मयंक मयूर अब सिर्फ यादों में नहीं, बिजनौर की सड़कों पर भी रहेंगे जिंदा; नामकरण ने फिर जगाई निस्वार्थ सेवा की स्मृतियां

बिजनौर | TargetTvLive | अवनीश त्यागी
तृतीय पुण्यतिथि पर भावुक हुआ माहौल, हवन-श्रद्धांजलि सभा के बाद “मयंक मयूर मार्ग” का भव्य लोकार्पण; वक्ताओं ने कहा—समाजसेवा की ऐसी मिसाल लंबे समय तक याद रहेगी
बिजनौर। कुछ लोग चले जाते हैं, लेकिन उनके काम और उनकी यादें समाज में लंबे समय तक जीवित रहती हैं। स्वर्गीय मयंक मयूर की तृतीय पुण्यतिथि पर बिजनौर में कुछ ऐसा ही भावनात्मक दृश्य देखने को मिला। उनकी स्मृति को स्थायी पहचान देने के लिए नगर पालिका परिषद बिजनौर ने एक मार्ग का नामकरण “मयंक मयूर मार्ग” कर दिया।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में हवन से लेकर श्रद्धांजलि सभा और मार्ग के लोकार्पण तक माहौल भावुक रहा। परिजनों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों, प्रबुद्ध नागरिकों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों ने मयंक मयूर के व्यक्तित्व और उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।
नाम की पट्टिका नहीं, सेवा की कहानी का सार्वजनिक स्मारक
कार्यक्रम में वक्ताओं ने मयंक मयूर के जीवन को निस्वार्थ सेवा और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ाव की मिसाल बताया। कहा गया कि उनका काम करने का अंदाज ही उनकी सबसे बड़ी पहचान था। यही वजह है कि उनके जाने के वर्षों बाद भी लोग उन्हें उसी आत्मीयता से याद करते हैं।
श्रद्धांजलि सभा में यह बात विशेष रूप से उभरकर सामने आई कि किसी व्यक्ति की वास्तविक विरासत उसकी संपत्ति नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए उसके कार्य होते हैं। “मयंक मयूर मार्ग” का नामकरण इसी विरासत को सार्वजनिक स्मृति से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा गया।
हवन से शुरू हुआ कार्यक्रम, श्रद्धांजलि के बाद हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः हवन के साथ हुआ। इसके पश्चात श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय मयंक मयूर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।
श्रद्धांजलि सभा के बाद नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती इन्दिरा सिंह, मयंक मयूर की माता संतोष देवी, भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक डॉ. बीरबल सिंह तथा सभासद मनोज कुमार मनी ने संयुक्त रूप से “मयंक मयूर मार्ग” का लोकार्पण किया।
लोकार्पण के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
इन्दिरा सिंह बोलीं—शहर की पहचान से जुड़ें समाज के प्रेरणास्रोत लोग
नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती इन्दिरा सिंह ने कहा कि नगर पालिका द्वारा शहर के चौराहों और मार्गों के सौंदर्यीकरण के साथ ऐसे लोगों के नाम पर नामकरण का प्रयास किया जा रहा है, जिनका समाज के प्रति विशेष योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में समाज के प्रेरणास्रोत रहे स्वर्गीय मयंक मयूर की स्मृति में मार्ग का नामकरण करने का अवसर मिला है। यह नामकरण उनकी स्मृतियों को जीवित रखने के साथ-साथ समाजसेवा के प्रति नई पीढ़ी को प्रेरित करने का माध्यम भी बनेगा।
शिलालेख हर गुजरने वाले को देगा एक संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने मार्ग पर लगाए गए लोकार्पण शिलालेख को महज पत्थर पर अंकित नाम नहीं, बल्कि निस्वार्थ भाव से समाज के लिए काम करने की प्रेरणा बताया।
महेश पाल सिंह विभाग सरसंघचालक, विकास लाटियान नगर सरसंघचालक, विकास अग्रवाल, प्रशांत महर्षि, सुभाष वाल्मीकि और डॉ. बीरबल सिंह ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मयंक मयूर के योगदान को याद किया।
वक्ताओं के मुताबिक, आने वाले समय में जब भी कोई व्यक्ति इस मार्ग से गुजरेगा और “मयंक मयूर मार्ग” का नाम पढ़ेगा, तो उसके मन में यह सवाल और संदेश दोनों जन्म लेंगे कि आखिर वह कौन व्यक्ति था, जिसके नाम पर यह मार्ग रखा गया। यही किसी सामाजिक व्यक्तित्व की स्मृति को जीवित रखने की सबसे प्रभावी तस्वीर हो सकती है।
संघ परिवार से लेकर सामाजिक क्षेत्र तक बड़ी मौजूदगी
कार्यक्रम में मयंक मयूर के परिजनों के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
इस अवसर पर विदीत चौधरी, प्रांत विद्यार्थी प्रमुख जितेन्द्र चौधरी, प्रदीप जी जिला कार्यवाह, दीपक चौहान नगर कार्यवाह, अनिल चौधरी विश्व हिंदू परिषद, दुष्यंत कुमार, सुरेन्द्र प्रकाश भटनागर, अमित ठाकुर और सभासद संजय बिश्नोई सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
परिवार की आंखों में स्मृतियां, शब्दों में आभार
कार्यक्रम में मयंक मयूर के बड़े भाई गिरवर पाल सिंह ने नगर पालिका परिषद और कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों एवं नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
उनके लिए यह अवसर केवल किसी मार्ग के नामकरण का नहीं, बल्कि परिवार के प्रिय सदस्य की स्मृतियों को शहर की सार्वजनिक पहचान से जुड़ते देखने का भी था।
असली सवाल—क्या स्मृति अब प्रेरणा बनेगी?
बिजनौर में “मयंक मयूर मार्ग” का नामकरण भावनात्मक घटना होने के साथ-साथ एक बड़ा सामाजिक संदेश भी देता है। सार्वजनिक स्थानों को ऐसे व्यक्तित्वों से जोड़ना स्थानीय इतिहास और सामाजिक स्मृति को संरक्षित करने का प्रभावी माध्यम हो सकता है।
लेकिन इस नामकरण की असली सफलता केवल शिलापट्ट पर लिखे नाम से नहीं, बल्कि उससे जुड़े विचार और आदर्श कितने लोगों तक पहुंचते हैं, इससे तय होगी।
मयंक मयूर की स्मृति में अब बिजनौर की एक सड़क उनके नाम से जानी जाएगी। राहगीर गुजरेंगे, वाहन दौड़ेंगे, शहर आगे बढ़ेगा—लेकिन मार्ग पर लिखा उनका नाम हर दिन यह याद दिलाता रहेगा कि निस्वार्थ भाव से समाज के लिए किया गया काम व्यक्ति के चले जाने के बाद भी उसकी पहचान को जीवित रख सकता है।
अवनीश त्यागी | TargetTvLive












