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गन्ना किसानों का अल्टीमेटम: 20 अगस्त को बिजनौर में होगा बड़ा फैसला, नहीं मानीं मांगें तो धरना

बिजनौर में गन्ना किसानों का शक्ति प्रदर्शन: 20 अगस्त को डीसीओ कार्यालय पर महापंचायत, मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन

₹500 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य, बकाया भुगतान, घटतौली और प्रदूषण पर भाकियू लोकशक्ति का बड़ा अल्टीमेटम; प्रशासन और चीनी मिलों के लिए 20 अगस्त बनेगी अग्निपरीक्षा

अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर, 18 अगस्त 2026।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गन्ना किसानों का धैर्य अब जवाब देता दिखाई दे रहा है। वर्षों से बकाया भुगतान, घटतौली, बढ़ती लागत, औद्योगिक प्रदूषण और ओवरलोड वाहनों की समस्याओं से जूझ रहे किसानों ने अब सीधे संघर्ष का रास्ता चुनने के संकेत दिए हैं। भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने 20 अगस्त को जिला गन्ना अधिकारी (डीसीओ) कार्यालय बिजनौर पर महापंचायत बुलाकर प्रशासन और चीनी मिल प्रबंधन के सामने जवाबदेही तय करने का ऐलान कर दिया है।

संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 20 अगस्त से ही डीसीओ कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।

यह सिर्फ एक पंचायत नहीं, बल्कि गन्ना किसानों की उन वर्षों पुरानी समस्याओं पर निर्णायक लड़ाई का संकेत है, जिनका समाधान आज तक अधूरा रहा है।

ज्ञापन से आंदोलन तक: किसानों ने तेज की रणनीति

भाकियू लोकशक्ति के जिलाध्यक्ष चौ. वीर सिंह सहरावत के नेतृत्व में किसान नेताओं ने मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

लेकिन इस बार किसान संगठन का रुख पहले से अलग दिखाई दे रहा है। केवल ज्ञापन सौंपने या आश्वासन लेने के बजाय संगठन ने साफ कर दिया है कि अब चीनी मिलों के जिम्मेदार अधिकारियों को किसानों के बीच आकर जवाब देना होगा।

यही कारण है कि संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि जिले की सभी चीनी मिलों के जीएम अथवा सक्षम अधिकारी 20 अगस्त की पंचायत में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें।

सबसे बड़ा सवाल: गन्ना भुगतान कब मिलेगा?

गन्ना किसानों की सबसे बड़ी पीड़ा आज भी बकाया भुगतान है। भाकियू लोकशक्ति ने बिलाई शुगर मिल सहित उन सभी चीनी मिलों का मुद्दा उठाया है, जहां किसानों का भुगतान लंबित है।

गन्ना भुगतान में देरी केवल एक वित्तीय समस्या नहीं, बल्कि किसान की पूरी आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला मुद्दा है। खाद, बीज, सिंचाई, मजदूरी, कृषि यंत्रों का खर्च और पारिवारिक जरूरतें—सब कुछ समय पर भुगतान पर निर्भर करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान में लगातार देरी होती है तो इसका असर आगामी फसल चक्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।

₹500 प्रति क्विंटल की मांग ने बढ़ाया दबाव

भाकियू लोकशक्ति ने आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग रखी है।

संगठन का तर्क है कि डीजल, खाद, कीटनाशक, बिजली, मजदूरी और सिंचाई की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में यदि किसानों को लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिला, तो गन्ने की खेती की लाभप्रदता प्रभावित होगी।

यह मांग आने वाले समय में गन्ना मूल्य निर्धारण की बहस को भी नई दिशा दे सकती है।

घटतौली पर जीरो टॉलरेंस की मांग

किसान संगठन ने आगामी पेराई सत्र में घटतौली पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की है।

किसानों का कहना है कि तौल प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई हो। पंचायत में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है।

प्रदूषण: खेती और स्वास्थ्य दोनों पर संकट

भाकियू लोकशक्ति ने चीनी मिलों और बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी और धुएं पर भी सवाल उठाए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से यह शिकायत रही है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट जल खेती और भूजल को प्रभावित करता है। वहीं धुएं और प्रदूषण का असर जनस्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

किसानों ने मांग की है कि प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ओवरलोड वाहनों पर भी उठी आवाज

गन्ने से लदे ओवरहाइट और ओवरलोड वाहन भी किसानों के एजेंडे में शामिल हैं। पेराई सत्र के दौरान ऐसे वाहनों की संख्या बढ़ने से सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

संगठन चाहता है कि आगामी सत्र से पहले इस पर स्पष्ट और प्रभावी नीति लागू की जाए।

20 अगस्त: पंचायत या आंदोलन की शुरुआत?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 20 अगस्त की पंचायत समाधान का रास्ता खोलेगी या फिर यह एक बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत साबित होगी?

यदि प्रशासन और चीनी मिल प्रबंधन किसानों की मांगों पर समयबद्ध और ठोस आश्वासन देते हैं, तो स्थिति सामान्य हो सकती है। लेकिन यदि किसानों को केवल औपचारिक आश्वासन मिला, तो भाकियू लोकशक्ति की चेतावनी के अनुसार आंदोलन लंबा और व्यापक रूप ले सकता है।

किसानों की पांच प्रमुख मांगें

सभी बकाया गन्ना भुगतान का तत्काल निस्तारण।
गन्ने का मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल घोषित किया जाए।
घटतौली पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर प्रभावी कार्रवाई हो।
ओवरलोड और ओवरहाइट वाहनों पर नियंत्रण किया जाए।

कौन-कौन रहा मौजूद?

ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष चौ. वीर सिंह सहरावत, राष्ट्रीय महासचिव चौ. पदम सिंह, डॉ. गौरव चौधरी, चौ. शेर सिंह, विजेंद्र प्रधान, नौबहार सिंह, अंकित दहिया, सत्यपाल सिंह, आशीष मोदी, फुरकान अली सहित संगठन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

TargetTvLive विश्लेषण

बिजनौर जैसे गन्ना बहुल जिले में किसानों की यह पहल केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कई गंभीर सवालों को सामने लाती है। भुगतान, मूल्य, पारदर्शिता और पर्यावरण जैसे मुद्दे सीधे लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।

20 अगस्त की पंचायत इस लिहाज से महत्वपूर्ण होगी कि क्या प्रशासन, गन्ना विभाग और चीनी मिलें किसानों की चिंताओं का समाधान प्रस्तुत कर पाती हैं या फिर बिजनौर एक नए किसान आंदोलन की ओर बढ़ता है।

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