बिजनौर में लेखपालों का बड़ा ऐलान: तीन आरोपितों की गिरफ्तारी तक नहीं चलेगा काम, तहसील में अनिश्चितकालीन धरना
बिजनौर | TargetTvLive | अवनीश त्यागी
बिजनौर की सदर तहसील में एक लेखपाल के साथ कथित मारपीट और तमंचे से धमकाने का मामला अब प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। 20 अगस्त की घटना में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद तीन आरोपितों की गिरफ्तारी न होने पर लेखपालों ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को सदर तहसील के लेखपालों ने कार्य बहिष्कार कर तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
लेखपाल संघ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी—तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी होने तक न काम होगा और न आंदोलन खत्म होगा।
मारपीट से शुरू हुआ विवाद, अब आंदोलन तक पहुंचा मामला
लेखपाल संघ के अनुसार 20 अगस्त को सदर तहसील में तैनात लेखपाल सनातन ब्रह्म के साथ कुछ लोगों ने कथित रूप से मारपीट की। आरोप यह भी है कि इस दौरान उनकी कनपटी पर तमंचा लगाकर उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया।
घटना के बाद संपूर्ण लेखपाल संघ की ओर से थाना कोतवाली शहर बिजनौर में अभियोग दर्ज कराया गया। लेकिन करीब एक सप्ताह बाद भी तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने पर लेखपालों का आक्रोश बढ़ता गया और मामला धरने तक पहुंच गया।
‘गिरफ्तारी तक डटे रहेंगे’—विनेश कुमार
आंदोलन को लेकर लेखपाल संघ ने अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है। मुरादाबाद मंडल के खंड मंत्री विनेश कुमार ने कहा कि जब तक आरोपित तीनों व्यक्तियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक लेखपाल कार्य बहिष्कार और अनिश्चितकालीन धरने पर डटे रहेंगे।
इस बयान के बाद साफ है कि लेखपाल संघ फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है। आंदोलन की अवधि बढ़ने पर तहसील के राजस्व कार्यों पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है।
प्रशासन की ओर से भी बड़ा कदम
इस बीच प्रशासन की ओर से मामले में कार्रवाई की जानकारी दी गई है। उपजिलाधिकारी स्मृति मिश्रा (IAS)ने बताया कि आरोपी के शस्त्र लाइसेंस के निरस्तीकरण के लिए रिपोर्ट भेज दी गई है।
यानी मामला अब केवल गिरफ्तारी की मांग तक सीमित नहीं रहा है। प्रशासन की कार्रवाई में आरोपी के शस्त्र लाइसेंस को लेकर भी कदम उठाया गया है। हालांकि, लेखपाल संघ की मुख्य मांग अभी भी तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी है।
सवाल सिर्फ एक लेखपाल का नहीं, पूरी व्यवस्था की सुरक्षा का
इस घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यह है कि मामला एक कर्मचारी के साथ कथित मारपीट से आगे बढ़कर सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और दबावमुक्त कार्यप्रणाली का मुद्दा बन गया है।
लेखपाल राजस्व प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण जमीनी कड़ी माने जाते हैं। गांवों और तहसीलों में भूमि संबंधी मामलों, सत्यापन और विभिन्न राजस्व कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में यदि कर्मचारी स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं तो इसका असर सरकारी कामकाज पर भी पड़ सकता है।
लेखपाल संघ का तर्क है कि यदि कथित रूप से हथियार के बल पर सरकारी कर्मचारी को धमकाने के मामले में तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं होती तो इससे कर्मचारियों में गलत संदेश जा सकता है।
कार्य बहिष्कार का असर आम जनता पर भी
लेखपालों के सामूहिक कार्य बहिष्कार से सदर तहसील के राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने की आशंका है। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों की है जो भूमि, प्रमाणपत्र, सत्यापन अथवा अन्य राजस्व कार्यों के लिए तहसील पर निर्भर हैं।
यही वजह है कि अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ आंदोलनरत लेखपालों को संतुष्ट करना और दूसरी तरफ तहसील के कामकाज को सामान्य बनाए रखना।
अब पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी कब होगी? लेखपाल संघ ने अपना रुख साफ कर दिया है कि गिरफ्तारी से पहले आंदोलन समाप्त करने के संकेत नहीं हैं।
प्रशासन ने शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण के लिए रिपोर्ट भेजने की बात कही है, लेकिन लेखपाल संघ के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा गिरफ्तारी है।
अब देखना यह है कि पुलिस की अगली कार्रवाई क्या होती है और क्या वह लेखपालों के अनिश्चितकालीन धरने को समाप्त कराने में सफल होती है।
फिलहाल संदेश साफ है
मुकदमा दर्ज हो चुका है, शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण की रिपोर्ट भेजी जा चुकी है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसी बिंदु पर लेखपालों का आंदोलन अटका है।
तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी तक कार्य बहिष्कार और धरना जारी रखने के ऐलान ने प्रशासन पर कार्रवाई तेज करने का दबाव बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
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