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प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन पर सवाल? KGVB भर्ती में EWS आरक्षण को लेकर बिजनौर प्रशासन से सवाल ?

प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन पर सवाल? KGVB भर्ती में EWS आरक्षण को लेकर बिजनौर प्रशासन से सवाल ?

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बना था 10% आरक्षण, लेकिन बिजनौर की भर्ती में पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय (KGBV) की संविदा भर्ती प्रक्रिया में अब सबसे बड़ा मुद्दा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण का बन गया है। कट-ऑफ सूची जारी होने के बाद भी अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें आज तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी कि भर्ती में EWS आरक्षण का पालन किस प्रकार किया गया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के युवाओं को समान अवसर देने के लिए संविधान में संशोधन कर 10 प्रतिशत EWS आरक्षण लागू किया है, तो प्रत्येक भर्ती में उसके पालन की जानकारी भी पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक होनी चाहिए।

क्या है EWS आरक्षण?

वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने संविधान के 103वें संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया। इसका उद्देश्य ऐसे सामान्य वर्ग के परिवारों को अवसर देना था, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अन्य आरक्षित वर्गों में शामिल नहीं हैं।

इसके लिए संविधान में अनुच्छेद 15(6) और 16(6) जोड़े गए।

भर्ती में क्यों उठ रहे हैं सवाल?

KGBV भर्ती से जुड़े कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि—

  • कुल कितने पदों पर भर्ती हुई?
  • उनमें EWS के लिए कितने पद निर्धारित किए गए?
  • कितने EWS अभ्यर्थियों का चयन हुआ?
  • आरक्षण रोस्टर का पालन किस प्रकार किया गया?

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि यह जानकारी सार्वजनिक कर दी जाए तो भर्ती प्रक्रिया को लेकर अधिकांश विवाद समाप्त हो सकते हैं।

EWS आरक्षण केवल घोषणा नहीं, संवैधानिक अधिकार

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार EWS आरक्षण केवल सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि संविधान में जोड़ा गया प्रावधान है। यदि किसी भर्ती में यह लागू होता है, तो संबंधित भर्ती नियमों और लागू रोस्टर के अनुसार इसका पालन किया जाना चाहिए।

साथ ही, भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए श्रेणीवार पदों और चयन प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध होना भी सुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

अभ्यर्थियों की मांग

भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग से मांग की है कि निम्नलिखित जानकारी सार्वजनिक की जाए—

  • EWS श्रेणी के लिए स्वीकृत पदों की संख्या।
  • भर्ती में लागू आरक्षण रोस्टर।
  • EWS श्रेणी में चयनित अभ्यर्थियों का विवरण।
  • यदि किसी पद पर EWS आरक्षण लागू नहीं किया गया, तो उसका नियम और कारण।

अभ्यर्थियों का कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगी और किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा।

प्रशासन से जवाब की प्रतीक्षा

समाचार प्रकाशित होने तक जिला प्रशासन अथवा बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से इस भर्ती में EWS आरक्षण के अनुपालन का विस्तृत सार्वजनिक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया था।

यदि संबंधित विभाग अपना आधिकारिक पक्ष या रोस्टर सार्वजनिक करता है, तो TargetTvLive उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

सबसे बड़ा सवाल

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को अवसर देने के लिए बनाई गई संवैधानिक व्यवस्था का इस भर्ती में किस प्रकार पालन हुआ? जब तक इस प्रश्न का स्पष्ट और आधिकारिक उत्तर सामने नहीं आता, तब तक EWS आरक्षण को लेकर उठ रहे सवाल और अभ्यर्थियों की शंकाएं बनी रह सकती हैं।

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