कांग्रेस कार्यालय के बाहर मशाल लेकर पहुंची भाजपा, भीतर चल रही थी अहम बैठक; कांग्रेस ने उठाया सुरक्षा का बड़ा सवाल

TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट।
बिजनौर, 16 अगस्त 2026। सोनिया गांधी और ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे को लेकर रविवार शाम बिजनौर में भाजपा के मशाल प्रदर्शन ने जिले की सियासत को अचानक गरमा दिया। भाजपा कार्यकर्ता जब मशाल लेकर कांग्रेस कार्यालय के सामने पहुंचे, उस वक्त कांग्रेस कार्यालय के भीतर ‘संगठन सृजन अभियान’ की महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी। बैठक में AICC ऑब्जर्वर एवं विधायक श्रीमती शिखा मील बराला समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद थे।
घटनाक्रम के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती हेनरीटा राजीव सिंह ने भाजपा के प्रदर्शन पर तीखी आपत्ति जताते हुए इसे केवल राजनीतिक विरोध का मामला नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल बताया।
जिस वक्त अंदर वरिष्ठ नेता, उसी वक्त बाहर मशाल लेकर प्रदर्शन
कांग्रेस जिलाध्यक्ष के मुताबिक रविवार शाम करीब सात बजे भाजपा कार्यकर्ता मशाल जलाते हुए कांग्रेस कार्यालय के सामने पहुंचे। उनका कहना है कि उस समय पार्टी की महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक चल रही थी और कार्यालय में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी थी।
यही वह बिंदु है जिसे कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू बनाया है।
कांग्रेस का सवाल है कि जब किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक चल रही हो, तब बड़ी संख्या में दूसरे दल के कार्यकर्ताओं का मशाल लेकर उसी कार्यालय के सामने पहुंचना क्या संभावित टकराव का कारण नहीं बन सकता था?
पार्टी ने इसे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से भी गंभीर विषय बताया है।
‘अगर स्थिति बिगड़ती तो जिम्मेदार कौन होता?’
हेनरीटा राजीव सिंह ने कहा कि राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे दूसरे राजनीतिक दल के कार्यालय में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो।
कांग्रेस के मुताबिक यदि प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी या कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने से स्थिति बिगड़ती तो उसका असर केवल दो राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कानून-व्यवस्था की चुनौती भी पैदा हो सकती थी।
यही वजह है कि कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और प्रशासन की भूमिका तथा सुरक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।
‘वंदे मातरम्’ पर कांग्रेस का पलटवार
भाजपा के प्रदर्शन के केंद्र में रहे ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर कांग्रेस ने भी अपना पक्ष मजबूती से रखा। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ‘वंदे मातरम्’, राष्ट्रीय ध्वज और देश के सभी राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करती है।
उन्होंने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए कांग्रेस और सोनिया गांधी के संबंध में भ्रम तथा गलत प्रचार फैलाने का आरोप लगाया और भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
इससे साफ है कि विवाद केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसके पीछे राष्ट्रवाद, राजनीतिक प्रतीकों और दलों के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का बड़ा विमर्श भी जुड़ गया है।
पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में टला टकराव
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के प्रदर्शन का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया।
यह प्रशासन के लिए भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा की स्थिति थी—एक ओर भाजपा को अपना विरोध दर्ज कराने का लोकतांत्रिक अधिकार था, तो दूसरी ओर कांग्रेस कार्यालय के भीतर चल रही बैठक में मौजूद नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी था।
मौके पर प्रशासन की मौजूदगी ने स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन कांग्रेस द्वारा उठाया गया सुरक्षा का सवाल अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।
बिजनौर की राजनीति में टकराव का नया संकेत?
बिजनौर में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। ऐसे में कांग्रेस कार्यालय के बाहर मशाल प्रदर्शन को महज एक स्थानीय प्रदर्शन के तौर पर देखना शायद पर्याप्त नहीं होगा।
भाजपा के लिए यह प्रदर्शन जहां अपने राजनीतिक और वैचारिक मुद्दे को आक्रामक तरीके से सामने रखने का प्रयास था, वहीं कांग्रेस ने इसके जवाब में सुरक्षा, राजनीतिक मर्यादा और प्रशासनिक जिम्मेदारी को मुद्दा बना दिया है।
यानी एक ही घटनाक्रम में दोनों दलों ने अलग-अलग राजनीतिक नैरेटिव खड़े कर दिए हैं।
असली सवाल अब यह है…
क्या राजनीतिक विरोध की सीमा राजनीतिक कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन तक ही रहेगी या आने वाले दिनों में ऐसे प्रदर्शन और अधिक आक्रामक रूप ले सकते हैं?
बिजनौर का रविवार का घटनाक्रम प्रशासन के लिए भी एक संकेत है कि राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों और कार्यालयों के आसपास सुरक्षा प्रबंधन तथा प्रदर्शन के दौरान दूरी बनाए रखने की व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत पड़ सकती है।
फिलहाल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज कर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। भाजपा का पक्ष सामने आने के बाद विवाद के दोनों पहलुओं की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट।












