दावा किया जाता है, उसी व्यवस्था के कर्मचारी महीनों तक अपने मानदेय और भविष्य निधि के लिए इंतजार करें—तो जवाबदेही आखिर किसकी होगी?
अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित विभाग के रिकॉर्ड पर हैं। यदि शिकायतों की जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान में देरी का कारण क्या था, EPF की स्थिति क्या है और कथित अनियमितताओं में किसकी भूमिका रही।
TargetTvLive इस मामले से जुड़े दस्तावेजों, प्रशासनिक कार्रवाई और कर्मचारियों के भुगतान की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।












