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“KGBV में संविदा भर्ती के नाम पर खेल! “पहले नियुक्ति पत्र, फिर चयन सूची और अब 29 जुलाई को मेरिट!  सिस्टम के अजब खेल की गजब कहानी 

“KGBV में संविदा भर्ती के नाम पर खेल!

“पहले नियुक्ति पत्र, फिर चयन सूची और अब 29 जुलाई को मेरिट!  सिस्टम के अजब खेल की गजब कहानी 

“बिजनौर की कस्तूरबा भर्ती में पहले नियुक्ति पत्र बांटे गए, फिर चयन सूची आई और अब मेरिट लिस्ट जारी होने वाली है। क्या यह पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया है या प्रशासनिक लीपापोती? पढ़िए TargetTvLive की सबसे बड़ी खोजी रिपोर्ट।”

रिपोर्ट : अवनीश त्यागी | TargetTvLive Investigative Desk

बिजनौर। उत्तर प्रदेश सरकार लगातार पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती प्रक्रिया का दावा करती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रमों में योग्यता आधारित चयन और सुशासन की बात करते हैं। लेकिन बिजनौर के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय (KGBV) भर्ती प्रकरण ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस भर्ती का घटनाक्रम किसी सामान्य सरकारी भर्ती प्रक्रिया से बिल्कुल उलट दिखाई देता है। यहां पहले नियुक्तियां हुईं, फिर चयनित अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक की गई और अब 29 जुलाई को मेरिट सूची जारी किए जाने की घोषणा की गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भर्ती प्रक्रिया का कौन सा मॉडल बिजनौर में लागू किया गया है?

क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है या फिर संविदा भर्ती के नाम पर नियमों को सुविधानुसार लागू किया जा रहा है? यही सवाल आज हजारों अभ्यर्थियों के मन में है।

TargetTvLive की खबर के बाद जागा जिला प्रशासन

कस्तूरबा भर्ती प्रकरण में TargetTvLive द्वारा लगातार प्रकाशित खोजी समाचारों के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, EWS आरक्षण, मेरिट सूची और चयनित अभ्यर्थियों के प्राप्तांक को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद प्रशासन ने पहले चयनित अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक कराई।

हालांकि, उस सूची में भी चयनित अभ्यर्थियों के प्राप्तांक का उल्लेख नहीं किया गया। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रण विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि स्कूल आवंटन के बाद 29 जुलाई को मेरिट सूची सार्वजनिक की जाएगी।

पहले नियुक्ति, फिर मेरिट! आखिर यह कैसे संभव?

सामान्य सरकारी भर्ती प्रक्रिया में घटनाक्रम कुछ इस प्रकार होता है—

  • विज्ञापन जारी होता है।
  • आवेदन लिए जाते हैं।
  • चयन प्रक्रिया संपन्न होती है।
  • मेरिट सूची जारी होती है।
  • परिणाम घोषित किया जाता है।
  • नियुक्ति पत्र वितरित किए जाते हैं।

लेकिन बिजनौर की KGBV भर्ती प्रक्रिया ने सरकारी भर्ती का एक नया मॉडल प्रस्तुत कर दिया है—

  • भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हुई।
  • नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।
  • चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई।
  • अब 29 जुलाई को मेरिट सूची जारी होगी।

यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी थी, तो मेरिट सूची को नियुक्तियों के बाद जारी करने का औचित्य क्या है? यह प्रश्न भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधे सवाल खड़ा करता है।

क्या केवल लीपापोती हो रही है?

TargetTvLive के विश्लेषण के अनुसार यदि मेरिट सूची चयन प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है, तो उसे नियुक्तियों के बाद जारी करने का कोई व्यावहारिक महत्व नहीं रह जाता।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि नियुक्तियां पहले ही सुनिश्चित हो चुकी हैं, तो बाद में जारी होने वाली मेरिट सूची से असफल अभ्यर्थियों को क्या लाभ मिलेगा?

क्या वे चयन प्रक्रिया को चुनौती दे पाएंगे?

क्या वे यह साबित कर पाएंगे कि उनके साथ अन्याय हुआ है?

इन सवालों का जवाब प्रशासन के पास फिलहाल नहीं है।

संविदा भर्ती का सबसे बड़ा सच

इस पूरे प्रकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में नियुक्तियां संविदा (Contractual) आधार पर की जाती हैं। इनकी अवधि सामान्यतः एक वर्ष की होती है।

ऐसे में यदि कोई अभ्यर्थी न्यायालय की शरण में भी जाता है, तो कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक संविदा अवधि समाप्त होने की संभावना रहती है। यही कारण है कि अधिकांश अभ्यर्थी संविदा नियुक्तियों को कानूनी चुनौती देने से बचते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि संविदा भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और अधिक आवश्यक हो जाती है, क्योंकि इनके विरुद्ध न्यायिक उपचार व्यवहारिक रूप से सीमित हो सकता है।

EWS आरक्षण पर भी प्रशासन ने मानी कमी

इस भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थियों को अवसर न मिलने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया था।

मुख्य विकास अधिकारी रण विजय सिंह ने TargetTvLive को बताया कि वर्तमान में कुछ पद रिक्त हैं। इन रिक्त पदों को EWS वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा तथा इनके लिए जारी होने वाले विज्ञापन में EWS आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।

यह अपने आप में इस बात का संकेत है कि भर्ती प्रक्रिया में EWS वर्ग से संबंधित मुद्दों पर पुनर्विचार किया गया है।

TargetTvLive Investigation : सबसे बड़े सवाल

इस पूरे प्रकरण में कुछ सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब अभी भी मिलना बाकी है—

  • यदि नियुक्तियां हो चुकी हैं, तो मेरिट सूची अब क्यों जारी की जा रही है?
  • चयनित अभ्यर्थियों के प्राप्तांक अभी तक सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए?
  • क्या मेरिट सूची में श्रेणीवार प्राप्तांक प्रकाशित किए जाएंगे?
  • क्या नियुक्तियों से पहले मेरिट सूची जारी न करना नियमसम्मत है?
  • क्या संविदा भर्ती होने के कारण इस प्रक्रिया को चुनौती दिए जाने की संभावना कम मानी जा रही है?
  • क्या प्रशासन भर्ती प्रक्रिया से संबंधित सभी अभिलेख सार्वजनिक करेगा?

क्या कहता है प्रशासन?

मुख्य विकास अधिकारी रण विजय सिंह के अनुसार—

“स्कूल आवंटन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद 29 जुलाई को मेरिट सूची चस्पा कराई जाएगी। वर्तमान में कुछ पद रिक्त हैं, जिन्हें EWS वर्ग के लिए रखा जाएगा तथा विज्ञापन में EWS आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।”

TargetTvLive Analysis

लोकतंत्र में पारदर्शिता केवल एक प्रशासनिक शब्द नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की आत्मा है। यदि मेरिट सूची चयन प्रक्रिया का आधार है, तो उसे नियुक्तियों के बाद जारी किया जाना कई स्वाभाविक प्रश्न खड़े करता है।

यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि यदि मीडिया द्वारा सवाल न उठाए जाते, तो क्या मेरिट सूची कभी सार्वजनिक होती?

कस्तूरबा भर्ती प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में समयबद्ध और पूर्ण पारदर्शिता ही विवादों से बचने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

अब 29 जुलाई को जारी होने वाली मेरिट सूची केवल अभ्यर्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की भी अग्निपरीक्षा होगी।

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