शामली में कृषि यंत्रीकरण की ई-लॉटरी सम्पन्न: किसान ड्रोन से सुपर सीडर तक, आधुनिक खेती के लिए अनुदान का रास्ता साफ

शामली। संवाददाता | अवनीश त्यागी, TargetTvLive
खेती के पुराने तौर-तरीकों को तकनीक से बदलने की तैयारी, ई-लॉटरी से किसानों का चयन; मशीनरी पर मिलेगा अनुदान
शामली में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने और खेती की लागत कम करने की दिशा में गुरुवार को अहम पहल हुई। विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के तहत कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए किसानों का ई-लॉटरी के माध्यम से चयन किया गया। जिला स्तरीय समिति की मौजूदगी में पूरी हुई इस प्रक्रिया से ऑनलाइन आवेदन करने वाले किसानों में से लाभार्थियों के चयन का रास्ता साफ हुआ।
पारदर्शी प्रक्रिया से हुआ लाभार्थियों का चयन
कृषि विभाग द्वारा संचालित सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन तथा प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू योजनाओं के तहत कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए किसानों से ऑनलाइन बुकिंग कराई गई थी।
इन्हीं ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले लाभार्थियों का चयन जिला स्तरीय समिति के समक्ष ई-लॉटरी के माध्यम से किया गया। ई-लॉटरी व्यवस्था का मकसद चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है, ताकि पात्र किसानों को योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा सके।
ड्रोन से लेकर सुपर सीडर तक, तकनीक का बढ़ेगा दायरा
इस बार कृषि यंत्रीकरण की योजना में पारंपरिक उपकरणों के साथ आधुनिक तकनीक से जुड़े कृषि यंत्र भी शामिल हैं। इनमें कस्टम हायरिंग सेंटर, किसान ड्रोन, सुपर सीडर, बेलर, क्रॉप रीपर, हैप्पी सीडर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, हैरो, लेजर लैंड लेवलर, पावर टीलर, फार्म मशीनरी बैंक, शुगरकेन पावर वीडर और चॉप कटर प्रमुख हैं।
इन मशीनों का उद्देश्य खेती के अलग-अलग चरणों में किसानों की मेहनत और समय को कम करना तथा कृषि कार्यों को अधिक कुशल बनाना है।
फसल अवशेष प्रबंधन पर भी फोकस
कृषि यंत्रीकरण की इस पहल में फसल अवशेष प्रबंधन को विशेष महत्व दिया गया है। सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और बेलर जैसे कृषि यंत्र खेतों में फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन में मददगार हो सकते हैं।
विशेष रूप से इन-सीटू क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट से जुड़ी मशीनरी का इस्तेमाल पराली और अन्य फसल अवशेषों को खेत में ही बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में सहायक हो सकता है। इससे किसानों को अवशेषों के निस्तारण के लिए अतिरिक्त खर्च और श्रम से भी राहत मिल सकती है।
छोटे किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर अहम
कृषि मशीनरी की कीमत अधिक होने के कारण छोटे और सीमांत किसानों के लिए आधुनिक कृषि यंत्र खरीदना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक की व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इनके माध्यम से किसान आवश्यकता के अनुसार कृषि यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं और उन्हें हर मशीन खरीदने पर बड़ी पूंजी निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विश्लेषण: असली चुनौती अब ई-लॉटरी के बाद
ई-लॉटरी के माध्यम से चयन निश्चित रूप से पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन योजना की वास्तविक सफलता का पैमाना अब चयनित किसानों तक समय पर अनुदान और कृषि यंत्र पहुंचना होगा।
जरूरत इस बात की है कि चयन के बाद की प्रक्रिया भी उतनी ही पारदर्शी और समयबद्ध रहे। किसानों को मशीनों के उपयोग, रखरखाव और उपलब्ध योजनाओं की जानकारी भी दी जाए, ताकि सरकारी अनुदान सिर्फ कागजी प्रक्रिया बनकर न रह जाए बल्कि उसका सीधा असर खेत और किसान की आय पर दिखाई दे।
खेती की तस्वीर बदल सकती है तकनीक
बढ़ती कृषि लागत, मजदूरों की कमी और खेती के बदलते स्वरूप के बीच कृषि यंत्रीकरण अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बनता जा रहा है। यदि आधुनिक मशीनरी छोटे और सीमांत किसानों तक भी सुलभ होती है, तो इससे खेती में समय की बचत, श्रम लागत में कमी और कृषि कार्यों की दक्षता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
शामली में हुई ई-लॉटरी इसी बदलाव की एक कड़ी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि ई-लॉटरी में चयनित किसानों को कृषि यंत्रों का लाभ कितनी तेजी और पारदर्शिता से मिलता है।
TargetTvLive के लिए अनुराग की रिपोर्ट।












