बिजनौर के ‘ग्रीन गुरु’ कल्याण सिंह: उम्र नहीं, संकल्प बड़ा; स्कूलों में बांट रहे हरियाली की सीख
शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, कल्याण सिंह चौहान ने किया साबित
बिजनौर के सेवानिवृत्त शिक्षक कल्याण सिंह चौहान पिछले 16 वर्षों से विद्यालयों में पौधारोपण कर बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। पढ़िए उनकी प्रेरणादायक हरित यात्रा।
बिजनौर। बेसिक शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हुए 16 वर्ष बीत जाने के बाद भी कल्याण सिंह चौहान समाज और पर्यावरण के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं। वह आज भी विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर पौधारोपण करते हैं और बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। उनका मानना है कि शिक्षक केवल नौकरी से सेवानिवृत्त होता है, अपने कर्तव्यों से नहीं।
मानसून में बन जाते हैं हरियाली के दूत
हर वर्ष मानसून सत्र शुरू होते ही कल्याण सिंह चौहान के कदम किसी न किसी विद्यालय की ओर बढ़ जाते हैं। उनके हाथों में पौधे होते हैं और मन में नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने का संकल्प। वह विद्यालयों में फूलदार और छायादार पौधों का रोपण कर बच्चों को उनकी देखभाल की सीख भी देते हैं।
सोमवार को उन्होंने प्राथमिक विद्यालय चांदपुर फेरू पहुंचकर विद्यालय परिसर में फूलदार पौधे लगाए। इस दौरान बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, वृक्षों के महत्व और स्वच्छ जीवन शैली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पौधारोपण को बनाया जीवन का संकल्प
विज्ञान विषय के शिक्षक रहे कल्याण सिंह चौहान को शुरू से ही बागवानी का शौक रहा है। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने इसे समाज सेवा का माध्यम बना लिया। उनके घर की छत भी विभिन्न प्रकार के पौधों से सजी हुई है, जो प्रकृति के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाती है।
उनका कहना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति मानसून सत्र में कम से कम पांच पौधे लगाकर उनकी देखभाल का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।
बच्चों को दिया स्वच्छ पर्यावरण का संदेश
कल्याण सिंह चौहान ने बच्चों से कहा कि वृक्ष केवल हमें ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य भी प्रदान करते हैं। उन्होंने बच्चों से पौधों को मित्र मानकर उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बच्चों में बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि आज की पीढ़ी प्रकृति के महत्व को समझेगी, तभी कल का भारत अधिक हरित और स्वस्थ बन सकेगा।
शिक्षकों से मिलना भी बन जाता है सुखद अवसर
कल्याण सिंह चौहान बताते हैं कि विद्यालयों में पौधारोपण करने से उन्हें अपने पुराने शिक्षक साथियों से मिलने का अवसर भी प्राप्त होता है। उनके अनुसार जिले के अनेक शिक्षक पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
कार्यक्रम में रही इनकी सहभागिता
इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षक मोहम्मद तारिक अलीम, सहायक अध्यापक राजकुमार सिंह, प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार, शिक्षिका ममता जोशी, श्रीमती मंजुला बनिक, डॉ. गीता, श्रीमती सुषमा रानी सहित विद्यालय के शिक्षकगण एवं स्कूली बच्चों ने पौधारोपण कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।
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” प्रेरणा की हरियाली”
कल्याण सिंह चौहान की कहानी केवल पौधारोपण की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस गुरु की कहानी है, जिसने सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज को दिशा देना नहीं छोड़ा। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, तब बिजनौर के इस शिक्षक ने अपने कर्मों से यह संदेश दिया है कि बदलाव बड़े मंचों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे प्रयासों से आता है।
सच ही कहा गया है—“एक अच्छा शिक्षक जीवन भर शिक्षक ही रहता है।” कल्याण सिंह चौहान इसी सत्य को हर दिन जी रहे हैं। उनके हाथों से लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद, प्रेरणा और हरियाली का संदेश लेकर बढ़ रहा है।
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